कपास की फसल में नुकसान रोकने की कवायद, एचएयू ने बनाया यह प्लान

पिछले वर्ष कपास में काफी नुकसान हुआ था। इसे देखते हुए एचएयू ने यह योजना बनाई है।

एचएयू हिसार में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। कृषि विज्ञानियों ने कपास फसल में समस्या के निवारण के लिए अपने विचार साझा किए। फसल में आने वाली बीमारी या कीट पतंगों एवं उनके उपचारों के बारे में विस्तार से बताया।

Umesh KdhyaniTue, 20 Apr 2021 04:52 PM (IST)

हिसार, जेएनएन। पिछले साल कपास में किसानों को काफी नुकसान हो गया था। इस बार प्रबंधन के साथ सरकार काम करना चाहती है। इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृृषि विश्वविद्यालय में बाकायदा एक प्रशिक्षण शिविर में जानकारियां दी जा रही हैं। इसकी अध्यक्षता संयुक्त कृृषि निदेशक (कपास) डा. रामप्रताप सिहाग कर रहे हैं।

शिविर में हिसार जिले के कृृषि विभाग से जुड़े सभी अधिकारी व कर्मचारियों, उपमंडल कृृषि अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, खंड कृृषि अधिकारी, कृृषि विकास अधिकारी, एटीएम, बीटीएम एवं कृृषि सुपरवाइजर्स ने भाग लिया। पिछले वर्ष कपास बिजाई क्षेत्र में फसल में बीमारी, कीट एवं अन्य समस्या का प्रकोप बहुतायत मात्रा में हुआ था। इसी को लेकर यह प्रशिक्षण दिया गया है।

इन विज्ञानियों ने दी जानकारी

प्रशिक्षण शिविर में कृृषि विभाग एवं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इन समस्याओं के समाधान एंव तकनीकी बिंदुओं पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण में हरियाणा कृृषि विश्वविद्यालय के प्लांट ब्रीडिंग विभाग से डा. सोमबीर, सस्य विभाग से डा. करमल मलिक, पैथोलोजी विभाग से डा. मनमोहन, कीट विभाग से डा. अनिल जाखड़ ने तकनीकी विषय रखे। वैज्ञानिकों ने अपने अनुभवों से कपास फसल में समस्या के निवारण के लिए अपने विचार साझा किए तथा आने वाली बीमारी या कीट पतंगा एवं उनके उपचार के बारे में विस्तार से बताया।

हर जिले में दो-दो कपास के प्रदर्शन प्लांट लगाए जाएंगे

संयुक्त कृृषि निदेशक (कपास) डा. राम प्रताप सिहाग ने बताया कि कृषि विभाग एवं कृृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के समन्वय से हर जिले में दो-दो कपास के प्रदर्शन प्लांट लगाने हैं, जिसके लिए किसानों की सूची मांग ली गई है। इन प्रदर्शन प्लाटों को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृृषि विश्वविद्यालय की समग्र सिफारिशों अनुसार लगाने तथा किसानों को कपास फसल के बारे में व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान देकर ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने के कार्यक्रम तैयार किए गए हैं, ताकि गत वर्ष हुई कपास फसल में बीमारी, कीट के प्रकोप एवं नुकसान से किसानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।  फील्ड स्तर पर दिन-प्रतिदिन इस समस्या का समाधान करना भी सुनिश्चित किया जाएगा।

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