पहाड़ी माता मंदिर के दर्शन को विदेशों से भी आते हैं श्रद्धालु, लेकिन विकास से दूरी

माता के मंदिर की खास बात यह है कि माता के चरणों में सबसे अधिक धोक लगाने नवविवाहित जोड़े आते हैं। राजस्थान की सीमा से सटे लोहारू आसपास के क्षेत्र के गांवों में कुलदेवी के रूप में पहाड़ी माता की मान्यता है।

Naveen DalalWed, 24 Nov 2021 10:29 AM (IST)
नवरात्रों के समय अलग-अलग राज्यों से पैदल जत्थे के रूप में पहाड़ी माता पहुंचते हैं।

ढिगावा मंडी (भिवानी), जागरण संवाददाता। पहाड़ी माता देवी मंदिर और इसके प्रति गहरी आस्था ने गांव पहाड़ी को देशभर ही नहीं विदेशों में भी पहचान पाई है। गांव पहाड़ी की ऊंची पहाड़ी पर स्थित पहाड़ी माता का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यह गांव भिवानी से 55 किलोमीटर दूर लोहारू हलके में स्थित है। गांव की आबादी करीब 6700 हैं। गांव पहाड़ी के पहाड़ पर स्थित प्रसिद्ध पहाड़ी माता मंदिर है जो कि करीब 850 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पांडव भी अज्ञातवास के दौरान यहां से निकलते समय माता के दर्शनों के लिए ठहरे थे। पहाड़ी माता मंदिर की मान्यता इस कदर है कि नवरात्रों के दौरान देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। हजारों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष नवरात्रों के समय अलग-अलग राज्यों से पैदल जत्थे के रूप में पहाड़ी माता पहुंचते हैं वहीं श्रद्धालु कोलकाता, दिल्ली, आसाम, सिलीगुड़ी, गोवा, बैंगलुरू से छपारिया, काजड़िया, नकीपुरिया परिवारों के भक्तजन माता दर्शन को पहुंचते हैं।

850 साल पुराना पहाड़ी माता मंदिर, 45 धर्मशालाएं हैं यहां खाने-पीने से लेकर नहाने धोने तक सब फ्री

माता के मंदिर की खास बात यह है कि माता के चरणों में सबसे अधिक धोक लगाने नवविवाहित जोड़े आते हैं। बच्चों के प्रथम मुंडन के लिए भी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान की सीमा से सटे लोहारू आसपास के क्षेत्र के गांवों में कुलदेवी के रूप में पहाड़ी माता की मान्यता है। गांव पहाड़ी को अभी बहुत विकास की जरूरत है। ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी और पशुपालन है। गांव पहाड़ी के ग्रामीण आपसी भाईचारा और प्रेम भाव से जीवन यापन कर रहे हैं। देश विदेश से आ रहे श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए हैं मूलभूत सुविधाएं निशुल्क मुहैया करवाई जा रही है।

गांव पहाड़ी निवासी स्टेट अवार्डी मास्टर प्रेम सिंह ने बताया कि मंदिर परिसर में ही बाहर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सभी सुख-सुविधाओं से युक्त 47 धर्मशालाएं बनी हुई हैं। जहां पर चाय, पानी, नहाने, धोने, खाने, पीने के लिए सेठ लोगों ने व्यवस्था कर रखी हैं सभी सुविधाएं श्रद्धालुओं को निशुल्क मुहैया कराई जाती है।

मंदिर के पुजारी पंडित विशंभर ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर प्रतिवर्ष लाखों लोग देशभर से यहां माता के चरणों में शीश नवाने के लिए आते हैं। गांव में स्थित करीब 450 फीट ऊंची पहाड़ी पर माता की भव्य प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु माता के मन्दिर में मनोकामनाएं लेकर आते हैं, उनकी मनोकामनाएं माता के दर्शन से पूरी हो जाती हैं। जो श्रद्धालु एक बार पहाड़ी माता के दर्शनों के लिए आता है, वह सदैव के लिए माता का भक्त बन जाता है तथा माता उसकी रक्षा करती है। उन्होंने बताया कि एक उल्लेख के अनुसार दिल्ली के तोमर वंश के राजा पहाड़ी माता की पूजा व आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां आते थे। पांडव भी अपने अज्ञातवास के दौरान यहां से निकलते समय माता के दर्शनों के लिए ठहरे थे।

गांव में इन सुविधाओं की है दरकार

सरपंच संतु राम ने बताया कि पिछले 5 साल के दौरान 2 करोड़ रुपए के विकास कार्य हुए हैं। लेकिन अभी भी कई ऐसे विकास कार्य हैं जो बहुत जरूरी है जैसे गांव में चकबंदी करवाई जाए, लड़कियों के लिए स्कूल की व्यवस्था, पीने के पानी की व्यवस्था, पशु अस्पताल के लिए डॉक्टर की व्यवस्था, खेल स्टेडियम की व्यवस्था, गांव में एक बैंक की व्यवस्था, रोडवेज बसों की व्यवस्था, कालेज आदि की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अच्छा लगे।

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