हिसार निरीक्षण गृह में बाल अपराधियों की काउंसिलिंग शुरू, नशा छुड़ाने पर जोर

हिसार में बाल अपराधियों की काउंसिलिंग की जा रही है। नशामुक्ति पर जोर दिया जा रहा है। ज्यादातर अपराध नशे की लत के कारण होते हैं। इसलिए यह कदम उठाया गयाहै। सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक इसमें योगदान दे रहे हैं।

Umesh KdhyaniSat, 19 Jun 2021 04:25 PM (IST)
काउंसिलिंग के जरिये कम उम्र में अपराध करने वाले नाबालिग बच्चों में नशे की प्रवृत्ति छूटेगी।

हिसार, जेएनएन। बच्चों में बढ़ रही अपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए हिसार के बरवाला रोड स्थित निरीक्षण गृह में बाल अपराधियों की काउंसलिंग शुरू कर दी गई है। इसमें नशे की आदत छुड़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।  सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ साथ निरीक्षण गृह में अभिरक्षा में लिए गए बाल अपराधियों को भी नशे जैसी बुरी लत से छुड़वाने के लिए वहां जाकर काउंसलिंग दे रहे हैं।

सिविल अस्पताल से क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. शालू डांडा ने बताया काउंसिलिंग के जरिये कम उम्र में अपराध करने वाले नाबालिग बच्चों में नशे की प्रवृत्ति छूटेगी। इससे आने वाले समय में वे आपराधिक गतिविधियों से दूर होंगे। काउंसिलिंग से अपराध करने वाले बच्चों की समझ पर असर पड़ेगा। इससे उनका दृष्टिकोण सकारात्मक बनेगा और वे रचनात्मक कार्यों के प्रति ध्यान देंगे। इससे वे आपराधिक गतिविधियों से दूर होंगे। सिविल अस्पताल में कार्यरत मनोचिकित्सकों की ओर से इन दिनों निरीक्षण गृह में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत बाल अपराधियों की काउंसिलिंग की जा रही है। इसमें नशा छुड़ाने के लिए क्या करना होगा, इस बारे में भी बताया जा रहा है।

निरीक्षण गृह में 40 से अधिक संगीन अपराधी

गौरतलब है कि हिसार के निरीक्षण गृह में करीब 40 से अधिक नाबालिग है जो संगीन अपराधों में शामिल रहे  हैं। देखने में आता है कि अधिकतर आपराधिक गतिविधियां नशे की लत के कारण की गई है। डॉ. शालू बताती हैं कि अगर युवा बच्चे शुरुआत से ही सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर रखें और अच्छी संगत में रहे। साथ ही कुछ रचनात्मक करते रहे तो वह नशे की आदत से बच सकते हैं और समाज के निर्माण में सहयोग दे सकते हैं।

नशे की आदत पड़ने पर देते हैं अपराध को अंजाम

नशे की आदत पड़ने पर बच्चे नशे की पूर्ति के लिए चोरी, डकैती, हत्या, लूट जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इनमें से 80 फीसद घटनाएं नशे की आदत के चलते होती हैं। इसलिए अगर परिवार और समाज भी ऐसे बच्चों को देखें, तो तुरंत उनका उपचार करवाएं। ताकि, नशे की लत के चलते बच्चे आपराधिक घटनाओं को अंजाम न दें।

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