ट्रिपल मर्डर केस : चौधर के लिए फाग के दिन हुआ था हिसार के गांव में खूनी संघर्ष, 10 की हो चुकी हत्‍या

हत्याकांड के बाद कर्फ्यू लगने से छावनी में तबदील हो गया था पूरा शेखपुरा गांव। - जागरण आर्काइव

चार साल पहले 13 मार्च 2017 को उपमंडल के गांव शेखपुरा में चौधर को बरकरार रखने के लिए दो गुटों में हुई खूनी जंग में मारे गए तीन लोगों के मामले में हिसार की अदालत द्वारा आठ लोगों आरोपितों को दोषी करार दिया गया है। चर्चा का विषय बना है।

Manoj KumarWed, 03 Mar 2021 02:24 PM (IST)

हांसी [पंकज नागपाल] कभी एकजुट होकर कारोबार करने वाले शेखपुरा के सुभाष गुर्जर व बलबीर प्रधान के रास्ते 12 साल पहले एक प्लाट की राशि के बंटवारे को लेकर अलग-अलग हो गए और दोनों के बीच खिंची दुश्मनी की ये लकीर समय बीतने के साथ-साथ बढ़ती चली गई और 13 मार्च 2017 को फाग के दिन दोनों गुटों ने खून की ऐसी होली खेली जिसमें गोली लगने से तीन लोग मौत का शिकार हो गए।

चार साल पहले 13 मार्च 2017 को उपमंडल के गांव शेखपुरा में चौधर को बरकरार रखने के लिए दो गुटों में हुई खूनी जंग में मारे गए तीन लोगों के मामले में हिसार की अदालत द्वारा आठ लोगों आरोपितों को दोषी करार दिए जाने के बाद गांव के लोग सूचना पाकर चार साल पहले की घटना को याद कर बोल रहे थे कि इस खूनी खेल से गांव की साख पर ऐसा कलंक लगा कि दूसरे गांव के लोग उनके गांव शेखपुरा को घृणा की दृष्टि से देखने लगे। शेखपुरा गांव के निवासी डीएसपी भगवान दास के भाई सुभाष गुट के आठ लोगों को अदालत ने दोषी करार दिया है जबकि डीएसपी भगवान दास सुसाइड मामला अभी पंचकूला की अदालत में सुनवाई पर है।

13 मार्च 2017 को खूनी जंग से पहले बलबीर गुर्जर गुट व सुभाष गुर्जर गुट के बीच छोटी छोटी बातों पर कहासुनी होती थी। फाग के दिन रामकुमार के लड़के संजय व अमित कसाना की सुभाष गुर्जर के साथ मारपीट हुई जिसे अन्य लोगों ने निपटा दिया। दोपहर 3 बजे उमेद रावत और संदीप के बीच फिर झगड़ा हुआ और ये झगड़ा खूनी जंग के रूप में तब्दील हो गया। चार बजे 20-25 राउंड गोलियां चली जिसमें से रामकुमार कसाना, बलबीर गुर्जर के भतीजे मुकेश व प्रदीप फौजी की मौके पर मौत हो गई थी।

रामकुमार के पुत्र टिनू की आंख में गोली लग गई थी और बीच बचाव करने आये एक युवक महेंद्र उर्फ कालिया के पांव में गोली लगी थी। इसके बाद गांव में तनाव को देखते हुए गांव में कर्फ्यू लगा दिया गया था और डीएसपी भगवानदास उसके भाई सुभाष सहित 24 लोगों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था।

घटना के तीन दिन बाद डीएसपी भगवान दास ने पंचकूला में खुद को गोली मारकर कर लिया था सुसाइड

फाग के दिन खूनी खेल के तीन दिन बाद डीएसपी भगवान दास की ट्रांसफर होने के बाद भगवान दास ने पंचकूला में स्थित अपने क्वार्टर पर कनपटी पर गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। गोली लगने से घायल डीएसपी 13 दिन तक मौत से लड़ते रहे और 13 दिन बाद उनकी मौत हो गई। इस मामले में डीएसपी के भाई के बयान पर बलबीर गुर्जर, संदीप, रामकुमार कसाना के बेटे अमित, संजय, टिनू पर मामला दर्ज किया गया था। डीएसपी ने सुसाइड नोट में इन सभी आरोपितों को अपनी मौत का दोषी बताया था। ये मामला पंचकूला की अदालत में विचाराधीन है।

24 पर दर्ज हुआ था मामला, 14 आरोपितों को पुलिस ने जांच में निकाला

शेखपुरा ट्रिपल मर्डर मामले में फाग के दिन हुए गोली कांड में बलबीर गुर्जर गुट की शिकायत पर सुभाष गुर्जर गुट के 24 लोगों पर मामला दर्ज हुआ था जिसमें से 14 आरोपितों को पुलिस जांच में निकाल दिया गया था। मंगलवार को अदालत ने 8 लोगों को दोषी करार दिया जबकि दफा 216 के मामले में दो आरोपितों को बरी कर दिया।

