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ग्राउंड रिपोर्ट - सिसाय में कोहराम, एक महीने में 50 से अधिक मौतें होने से गांव की चौपालों व गली-मोहल्लों में छाया सन्नाटा, लोग घरों में दुबके

ग्राउंड रिपोर्ट - सिसाय में कोहराम, एक महीने में 50 से अधिक मौतें होने से गांव की चौपालों व गली-मोहल्लों में छाया सन्नाटा, लोग घरों में दुबके

संवाद सहयोगी हांसी सिसाय गांव अपने ठेठ ग्रामीण मिजाज को लेकर प्रदेशभर में अलग ही पहचान

JagranWed, 12 May 2021 07:53 AM (IST)

संवाद सहयोगी, हांसी : सिसाय गांव अपने ठेठ ग्रामीण मिजाज को लेकर प्रदेशभर में अलग ही पहचान रखता है, लेकिन कोरोना ने ऐसा कोहराम मचाया है कि गांव का माहौल ही बदल चुका है। गांव की जिन चौपालों पर बुजुर्ग हुक्का गुड़गुड़ाते थे और ताश के खेलते हुए नजर आते थे, जिन गली-मोहल्लों में युवाओं की मंडली हंसी मजाक करते हुए घूमती थी वहां अब खौफ का मंजर पसरा है। सिसाय की गलियों में पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ हैं और वायरस के प्रकोप से बचने के लिए ग्रामीण अपने घरों में दुबके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे गांव में बुखार ने कोहराम मचा रखा है। कोरोना जैसे लक्षणों से बीमार लोग हर रोज जान गंवा रहे हैं।

सिसाय की स्थिति गंभीर होने पर मंगलवार को प्रशासनिक अमला नगर पालिका पहुंचा। माहौल में ऐसा सन्नाटा पसरा था कि केवल पुलिस सायरन की आवाजें सुनाई दे रही थी। गांव के मौजिज व्यक्ति चबूतरे पर एकत्रित थे, जहां एसपी व एसडीएम पहुंचे और गांव के हालात पर चर्चा की। ग्रामीण बोले कि गांव में 1 माह के अंदर 50 से 55 मौतें हो चुकी हैं और ज्यादातर बुखार से पीड़ित थे। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के अस्पताल में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और को रोना जैसे लक्षणों से बीमार लोगों को इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। एसपी ने ग्रामीणों से ठीकरी पहरा लगाने की बात कही तो ग्रामीण बोले की अब तो वायरस गांव में ही घुस चुका है तो ठीकरी पहरा किस काम का। प्रशासन को चाहिए की गांव में सैंपलिग बढ़ाई जाए व कोरोना वायरस से ग्रस्त लोगों की पहचान करके इलाज करवाया जाए। करीब आधे घंटे के मंथन के बाद अधिकारी वापस लौट आए और ग्रामीण अपने घरों की तरफ चले गए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ऐसा सुनापन तो कभी नहीं था। वायरस ने पूरे गांव के माहौल में डर भर दिया है और प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे।

गांव में खौफ, सख्त कदम उठाने की जरूर

बुखार ने गांव में कोहराम मचा रखा है। हर रोज लोग जान गंवा रहे हैं। 30 दिनों के अंदर 50 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना गांव के अंदर घुस चुका है और प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। ग्रामीण के अस्पताल में ही डॉक्टरों के पद खाली हैं एक डॉक्टर के भरोसे अस्पताल चल रहा है। ऐसे में स्थिति का अंदाजा लगाया जा रहा है। गांव में लगातार बढ़ रहे बुखार के मामलों से ग्रामीण में खौफ बढ़ता जा रहा है।

- अजीत, पूर्व सरपंच

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बास गांव नारनौंद के प्रमुख गांवों में शुमार हैं। इस गांव में भी कोरोना ने कोहराम मचा रखा है और बीते 1 महीने के अंदर करीब 20 लोग जान गंवा चुके हैं। गांव की गलियों में इक्का-दुक्का लोग ही घूमते हुए नजर आए। ग्रामीणों ने बताया कि लोग सुबह ही जरूरी सामान खरीदकर घरों में दुबक जाते हैं। ग्रामीणों में भय बढ़ता जा रहा है। इंद्र सिंह प्रधान ने बताया कि गांव में सैंपलिग तेज कर दी गई है और पिछले दो दिनों से गांव में बीमार लोगों की संख्या कम हुई है।

प्रशासन अलर्ट है

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कोरोना लक्षणों की पहचान करने में देरी हो रही है। गांवों में सैंपलिग बढ़ा दी गई है। सिसाय में लोगों से अपील की है कि लक्षण दिखते ही टेस्ट करवाएं। इसके अलावा सेहत को स्वस्थ रखने के लिए इम्युनिटी बूस्ट करने वाली चीजों के बारे में ग्रामीणों को जागरुक किया जा रहा है। प्रशासन की ग्रामीण क्षेत्रों पर गंभीरता से नजर रखे हुए है।

- डा. जितेंद्र सिंह

प्रशासन ने ये कदम उठाए

-गांव में कोरोना सैंपलिग दो के बजाए अब शाम चार बजे तक होगी

-गांव के इंट्री प्वाइटों पर ठीकरी पहरा लगेगा

-लॉकडाउन के लिए पुलिस वैन गांव में 24 घंटे तैनात रहेगी

-गांव में डोर-टू-डोर सर्वे होगा व बीमार ग्रामीणों की पहचान होगी।

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