कोरोना टेस्ट और वैक्सीनेशन पर किसानों का अजीब तर्क, बोल रहे ऐसे ही खत्म हो जाएगी महामारी

कोरोना संक्रमित हो चुके किसान नेता भी कोरोना जांच को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं

बाॅर्डर पर जमे हजारों की संख्या में आंदोलनकारी कोरोना से बचाव के नियमों का पालन तो दूर टेस्ट और वैक्सीनेशन तक से भी दूरी बनाए हुए हैं। अनिल विज भी इस पर चिंता जता चुके हैं। मगर लाख काेशिशों के बावजूद आंदोलनकारी वैक्सीन तक लगवाने के लिए तैयार नहीं हुए।

Manoj KumarSun, 11 Apr 2021 08:35 AM (IST)

बहादुरगढ़, जेएनएन। कभी कोरोना को साजिश और कभी ऐसा काेई संक्रमण न होने की बात कहते आ रहे आंदोलनकारी अब फिर से इस महामारी के फैलने पर भी अजीब तर्क दे रहे हैं। यहां तक की आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान संगठनों ने वे नेता तक आश्चर्यजनक बात कहे हैं जो खुद पिछले दिनाें कोरोना पाॅजिटिव हो चुके हैं। ऐसे मेें दिक्कत यह है कि एक तरफ सरकार के निर्देशानुसार पहली से आठवीं तक स्कूल बंद हो गए हैं और दूसरी तरफ बाॅर्डर पर जमे हजारों की संख्या में आंदोलनकारी कोरोना से बचाव के नियमों का पालन तो दूर टेस्ट और वैक्सीनेशन तक से भी दूरी बनाए हुए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी इस पर चिंता जता चुके हैं।

मगर विभाग की लाख काेशिशों के बावजूद आंदोलनकारी वैक्सीन तक लगवाने के लिए तैयार नहीं हुए। पंजाब के आंदोलनकारी तो इस मामले में पूरी तरह अड़ियल रुख अपनाए हुए हैं। पंजाब की भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहा) के प्रमुख जोगेंद्र सिंह उगराहा ने एक इंटरव्यू में यहां तक कहा कि कोरोना तो किसी तरह से गंभीर नहीं है, अगर है भी तो अपने आप खत्म हो जाएगा ।

पिछले दिनों काेरोना संक्रमित होने के बाद पंजाब में कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे जोगेंद्र उगराहा अब फिर आंदोलन में तो सक्रिय हैं, मगर उन्होंने यह कहकर लोगों को हैरान किया है कि उनको जो तकलीफ थी यदि उसे ही कोरोना कहते हैं तो ऐसा उन्हें कई बार हो चुका है। उनकी इन बातों से साफ है कि कोरोना के केस भले ही कितने भी बढ़ रहे हों, मगर आंदोलनकारी अभी टेस्ट और वैक्सीनेशन के लिए तैयार नहीं हैं।

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