कपास की फसल में गुलाबी सुंडी रोकने के लिए की कृषि वैज्ञानिक रखेंगे नजर

इस साल गुलाबी सुंडी से कपास की फसल नष्‍ट न हो इसके लिए वैज्ञानिक सचेत हो गए हैं

पिछले सीजन में जींद जिले व बठिंडा में फसल में गुलाबी सुंडी मिली। गुलाबी सुंडी को देखकर कृषि वैज्ञानिकों के होश उड़ गये। इस साल भी गुलाबी सुंडी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। जिसको लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने सुंडी से निपटने के लिए प्लान तैयार किया है।

Manoj KumarSun, 11 Apr 2021 09:07 AM (IST)

सिरसा, जेएनएन। केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र द्वारा कपास की फसल में गुलाबी सुंडी को रोकने के लिए कार्य शुरू किया हुआ है। इसके लिए जहां किसानों को समय समय पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी के साथ कपास के सीजन में कृषि वैज्ञानिक समय समय पर निरीक्षण करेंगे। उत्तरी भारत में कपास की फसल में सुंडी की संभावना को देखते हुए प्लान तैयार किया गया है। गौरतलब है कि उत्तरी भारत में पिछले सीजन में जींद जिले व बठिंडा में फसल में गुलाबी सुंडी मिली। गुलाबी सुंडी को देखकर कृषि वैज्ञानिकों के होश उड़ गये। इस साल भी गुलाबी सुंडी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

जिसको लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने सुंडी से निपटने के लिए प्लान तैयार किया है। हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में कपास की करीब 11 लाख हेक्टेयर पर कपास की खेती होती है। जिसमें सबसे ज्यादा सिरसा में 2 लाख 8 हजार हेक्टेयर पर कपास की खेती होती है। दक्षिण भारत के राज्यों के साथ जोड़ा गये उत्तरी भारत के राज्य

गुलाबी सुंडी कर देती है फसल को नष्ट

कपास की फसल में गुलाबी सुंडी काफी नुकसान पहुंचती है। गुलाबी सुंडी एक तरह का कीट है। जिसका वैज्ञानिक नाम पैक्टीनीफोरा गोंसीपीला है। ये अपने जीवनकाल के दौरान अलग-अलग चार अवस्थाओं से गुजरता है। सामान्यत: फसल में कलियां व फूल आने के बाद ही इस कीट का उपद्रव शुरू होता है। कई बार कीटग्रस्त फूलों की पंखुड़िया आपस में मिल जाती है। दूर से देखने पर गुलाब के समान दिखाई देती है। अंडे में निकली छोटी-छोटी सुंडियां फूल व छोटे बोल्स में सूक्ष्म छिद्र बनाकर उनके अंदर प्रवेश कर जाती है। इससे फूल व बोल्स गिर जाते हैं। वहीं इससे फसल को काफी नुकसान होता है। कपास अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक रखेंगे नजर

 

सूची की जा रही है तैयार

गुलाबी सुंडी को रोकने के लिए संभावित जिलों की सूची तैयार की गई है। जिसके तहत केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र सिरसा के कृषि वैज्ञानिक सिरसा व मानसा में, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जींद, क्षेत्रीय कपास अनुसंधान पंजाब खेतीबाड़ी विश्वविद्यालय बठिडा द्वारा बठिंडा, बीकानेर अनुसंधान कृषि विश्वविद्यालय द्वारा हनुमानगढ़ व गंगानगर में निगरानी रखी जाएगी।

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