कबाड़ से पंजाब के दो भाइयों ने बनाया 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाला ट्रैक्टर

पंजाब के दो भाइयों ने कबाड़ से ट्रैक्‍टर बनाया है और इसका नाम धाकड़ रखा है

ऑटो के 10 हॉर्स पॉवर इंजन से धाकड़ यानि ट्रैक्‍टर तैयार किया गया है। कबाड़ में खरीदे कार के टायरों से खूब दौड़ रहा है। डिस्क ब्रेक लगे हैं। ऊंचाई करीब तीन फीट होगी। लंबाई सात तो चौड़ाई चार फीट के करीब। जैसा की नाम है काम भी वैसे हैं।

Manoj KumarMon, 19 Apr 2021 04:25 PM (IST)

डबवाली [डीडी गोयल] कबाड़ के कई तरह के प्रयोग आपने देखे होंगे, मगर सोचिए क्‍या कबाड़ से बेहतरीन मशीन तैयार की जा सकती है। मगर ऐसा हुआ है। ऑटो के 10 हॉर्स पॉवर इंजन से धाकड़ यानि ट्रैक्‍टर तैयार किया गया है। कबाड़ में खरीदे कार के टायरों से खूब दौड़ रहा है। डिस्क ब्रेक लगे हैं। ऊंचाई करीब तीन फीट होगी। लंबाई सात तो चौड़ाई चार फीट के करीब। जैसा की नाम से मजबूती का पता चलता है, काम भी वैसे हैं। धाकड़ की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा है। एवरेज है 30 से 35 किलोमीटर प्रति लीटर। करीब 20 क्विंटल भार खींचने की क्षमता है। जैसे ही धाकड़ सिरसा जिला की डबवाली मंडी में पहुंचा तो देखने वालों की भीड़ लग गई।

युवा तो युवा, बुजुर्गों ने धाकड़ की सवारी कर डाली। धाकड़ को बनाया है पड़ोसी सूबे पंजाब के जिला श्री मुक्तसर साहिब के गांव फत्ताकेरा निवासी दो भाइयों गुरविंद्र सिंह (19) तथा गुरमीत सिंह (17) ने। अब तक फोर्ड ट्रैक्टर चलाने वाले बुजुर्ग भी धाकड़ की सवारी करके कहते हैं, शानदार चीज बनाई है। वहीं युवा होम मेड ट्रैक्टर के साथ फोटो सेल्फी करते नजर आए।

पांच माह में बनाया ट्रैक्टर

धाकड़ पर फत्ताकेरा से गांव लोहगढ़ में अनाज लेकर पहुंचे गुरविंद्र सिंह ने बताया कि तीन साल से पहल स्कूटर इंजन से ट्रैक्टर बनाने का प्रयास कर रहा था। खर्चा बहुत अधिक आ रहा था। हालांकि उसने छोटे-छोटे ट्रैक्टर बनाकर कई प्रयोग किए। जुलाई 2020 में उसने अपने भाई के साथ मिलकर ऑटो इंजन से ट्रैक्टर बनाने की ठानी। महज पंद्रह हजार में उन्हें कबाड़ में पड़ा ऑटो का इंजन मिल गया। मीटर, कार के टायर, ट्रैक्टर के अगले टायर भी कबाड़ में आसानी से मिल गए। चद्दर काटकर खुद ही बॉडी तैयार की। घर पर ही उसे पेंट करके वेल्डिंग कर दी। करीब पांच माह में ट्रैक्टर तैयार हो गया।

पांच लाख का ट्रैक्टर 70 हजार में तैयार

गुरविंद्र सिंह के मुताबिक वह 12वीं में हुआ है। वह कॉमर्स में पढ़ाई करेगा। उसने जो ट्रैक्टर तैयार किया है, उस पर 70 हजार रुपये खर्च आए हैं। उसका बनाया गया ट्रैक्टर बड़े ट्रैक्टरों को टक्कर देता है। हालांकि तेल टंकी छोटी है। करीब साढ़े तीन लीटर तेल आ सकता है। डिस्क ब्रेक के अलावा एवरेज तथा स्पीड के लिहाज से धाकड़ बड़े ट्रैक्टर को पीछे छोड़ता है।

-- - हमारे पास 12 एकड़ जमीन है। हम खेती करते हैं। मैं मानता हूं जिन चीजों का प्रयोग हम करते हैं, उनके बारे में पूरी नॉलेज होनी चाहिए। मैंने शौक-शौक में ट्रैक्टर बनाया है। नाम रखा है धाकड़, हालांकि फोर्ड 3600 भी लिखा है। क्योंकि फोर्ड काफी मजबूत ट्रैक्टर माना जाता है।

- गुरविंद्र सिंह, ट्रैक्टर निर्माता

 

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