NITI Aayog Meeting: हरियाणा की ओर से खेती की ऐसी तस्वीर दूसरे राज्यों के लिए नजीर

हरियाणा की ऐसी तस्वीर दूसरे राज्यों के लिए नजीर बनकर सामने आ सकती है।

NITI Aayog Meeting नीति आयोग की बैठक में हरियाणा की ओर से खेती को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों के बेहतर एवं उचित उपयोग की जिस प्रणाली का जिक्र किया गया है वह दूसरे राज्यों के लिए नजीर बन सकती है। फाइल

Sanjay PokhriyalWed, 24 Feb 2021 10:52 AM (IST)

चंडीगढ़, अनुराग अग्रवाल। NITI Aayog Meeting नीति आयोग की हाल ही में हुई बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जिस तरह अपने प्रदेश के किसानों की बात रखी, उससे दिल्ली की सीमा पर तीन कृषि कानूनों के विरोध में डटे किसान संगठनों को सोचने पर मजबूर होना पड़ गया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि अब किसान आंदोलन केंद्र सरकार के विरुद्ध राजनीतिक दलों की व्यक्तिगत लड़ाई बन चुका है। आंदोलन में शामिल कई किसान संगठन भी स्वयं इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तो दो दिन पहले खुलकर कह दिया कि ऐसे-ऐसे लोग तीन कृषि कानूनों के विरोध में उतर आए, जिन्होंने इसे पढ़कर भी नहीं देखा। बहरहाल इस राजनीतिक लड़ाई से इतर हरियाणा सरकार अपने प्रदेश के किसानों के हित साधने को लेकर खासी फिक्रमंद दिखाई दे रही है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नीति आयोग की बैठक में केंद्र सरकार से जिस तरह एसवाईएल और हांसी बुटाना लिंक नहर के निर्माण के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है, उससे साफ है कि सरकार किसी भी सीमा तक जाकर अपने हिस्से का पानी लेना चाहती है। हरियाणा एक पानी की कमी वाला राज्य है। उसे किशाऊ डैम के लिए होने वाले एमओयू से भी पानी उपलब्ध होने की खासी उम्मीद है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ लखवार और रेणुका डैम के लिए पहले ही एमओयू हो चुके हैं। हरियाणा की पीड़ा यह है कि प्रदेश का अधिकतर हिस्सा डार्क जोन में तब्दील होता जा रहा है। इसलिए केंद्र सरकार एसवाईएल, हांसी बुटाना लिंक नहर के मुद्दे पर हस्तक्षेप कर इसे सुलझाने में मदद करे तो हरियाणा को अपने हिस्से का पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

भाजपा ने पार्टी स्तर पर भी एसवाईएल नहर निर्माण के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का अभियान शुरू किया है। पांच मार्च से आरंभ होने जा रहे विधानसभा के बजट सत्र में एसवाईएल नहर निर्माण के हक में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाने वाला है। सदन के नेता के नाते मुख्यमंत्री मनोहर लाल स्वयं यह प्रस्ताव लेकर आ सकते हैं। जजपा सत्ता में साझीदार है। लिहाजा डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला तो इस प्रस्ताव के हक में होंगे ही, साथ ही विपक्ष के नेता के नाते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी अपने विधायकों के साथ इस प्रस्ताव का विरोध नहीं कर सकेंगे। इससे न केवल पंजाब पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को लागू करने के लिए मजबूर हो जाएगी, जो हरियाणा के हक में आ चुका है।

इसके अलावा नीति आयोग की बैठक में हरियाणा की ओर से खेती को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों के बेहतर एवं उचित उपयोग की जिस प्रणाली का जिक्र किया गया है, वह दूसरे राज्यों के लिए नजीर बन सकती है। हरियाणा जिला स्तर पर फसल प्रणाली को कृषि जलवायु परिस्थितियों के साथ जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। धान की फसल के स्थान पर वैकल्पिक फसलों मक्का, कपास, बाजरा, दालें, सब्जियां और फलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना शुरू की जा चुकी है। इस योजना के तहत किसानों को फसल विविधिकरण अपनाने के लिए सात हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 97 हजार एकड़ भूमि पर धान के स्थान पर दूसरी वैकल्पिक फसलों की बुआई की गई है।

हरियाणा सरकार का फोकस जल संरक्षण पर भी है। इसके लिए हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण और हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन हो चुका है। हरियाणा में गन्ने का सबसे ज्यादा 350 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य है। प्रदेश में चना, सरसों, सूरजमुखी, बाजरा और मक्का जैसी विभिन्न फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है। हरियाणा ने तो राजस्थान का बाजरा भी अपने यहां खरीदा है। बागवानी किसानों के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना शुरू कर दी गई है, जिसमें 20 फलों और सब्जियों को शामिल किया गया है। इससे पहले सब्जी किसानों को जोखिम फ्री करने के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू की गई थी। पराली निस्तारण के लिए केंद्र के सहयोग से कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट स्थापित करने की हरियाणा की योजना है। फसल कटाई के बाद भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने को वेयर हाउसिंग योजना के तहत गोदाम स्थापित होंगे, जिन्हें डीम्ड मंडी के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि वहीं से उपज की बिक्री हो सके। 

[स्टेट ब्यूरो प्रमुख, हरियाणा]

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