Haryana weather update: हरियाणा में 10 दिन देरी से पहुंच रहा मानसून, इस दिन होगी बारिश

हरियाणा में मानसून 25 से 30 जून के बीच आता है। लेकिन दस दिन देरी हो चुकी है। अभी बारिश के लिए और इंतजार करना होगा। गर्मी और उमस ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। ऐसे मौसम से फसलों में कीट लगने की संभावना बढ़ जाती है।

Umesh KdhyaniMon, 05 Jul 2021 09:23 AM (IST)
इस बार 9 जुलाई को हरियाणा में मानसून आने की उम्मीद है।

जागरण संवाददाता, हिसार। मानसूनी हवाएं धीमे-धीमे हरियाणा की तरफ बढ़ रही हैं। 9 जुलाई तक इनके हरियाणा में पहुंचने की संभावना है साथ ही यह बारिश भी करेंगी। अभी तक मानसून के अनुकूल परिस्थितियां चल रही हैं। अक्सर 25 से 30 जून के बीच हरियाणा में मानसून आने की संभावना रहती है मगर इस बार 9 जुलाई को मानसून आया तो हरियाणा में 10 दिन की देरी दर्ज की जाएगी। 

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. मदन खिचड़ ने बताया कि आने वाले तीन दिनों में बादलवाई रहेगी। मौसम में उमस भी देखने को मिलेगी। हिसार में अभी दिन का तापमान सामान्य से अधिक चल रहा है। मानसून के देरी से आने का फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव तो पड़ेगा। मौजूदा समय में धान, नरमा फसल को किसान कर रहे हैं। इस प्रकार के मौसम से फसलों में कीट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। मगर बारिश हो सकता है इसका समाधान करे।

चक्रवातों से उठने वाली नमीयुक्त हवाओं ने अग्रिम किया मानसून

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आए यास व टाक्टे तूफान के कारण वातावरण में नमी मौजूद रही। ऐसे में तीन जून को जब केरल में मानसून आया तो इन नमीयुक्त हवाओं के संपर्क मे आकर अग्रिम हो गया। इन हवाओं ने मानसून को तेजी से आगे बढ़ाने का काम किया। और कुछ ही दिनों में मानसून उत्तरी हरियाणा तक भी पहुंच गया। यहां तक कि 19 जून के आसपास अंबाला के निकट मानसूनी टर्फ रेखा भी बन गई। मगर जितनी तेजी से मानसून आया उतनी ही तेजी से चला भी गया।

इस वजह से हरियाणा में नहीं हुई मानसून की बारिश

एक तरफ तो चक्रवातों ने मानसून को प्रभावित किया। इसके बाद प्रदेश में लगातार पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहे हैं। जो ईरान, इराक, अफगानिस्तान पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश करते हैं। पश्चिमी विक्षोभ अपने साथ पश्चिमी हवाएं भी लेकर आते हैं। यहां ऊपर भी पश्चिमी हवाएं चल रही थीं तो उन्होंने भी मानसून की नमी को रोकने का काम किया। जिसके कारण मानसून बीते शनिवार तक रुका हुआ था। इसके साथ ही मानसूनी हवाएं हिमालय की तलहटी की तरफ बढ़ गईं। जबकि यह उनका रास्ता नहीं था। पश्चिमी विक्षोभ के जाने के बाद मानसूनी टर्फ रेखा थोड़ी दक्षिण की तरफ नीचे आने से प्री मानसून की बारिश हुई।

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