Ellenabad by polls: मतदाता साइलेंट, नहीं खोल रहे पत्ते, दो नवंबर को ही होगा प्रत्‍याशियों के भाग्य का फैसला

ऐलनाबाद उपचुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा अभी कहा नहीं जा सकता। इस बार हलके का मतदाता शांत है। किसी के पक्ष में भी खुलकर नहीं आ रहा है। गांवों में जिस भी पार्टी की सभी होती है लोगों की भीड़ उमड़ रही है। कयास लगाना मुश्किल है।

Manoj KumarSun, 24 Oct 2021 08:33 AM (IST)
ऐलनाबाद उपचुनाव में एक सप्ताह शेष, दिग्गज जुटे चुनाव प्रचार अभियान में

जागरण संवाददाता, सिरसा : ऐलनाबाद उपचुनाव को लेकर अब एक सप्ताह से भी कम समय शेष रह गया है। ग्रामीण आंचल में जहां लोग फसल कटाई में लगे हुए है और शहरी क्षेत्र में लोग दीपावली त्योहार की तैयारियों में जुटे हुए हैं वहीं गांवों में चुनावी माहौल भी पूरे उफान पर है। नेताओं का जनसंपर्क अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। मतदाताओं को रिझाने के लिए परिचितों व रिश्तेदारों का दवाब बनाया जा रहा है। उपचुनाव में जीत को लेकर सभी राजनैतिक दलों ने ताकत झोंक रखी है।

बात अगर सत्ताधारी भाजपा जजपा प्रत्याशी गोबिंद कांडा की करें तो उनके समर्थन में भाजपा के दिग्गज लगातार क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। ओमप्रकाश धनखड़, सुभाष बराला, सांसद सुनीता दुग्गल के अलावा बिजलीमंत्री रणजीत सिंह, विधायक गोपाल कांडा लगातार जनसंपर्क मुहिम में जुटे हुए हैं। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी सिरसा आ रहे हैं। जजपा नेता अजय सिंह व दिग्विजय सिंह चौटाला भी लगातार गांवों के दौरे पर है।

कांग्रेस प्रत्याशी पवन बैनीवाल के समर्थन में भी कांग्रेस दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कु. सैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई सहित अनेक कद्दावर नेता ऐलनाबाद हलके में जमे हुए हैं। उधर इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला के प्रचार अभियान में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला, अभय सिंह, कर्ण चौटाला के अलावा पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता लगे हुए हैं।

--ऐलनाबाद उपचुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, अभी कहा नहीं जा सकता। इस बार हलके का मतदाता शांत है। किसी के पक्ष में भी खुलकर नहीं आ रहा है। गांवों में जिस भी पार्टी की सभी होती है लोगों की भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में किसकी जीत होगी और किसकी हार यह कयास लगाना मुश्किल है। सभी दल अपने अपने प्रत्याशी की जीत के दावे कर रहे हैं और समीकरण बैठाने में लगे हुए हैं। कोई भी राजनैतिक दल अपने प्रत्याशी को कमतर मानने को तैयार नहीं है। इस चुनाव में भीतरघात भी खूब होगी। अब दो नवंबर को मतगणना वाले दिन ही पता लग पाएगा कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेंगा।

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