किसान आंदोलन : बहादुरगढ़ पुलिस ने तलब किया बंगाल की दुष्‍कर्म पीड़िता के इलाज और मौत की वजह का रिकार्ड

पश्चिम बंगाल की युवती कई दिन अस्पताल में रही मगर दुष्कर्म से जुड़ी मेडिकल जांच नहीं हुई

टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन में आई पश्चिम बंगाल की युवती के साथ सामूहिक दुष्‍कर्म के आरोप को लेकर एफआइआर दर्ज हाेने के बाद पुलिस अब इस मामले में तेजी से जांच में जुट गई है। पुलिस ने पूरा रिकार्ड तलब किया है।

Manoj KumarMon, 10 May 2021 01:49 PM (IST)

बहादुरगढ़, जेएनएन। टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन में आई पश्चिम बंगाल की युवती के साथ सामूहिक दुष्‍कर्म के आरोप को लेकर एफआइआर दर्ज हाेने के बाद पुलिस अब इस मामले में तेजी से जांच में जुट गई है। बहादुरगढ़ के लाइनपार क्षेत्र के जिस अस्पताल में कई दिन तक युवती दाखिल रही, उससे पुलिस ने पूरा रिकार्ड तलब किया है। इसमें यह पूछा गया है कि युवती को कब अस्पताल में लाया गया। किसने दाखिल कराया। उसको क्या तकलीफ हुई, क्या जांच हुई। क्या उपचार दिया गया। किस वजह से मौत हुई।

इन सभी बिंदुओं पर अधिकारिक जानकारी मांग गई है। इसके साथ ही अस्पताल से सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस ने कब्जे में ले ली है। जो भी पीड़िता के संपर्क में रहे, उन सभी की कॉल डिटेल पुलिस खंगाल रही है। इसके साथ ही रविवार को फोरेंसिक टीम का भी आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में उस जगह का दौरा करवाया गया, जिस तंबू में युवती के साथ सामूहिक दुष्‍कर्म का आरोप है। पुलिस सभी तथ्य जुटा रही है।

मेडिकल जांच न करवाए जाने पर उठे सवाल

पीड़ित युवती कई दिनों से अस्पताल में थी। इसी बीच संयुक्त मोर्चा के नेताओं काे घटना के बारे में जानकारी थी। फिर भी उसकी मेडिकल जांच नहीं करवाई गई। तभी इस मामले में सच्चाई का पता लगाने में पुलिस के लिए आसानी होती। मगर युवती की कोरोना से मौत बताई गई है।

महिला सुरक्षा पर लगा सवालिया निशान

अब से पहले तो आंदोलन से कई विवाद जुड़़े ही रहे हैं। कभी देशद्रोह के आरोपितों की रिहाई की मांग, कभी दिल्ली में हिंसा, कभी आंदोलन के बीच पंजाब के किसान की गला काटकर हत्या, कभी शराब के पैसों के लिए पंजाब के एक किसान द्वारा दूसरे की हत्या, कभी आंदोलन में आए युवकाें द्वारा पेट्रोल पंप लूटने व ज्वैलर्स शॉप में लूटपाट की कोशिश में पकड़े जाने की घटनाओं से तो यह आंदोलन बदनाम था, अब सामूहिक दुष्‍कर्म का आरोप है। इसके बाद तो आंदोलन में शामिल किसी भी महिला की अस्मत की सुरक्षा पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। जिन पर आरोप है, वे तो अभी फरार हैं, मगर आंदोलन में अब और कोई आपराधिक तत्व नहीं छिपा है, इसकी गारंटी कौन देगा।

 

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