रोहतक में कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं दी गई लैब टेक्निशियन पद पर नियुक्ति, पीएम से लगाई गुहार

कोर्ट ने तीन महीने में लैब टेक्निशियन को ज्‍वाइन करने आ आदेश दिया था जबकि 11 माह बीत चुके हैं

पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन लैब टेक्निशियन के पद पर नियुक्ति देने में आनाकानी कर रहा है। हाई कोर्ट से जनवरी 2020 में फाइनल ऑर्डर आया था। जिसमें याचिकाकर्ताओं के मेरिट के अनुसार खाली पड़े पदों पर तीन माह में नियुक्ति देने की बात कही गई है।

Manoj KumarFri, 15 Jan 2021 06:33 PM (IST)

रोहतक, जेएनएन। पानीपत निवासी अनिल गौतम ने आरोप लगाया है कि कोर्ट से फैसला आने के बावजूद पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन उसे लैब टेक्निशियन के पद पर नियुक्ति देने में आनाकानी कर रहा है। सीएम विंडो पर इस बाबत शिकायत की है। यहां भी शिकायतकर्ता के हक में फैसला सुनाया गया है। विवि के रजिस्ट्रार की ओर से कोर्ट में यह बयान दिया गया कि तीन माह के अंदर शिकायतकर्ता को पद पर नियुक्ति दी जाएगी। फैसले के करीब 11 माह बाद भी कोई कार्रवाई शिकायतकर्ता की नियुक्ति को लेकर नहीं की जा रही।

हाई कोर्ट से जनवरी 2020 में फाइनल ऑर्डर इस मामले में आया था। जिसमें याचिकाकर्ताओं के सभी दस्तावेजों के अनुसार अंक देकर मेरिट के अनुसार खाली पड़े पदों पर तीन माह में नियुक्ति देने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने आरटीआइ के तहत यह भी पता किया है कि विवि में खाली पद पड़ा है, जबकि, उसे बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने पीएम से इस मामले में न्याय की गुहार लगाई है।

यह है मामला

वर्ष 2010 में 86 लैब टेक्निशियन पद के लिए हेल्थ विवि में भर्ती निकली थी। 27 मार्च 2011 में लिखित परीक्षा हुई थी। इसी दिन शाम को पांच बजे परिणाम घोषित कर दिया गया था। जिसमें शिकायतकर्ता अनिल गौतम के 140 में से 97 नंबर आए। ओवरऑल रैंक छह आया। हालांकि, दो मई 2011 को विवि प्रशासन ने सिलेक्शन क्राइटिरिया बदल दिया। सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया। अनिल गौतम का आरोप है कि अधिकारियों ने मिलीभगत कर अपने चहेतों को भर्ती करने के लिए सिलेक्शन क्राइटिरिया बदल दिया था। उनसे कम अंक प्राप्त करने वालों का सिलेक्शन कर लिया गया। दो अगस्त 2011 को फाइनल लिस्ट विवि प्रशासन ने जारी की, उनका नाम इस लिस्ट में नहीं था। इसके बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

लिखित परीक्षा के बाद सिलेक्शन क्राइटिरिया बदलने को ठहराया गया गलत

शिकायतकर्ता का कहना है कि मई 2011 में लैब टेक्निशियन भर्ती के लिए इंटरव्यू हुए। उनका चयन नहीं होने पर उसी वर्ष उन्होंने हाई कोर्ट में भर्ती के लिए सिलेक्शन क्राइटेरिया को चैलेंज कर दिया था। 28 जनवरी 2020 को फाइनल ऑर्डर अाया। कोर्ट ने आदेश में लिखित परीक्षा के बाद बनाए गए सिलेक्शन क्राइटिरिया को गलत ठहराया गया। पद पर नियुक्ति के लिए विवि प्रशासन को तीन माह का समय दिया गया था।

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