ट्रिपल मर्डर केस से लेकर आज तक 10 लोग हो चुके हैं मौत का शिकार

शेखपुरा में ट्रिपल मर्डर कांड से लेकर अब तक करीब 10 लोग मारे जा चुके है। फाग के दिन गोली लगने से रामकुमार, मुकेश व प्रदीप फौजी की मौत हुई। उसके बाद मौत की सूचना मिलने पर गांव शेखपुरा आ रहे मुकेश के मामा फौजी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उनके पीछे आ रही गाड़ी की एक अन्य गाड़ी से भीषण टक्कर में मुकेश के दो और रिश्तेदारों की मौत हो गई। आरोपित दलेल के भाई दलीप की भी दलेल पर मामला दर्ज होने की सूचना मिलने पर हार्ट अटैक से मौत हो गई। डीएसपी भगवान दास के सुसाइड की सूचना मिलने पर सदमे में रामेश्वर ने भी दम तोड़ दिया। रामकुमार के भाई पप्पल पर मामला दर्ज होने की सूचना मिलने पर उसकी मां की भी मौत हो गई।

हत्याकांड के बाद से गांव में स्थापित हुई पुलिस चौकी में आज भी तैनात है पूरा स्टाफ

ट्रिपल मर्डर कांड के बाद गांव में पुलिस चौकी स्थापित कर दी गई और पिछले 4 सालों से गांव में पुलिस चौकी में पूरा स्टाफ सुरक्षा को लेकर तैनात है। इसके बावजूद दोनों गुटों में गोली चलने की वारदातें हो चुकी है। करीब 2 साल पहले पुल के पास सुभाष गुट के लोगों ने बलबीर गुर्जर के भतीजे पर हमला कर दिया था और जवाबी कार्रवाई करते हुए बलबीर गुट के लोगों ने दलेल व रामफल पहलवान के भतीजे के हाथ-पांव तोड़ दिये थे।

पंचायत चुनाव के बाद शुरू हुई दुश्मनी बदल गई थी खूनी होली में

रंजिश बढ़ने के साथ ही बलबीर प्रधान व डीएसपी पक्ष ने गांव में युवकों के साथ अपने अलग-अलग गुट बना लिये और मामूली विवाद पर भी दोनों गुट आमने-सामने होकर मरने-मारने पर उतारू होने लगे। 17 जनवरी 2016 को गांव में हुए पंचायत चुनाव में डीएसपी भगवान दास की बेटी पूजा की जीत के बाद 10 वर्षो से सरपंच पद पर काबिज बलबीर प्रधान और डीएसपी भगवानदास के करीबी माने जाने वाले सुभाष गुर्जर के बीच रंजिश और बढ़ गई। इसी रंजिश के चलते सोमवार को फाग के दिन शेखपुरा में खून की होली को अंजाम दिया गया और गांव के तीन लोग गोली लगने से मौत का शिकार हो गए।

शादी से एक महीना पहले ही मुकेश हो गया गोलीकांड का शिकार

13 मार्च 2017 को होली पर शेखपुरा में हुए गोलीकांड में मौत का शिकार हुए बलबीर प्रधान के 28 वर्षीय भतीजे मुकेश की घटना के एक महीने 6 दिन बाद 19 अप्रैल को फतेहाबाद के खुगड़वाल गांव में शादी तय थी। मुकेश प्रतिभाशाली छात्र था और गुरुग्राम में कामर्स की पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता सुरेश गुर्जर की इस घटना से दो साल पहले ही सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी और मुकेश सुरेश का इकलौता पुत्र था।

गुजरात के कच्छ में बीएसएफ का हवलदार था मृतक प्रदीप

बलबीर प्रधान का दूसरा भतीजा 30 वर्षीय प्रदीप बीएसएफ में हवलदार के पद पर गुजरात के कच्छ में डयूटी पर तैनात था और दो दिन पहले ही होली की छुट्टी लेकर 20 दिनों के लिए अपने घर आया था। प्रदीप बॉक्सिंग का अच्छा खिलाड़ी था।

17 साल तक हैफेड स्पिनिंग मिल का प्रधान रहा था कामरेड रामकुमार

कामरेड रामकुमार बलबीर प्रधान का करीबी था और हैफेड स्पिनिंग मिल में ट्रेड यूनियन का लगातार 17 साल तक प्रधान रहने के बाद कामरेड रामकुमार हांसी में मजदूर यूनियन से जुड़े आंदोलनों में बढ़-चढ़ कर भाग लेता था।

गोलीकांड के बाद से शेखपुरा की छवि हो गई थी खराब, रिश्ते होने हो गए थे बंद

चार साल पहले होली पर हुए गोलीकांड में तीन लोगाें की मौत के बाद लोगों के जहन में शेखपुरा गांव की छवि खराब होती चली गई और शेखपुरा में रहने वाले कई लोगों ने पलायन भी कर लिया था। इतना ही नहीं, शेखपुरा गांव में रहने वाले युवाआें के साथ लोग रिश्ते करने से भी गुरेज करने लगे थे तथा इस हत्याकांड के बाद गांव में दो युवाओं की तय की गई शादी भी टूट गई थी। हालांकि इस कांड के चार साल बीत जाने के बाद अब लोगों का इस गांव में फिर से सामाजिक दायरा जुड़ने लगा है और युवाओं के रिश्ते होने शुरू हो गए हैं।

 

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