Haryana Weather Update: हरियाणा में तीन दिसंबर को हो सकती है बारिश, पश्चिमी विक्षोभ हो रहा है सक्रिय

राज्य में मौसम आमतौर पर छह दिसंबर तक परिवर्तनशील बने रहने की संभावना है। मगर पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण राज्य के उत्तर दक्षिण क्षेत्रों में तीन दिसंबर रात्रि को कुछ एक स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना है ।

Manoj KumarWed, 01 Dec 2021 09:40 AM (IST)
हरियाणा में बूंदाबांदी के असार बन रहे हैं इसके बाद ठंड बढ़ जाएगी

जागरण संवाददाता, हिसार। हिसार में पिछले कई दिनों से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। अब तीन दिसंबर को मौसम विज्ञानियों ने बारिश का अंदेशा जताया है। बारिश आई तो तापमान में हल्की गिरावट भी हो सकती है। हालांकि छिटपुट बारिश को अंदेशा जताया जा रहा है। मंगलवार को हिसार में दिन का तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस व रात्रि तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके साथ ही एयर क्वालिटी इंडेक्स 338 रहा। पिछले दिनों की अपेक्षा मंगलवार को प्रदूषण कुछ कम हुआ है। हालांकि अभी भी वायु खतरनाक स्तर पर बह रही है। बारिश आने के बाद प्रदूषण से राहत जरूर मिल सकती है।

छह दिसंबर तक मौसम परिवर्तनशील

चौधरी चरण सिंह हरियाण कृषि विश्वविद्यालय के कृषि माैसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. मदन खिचड़ ने बताया कि राज्य में मौसम आमतौर पर छह दिसंबर तक परिवर्तनशील बने रहने की संभावना है। मगर पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण राज्य के उत्तर दक्षिण क्षेत्रों में तीन दिसंबर रात्रि को कुछ एक स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना है । इसके बाद पांच दिसंबर को एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है जिसके आंशिक प्रभाव से पांच दिसंबर रात्रि व छह दिसंबर को राज्य में बादलवाई व हवा व गरजचमक के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश भी संभावित है। इस दौरान राज्य में दिन के तापमान में हल्की गिरावट परन्तु रात्रि तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ

पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यरेखा-क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली वह बाह्य- उष्ण कटिबंधीय आंधी है जो सर्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भागों में अकस्मात मैदानी क्षेत्रों में बारिश तो पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी ले आती है। यह बारिश मानसून की बरसात से भिन्न होती है। बाह्य-उष्णकटिबंधीय आंधियां विश्व में सब जगह होती हैं। इनमें नमी सामान्यत: ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच जाती है, जबकि उष्ण कटिबंधीय आंधियों में आर्द्रता निचले वायुमंडल में बनी रहती है। भारतीय महाद्वीप में जब ऐसी आंधी हिमालय तक जा पहुंचती है तो नमी कभी-कभी बारिश के रूप में बदल जाती है। यह ईरान ईराक अफगानिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश करते हैं। हर माह में पश्चिमी विक्षोभ चार से पांच आते हैं।

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