सिरसा में औषधीय पौधों को बढ़ावा देगा वन विभाग, छह प्रजाति के एक लाख पौधे लगाने की तैयारी

वन विभाग सिरसा की भूमि व जलवायु के हिसाब से ही औषधीय पौधों का चयन कर रहा है। यहां आंवला हरड़ बहेड़ा रीठा आसानी से तैयार हो सकता है। औषधीय पौधों का प्लान कोरोना के बाद लोगों में आई जागरूकता को देखते हुए तैयार किया गया है।

Rajesh KumarMon, 13 Sep 2021 09:00 AM (IST)
सिरसा में आगामी वर्ष से छह प्रजाति के एक लाख पौधे तैयार करेगा विभाग।

जागरण संवाददाता, सिरसा। वन विभाग आगामी वर्ष में औषधीय पौधों की पौध बड़े स्तर पर तैयार करेगा। विभाग छह प्रकार के औषधीय पौधों की एक लाख पौध तैयार कर किसानों व आमजन को उपलब्ध करवाएगा। इसके अलावा सरकारी जमीन पर भी औषधीय पौधे लगवाए जाएंगे। वन विभाग की नर्सरी में इन पौधों को तैयार किया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही रिपोर्ट स्वीकृति के लिए मुख्यालय को भेजी जाएगी और इसके बाद काम शुरू होगा।

आंवला, हरड़, रीठा व अन्य पौधे होंगे तैयार

वन विभाग सिरसा की भूमि व जलवायु के हिसाब से ही औषधीय पौधों का चयन कर रहा है। यहां आंवला आसानी से तैयार हो सकता है। इसी तरह हरड़, बहेड़ा, रीठा भी तैयार हो सकता है। औषधीय पौधों का प्लान कोरोना के बाद आम आदमी में आई जागरूकता को देखते हुए तैयार किया गया है ताकि लोग इन्हें आसानी से अपना लें इससे हरियाली के साथ औषधी भी मिले। इनके अलावा आम और जामुन के पेड़ भी बढ़ाए जाएंगे। दोनों प्रजातियां नाममात्र ही विभाग की ओर से लगाई जाती हैं लेकिन अब इन्हें प्रमुख सूची में रखा गया है।

कब्जा छुड़ाई जमीन पर लगेंगी जंडी, फसल को नहीं होगा नुकसान

वन विभाग के पास 150 हेक्टेयर भूमि निशानदेही के बाद मिली है। इस भूमि पर साथ लगते किसानों ने कब्जा कर रखा था जिसे विभाग ने छुड़वा लिया है और अब यहां पौधारोपण किया जा रहा है। किसानों की मांग रही है कि यहां दूसरे पौधे लगाए जाएंगे तो कुछ साल बाद फसल को नुकसान पहुंचाएंगे। इसलिए इस जगह पर जंडी लगवाई जाए।जिसके बाद विभाग ने उनकी मांग को मान लिया। अब किसानों की मेढ़ के साथ लगती भूमि पर जंडी लगाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य पौधे लगाने से है चाहे उसमें जंडी लगे या दूसरे पौधे।

किसानों ने की जंडी लगाए जाने की मांग

सिरसा के जिला वन अधिकारी रामकुमार जांगड़ा ने बताया कि औषधीय पौधे लगाए जाने का फैसला लिया है। छह प्रकार के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। कब्जा छुड़वाई गई 150 हेक्टेयर भूमि पर मुख्यत: जंडी लगाई जा रही है। किसानों ने भी जंडी लगाए जाने की मांग की थी।

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