कोरोना होता जा रहा विकराल, सिरसा में नहीं प्लाज़मा बैंक, 150 किलोमीटर दूर रोहतक जाना पड़ेगा

स्वास्थ्य विभाग कोरोना से जंग जीत चुके लोगों को प्लाज़मा डोनेशन के लिए जागरुक नहीं कर पा रहा है।

सिरसा में कोरोना बढ़ता जा रहा है। प्लाजमा बैंक की सख्त जरूरत है। सीमावर्ती इलाकों के कोरोना पीडि़त पंजाब के निजी अस्पतालों में उपचार करवाते हैं। यहां के लोगों को रोहतक जाना पड़ता है। कोरोना से जंग जीत चुके लोग बठिंडा में प्लाजमा डोनेट करने जाते हैं।

Umesh KdhyaniFri, 23 Apr 2021 05:41 PM (IST)

सिरसा/डबवाली, जेएनएन। सिरसा जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। गंभीर मरीजों को प्लाज़मा थैरेपी से बचाया जा सकता है। लेकिन जिला मुख्यालय में प्लाज़मा बैंक नहीं है। अगर किसी को प्लाज़मा की जरुरत है तो उसके स्वजनों को करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर रोहतक पीजीआइ में जाना पड़ेगा। हालांकि पंजाब में यह सुविधा बठिंडा में उपलब्ध है।

जिला मुख्यालय से करीब 95 किलोमीटर दूरी पर बठिंडा स्थ्तिा है। इधर प्लाजमा बैंक ने होने के कारण स्वास्थ्य विभाग कोरोना से जंग जीत चुके लोगों को प्लाज़मा डोनेशन के लिए जागरुक नहीं कर पा रहा है। इधर सामाजिक संस्थाएं अपने स्तर पर ऐसे लोगों को खोजकर डोनेशन के लिए प्रेरित कर रही हैं। सितंबर 2020 में डबवाली निवासी स्टील कारोबारी संजीव गर्ग, फोटोग्राफर संजय मिढ़ा तथा गांव अहमदपुर दारेवाला निवासी चरणजीत सिंह हैप्पी ने बठिंडा के गुरु नानक देव चेरिटेबल ब्लड बैंक में प्लाजमा डोनेट किया था। जबकि अक्तूबर 2020 में डबवाली निवासी मुनीष गर्ग रुबी प्लाजमा डोनेट करने बठिंडा पहुचे थे। अप्रैल 2021 में वे प्लाजमा डोनेट करने से नहीं चूके।

इनके लिए डोनेट किया था प्लाजमा

सिरसा जिला के अधिकतर मरीज इलाज के लिए पंजाब के निकटवर्ती अस्पतालों में जा रहे हैं। पिछले वर्ष बठिंडा के दिल्ली हार्ट, इंदरानी स्पताल, निर्वाण अस्पताल में अबोहर, टोहाना तथा बरनाला के तीन कोरोना पॉजिटिव जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन लोगों को उपरोक्त ने प्लाजमा डोनेट किया था। तीनों डोनरों को डबवाली की सामाजिक संस्था अपने ने जागरुक किया था।

क्या कहते हैं प्लाजमा डोनर

कोई परेशानी नहीं हुई

संजय मिढ़ा कहते हैं कि प्लाजमा डोनेट करने के बाद किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई थी। मैं खुद को भाग्यशाली समझता हूं कि मेरा प्लाजमा किसी कोविड पीडि़त की जिंदगी बचाने के काम आया।

चिकित्सक की सलाह मानी

चरणजीत सिंह हैप्पी बताते हैं कि प्लाजमा डोनेशन के दौरान किसी तरह की घबराहट या कमजोरी महसूस नहीं हुई। चिकित्सक ने सलाह दी कि अधिक मात्रा में तरल पदार्थ ग्रहण करने से चौबीस घंटों में प्लाजमा पूरा हो जाता है। मैंने चिकित्सक की सलाह मानी, सबकुछ अच्छा गया।

मेरे लिए नया अनुभव

संजीव गर्ग बताते हैं कि मैं नियमित तौर पर ब्लड डोनेट करता रहता हूं। कोरोना से जंग जीतने के बाद पहली बार प्लाजमा डोनेट करना मेरे लिए नया अनुभव रहा। कोरोना को हराकर मैं बहुत खुश था। प्लाज़मा डोनेशन ने खुशी दोगुनी कर दी।

दो बार डोनेट किया प्लाज्मा

मुनीष गर्ग रुबी ने बताया कि पिछले वर्ष कोरोना से पॉजिटिव हुआ था। साकारात्मक सोच से उसे हराया। अक्तूबर 2020 में प्लाजमा डोनर बनने का मौका मिला तो इसे जाने नहीं दिया। बठिंडा में किसी जरुरतमंद के काम आया, तो अच्छा महसूस हुआ। कुछ दिन पहले फिर कॉल आई। डोनेशन से पहले पूरी तरह से जांच हुई। चिकित्सक ने बताया कि प्लाजमा कोविड मरीज को लग सकता है तो मैंने पुन: डोनेट किया।

मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों में ही सुविधा

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार बताते हैं कि रोहतक या फरीदाबाद जैसे मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों में प्लाज़मा बैंक की सुविधा है। हमारे यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन कोरोना को हरा चुके लोगों को जागरुक जरुर किया जा सकता है। ताकि आवश्यकता होने पर वे किसी मरीज को प्लाजमा डोनेट कर सकें। इस सुझाव पर हम अमल करेंगे। कोरोना संक्रमितों से व्यक्तिगत संपर्क साधकर उन्हें प्लाजमा डोनेशन के लिए मॉटीवेट किया जाएगा।

30 दिन में कर सकते है प्लाज्मा डोनेट

सीएमओ के अनुसार कोरोना संक्रमित व्यक्ति ठीक होने के 30 दिन बाद अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। प्लाज्मा थैरेपी के द्वारा संक्रमण के बाद ठीक हो चुके व्यक्ति से प्लाज्मा लेकर उसे संक्रमित मरीज को चढ़ाया जाता है। इस थैरेपी में मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढऩे लगती है साथ ही शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के फेल होने का खतरा नही रहता। कोरोना संक्रमण में यह थैरेपी कारगर साबित हो रही है, और इसे अपनाकर मृत्युदर को घटाया जा सकता है।

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