एनसीआर की तुलना में हरियाणा के शहरों में बह रही निर्मल हवा, अप्रैल में कम हुआ प्रदूषण

हरियाणा के शहरों में प्रदूषण कम हो रहा है

हरियाणा की राजस्थान और दिल्ली से तुलना की जाए तो काफी कम प्रदूषण मौजूदा समय में है। हरियाणा का एक भी शहर ऐसा नहीं है जो प्रदूषण के लाल पैमाने पर आगे बढ़ रहा है। मौजूदा समय में स्वच्छ हवा है।

Manoj KumarTue, 13 Apr 2021 08:52 AM (IST)

हिसार, जेएनएन। हरियाणा प्रदेश के विभिन्न शहरों का अप्रैल में अक्सर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) अधिक ही मिलता है। मगर इस बार वातावरण कुछ ऐसा बना कि प्रदेश में नौ शहरों में निर्मल स्वच्छ हवा बह रही है। हिसार जैसे जिले में सायं होते-होते एक्यूआई 200 के पार चला जाता था जो अब दोपहर चार बजे तक 135 से 150 माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर तक ही है।

जो प्रदूषण की सामान्य स्थिति को दर्शाता है। सिर्फ हिसार ही नहीं बल्कि दूसरे शहरों में भी अधिक प्रदूषण नही है। अगर हरियाणा की राजस्थान और दिल्ली से तुलना की जाए तो काफी कम प्रदूषण मौजूदा समय में है। हरियाणा का एक भी शहर ऐसा नहीं है जो प्रदूषण के लाल पैमाने पर आगे बढ़ रहा है। मौजूदा समय में स्वच्छ हवा दर्शाती है कि पीएम 2.5 व 10 की मात्रा भी हवा में अभी कम है।

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यह हैं प्रदूषण कम होने के कारण

पंजाब के बठिंडा स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पर्यावरण विभाग के डीन डा. वीके गर्ग प्रदूषण कम होने के कई कारण बताते हैं। पहला कारण तापमान है, मौजूदा समय में तापमान कभी बढ़ रहा है तो कभी घट रहा है। इसी कारण से प्रदूषण के कणों को अधिक ऊपर उठने को नहीं मिल रहा। दूसरा कारण पश्चिमी विक्षोभ की बारिश है जो बीच-बीच में आकर प्रदूषण के कणों को वातावरण में नहीं फैलने दे रही। इसके साथ ही लॉकडाउन का असर अभी भी देखने को मिल रहा है।हालांकि वह कहते हैं कि फसलों की कटाई अभी शुरू हुई है अगर फसल अवशेष न जले तो काफी हद तक प्रदूषण ठीक रहेगा।

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हरियाणा के शहरों में सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स

इन शहरों में प्रदूषण अधिक

जिला- 2021 एक्यूआई- 2019 एक्यूआई

फतेहाबाद- 198- 211

जींद- 190- 210

पानीपत- 221- 258

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इन शहरों में स्वच्छ हवा

जिला- 2021 एक्यूआई- 2019 एक्यूआई

करनाल- 92- 212

पंचकूला- 98- 63

सिरसा- 99- 159

कुरुक्षेत्र- 135- 182

पलवल- 135- 294

हिसार- 150- 162

कैथल- 152- 159

यमुनानगर- 164- 166

रोहतक- 172- 115

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एनसीआर के शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब

जिला- 2021 एक्यूआई- 2019 एक्यूआई

फरीदाबाद- 219- 111

गुरुग्राम- 210- 251

मानेसर- 286- 212

सोनीपत- 230- 142

नोट- एक्यूआई माइक्रो ग्राम प्रतिघन मीटर में है।

क्या है होता है कण प्रदूषण

पीएम को पर्टिकुलेट मैटर या कण प्रदूषण भी कहा जाता है, जो कि वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है। हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते। कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाना पड़ता है। कण प्रदूषण में पीएम 2.5 और पीएम 10 शामिल हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं। पीएम 2.5, 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। हवा में पीएम 10 का स्तर 100 से कम ही रहना चाहिए। पीएम 10 और 2.5 धूल, निर्माण की जगह पर धूल, कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है। जब इन कणों का स्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन आदि होने लगती हैं। पीएम 2.5 और पीएम 10 के कण सांस लेते समय आपके फेफड़ों में चले जाते हैं जिससे खांसी और अस्थमा के दौरे पढ़ सकते हैं। उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है, इसके परिणामस्वरूप समय से पहले मृत्यु भी हो सकती है।

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) का मानक

0-50- अच्छा

51-100- संतोषजनक

101-200- सामान्य

201- 300- खराब ,

301- 400- बहुत खराब

401- 500- गंभीर

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