शर्मनाक : हिसार में बेड नहीं मिलने पर हो गई थी बच्चे की मौत, चार दिन बाद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने बताया डेंगू पाजिटिव था

13 साल के मासूम ने तड़प-तड़प कर 23 अक्टूबर को दम तोड़ दिया। मरने के चार दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने बच्चे की सुध ली। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने पिता को फोन कर कहा-आपका बेटा कहां हैं उसकी रिपोर्ट डेंगू पाजिटिव है।

Manoj KumarThu, 28 Oct 2021 12:00 PM (IST)
जीजेयू में चीफ सेनेटरी इंस्‍पेक्टर अपने बेटे को लेकर भटकते रहे पर नहीं मिला था बेड

जागरण संवाददाता, हिसार: डेंगू पाजिटिव 13 साल के मासूम ने तड़प-तड़प कर 23 अक्टूबर को दम तोड़ दिया। मरने के चार दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने बच्चे की सुध ली। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने पिता को फोन कर कहा-आपका बेटा कहां हैं उसकी रिपोर्ट डेंगू पाजिटिव है। यह सुनकर पिता की आंखों में आसूं आ गए और उन्होंने कहा मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर कितना गंभीर है। इतना ही अपनी इकलौती संतान को बचाने के लिए मां-बाप भटकते रहे मगर किसी अस्पताल में उन्हें बेड नहीं मिला।

वहीं दूसरी और महाबीर कालोनी निवासी एक 42 वर्षीय महिला ने रुपये की कमी के चलते इलाज न मिल पाने से दम तोड़ दिया। महिला निजी लैब की रिपोर्ट में डेंगू पाजिटिव मिली थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दोनों मौत के मामलों की पुष्टि डेथ आडिट के बाद ही करेगा। जिले के बुधवार के सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक एक ही मौत हुई है। जबकि आशंकित डेंगू समेत कुल मौत के करीब सात मामले आ चुके है। बुधवार को भी डेंगू के 21 मामले मिले। जिससे जिले में डेंगू के 271 मामले मिल चुके है।

भुवन के मरने के चार दिन बाद फोन आया आपके बच्चे की डेंगू रिपोर्ट पाजिटिव है

जीजेयू में चीफ सेनेट्री इंस्पेक्टर सतीश ने बताया कि उसके बेटे भुवन को 22 अक्टूबर को सिविल अस्पताल लेकर गए थे। वहां टेस्ट करने पर उसकी प्लेटलेट्स 1.26 लाख तक थी। दाखिल करने के लिए बोला तो दवा देकर घर भेज दिया गया था। 23 को दोबारा सिविल लेकर गए। वहां डाक्टर ने टेस्ट करवाया तो प्लेटलेट्स 14000 थी। उस दिन डाक्टर बोले यहां बेड नहीं है। प्राइवेट में ले जाने के लिए बोला गया। इसके बाद शहर के एक निजी अस्पताल में लेकर गए। वहां से एक अन्य निजी में और उसके बाद एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया। वहां बच्चे को दवा दी गई। वहां गार्ड ने मुझे बाहर

भेज दिया। इसके बाद एंबुलेस बुलाकर आक्सीजन लाकर दूसरे निजी अस्पताल में भेजा गया। लेकिन वहां बेड और आक्सीजन नहीं मिला। इसके एक निजी बच्चों के अस्पताल में लेकर गए। वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। हम भुवन को दोपहर तीन बजे अस्पताल के लिए लेकर निकले थे। रात करीब 10.15 बजे भुवन ने दम तोड़ दिया था। यहीं नहीं 27 अक्टूबर बुधवार को सिविल अस्पताल से दोपहर में फोन आया कि आपका बच्चा डेंगू पाजिटिव है आप कहां पर हो, तब उन्हें बताया कि हमारा बच्चा तो मर चुका है। स्वजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल के डाक्टरों ने सही उपचार नहीं किया।

इधर पैसे की कमी से नहीं करवा सके इलाज, डेंगू पीड़िता ने तोड़ा दम

महाबीर कालाेनी निवासी निजी लैब की रिपोर्ट में डेंगू पाजिटिव करीब 42 साल की महिला का शहर के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। महिला को एक सिंगल डोनर प्लेटलेट लग चुकी थी। लेकिन कोई आराम नहीं हुआ। दूसरी परचेज कर ली गई थी, लेकिन लगवा नहीं पाए। तीन दिन में करीब 66 हजार रुपये इलाज में खर्च हो चुका था। महिला के बेटे ब्रजेंद्र ने बताया कि डाक्टरों ने भी जवाब दे दिया। अस्पताल से छुट्टी दिलाकर अपनी मर्जी से घर ले गए है। जिसके बाद मंगलवार रात करीब दो बजे महिला ने दम तोड़ दिया। महिला के मल्टीआर्गन फेल हो गए थे। महिला को डेंगू, कार्डिक अरेस्ट, गुर्दे खराब हो चुके थे।

गर्भवती महिला और अन्य की मौत की हिस्ट्री जानी

स्वास्थ्य विभाग की टीम से नूर मोहम्मद व अन्य ने बुधवार को सेक्टर 16-17 में गर्भवती महिला की मौत के मामले, 13 साल के बच्चे और महाबीर कालोनी में मौत के मामलों के बारे में हिस्ट्री जानी।

यहां मिले नए मामले

डा. सुभाष खतरेजा ने बताया कि अमरदीप कालोनी में 30 वर्षीय युवती और 48 वर्षीय अधेड़, सेक्टर 16 में 44 वर्षीय अधेड़, अर्बन एस्टेट में 58 वर्षीय व्यक्ति, एमसी कालोनी में 12 वर्षीय बच्चा, कैनाल गेस्ट हाउस में 66 वर्षीय व्‍यक्ति, ऋषि नगर में 34 वर्षीय युवक, न्यू ऋषि नगर में 38 वर्षीय युवती, सलेमगढ़ में 23 वर्षीय युवक, हरि नगर में पांच साल का बच्चा और 15 वर्षीय किशोरी, हाउसिंग बोर्ड कालोनी में 15 वर्षीय किशोर समेत अन्य क्षेत्रों में डेंगू संक्रमित मिले।

हिसार के मुख्य अस्पतालों में बेड की स्थिति -

सिविल अस्पताल में बुधवार को 200 बेड पर 253 मरीज -

सर्वोदय अस्पताल - 100 बैड है सभी फुल है।

सीएमसी में - 110 बेड पर इतने ही मरीज दाखिल

जिंदल अस्पताल में भी सभी बेड फुल है।

आधार अस्पताल में 200 बेड है करीब सभी बेड फुल है।

सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए मारामारी

सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए मरीजों के स्वजन लगातार ब्लड बैंकों केचक्कर लगा रहे है। लेकिन कहीं किट की कमी है तो कहीं डोनर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। हर जगह स्थिति गंभीर हो गई है।

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