पीजीआई विशेषज्ञों की सलाह : मास्क का इस्तेमाल और वैक्सीन ही ओमिक्रोन वैरिएंट से बचाव

भारत में भी ओमिक्रोन वैरिएंट की दस्तक हो चुकी है। कोरोना के पहले वैरिएंट की अपेक्षा ओमिक्रोन का फैलाव कई गुना ज्यादा बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक हरियाणा में इस वैरिएंट का एक भी केस नहीं है।

Manoj KumarWed, 08 Dec 2021 02:41 PM (IST)
डेल्टा से खतरनाक नहीं ओमिक्रोन वैरिएंट, लेकिन एहतियात जरूरी

ओपी वशिष्ठ, रोहतक : दुनिया के कई देशों में दशहत मचाने के बाद भारत में भी ओमिक्रोन वैरिएंट की दस्तक हो चुकी है। कोरोना के पहले वैरिएंट की अपेक्षा ओमिक्रोन का फैलाव कई गुना ज्यादा बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक हरियाणा में इस वैरिएंट का एक भी केस नहीं है। इस वैरिएंट से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल ही एक उपाय है। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर स्वास्थ्य संस्थान (पीजीआइएमएस) रोहतक में ओमिक्रोन को लेकर तैयारियां तेज कर दी है ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित की जा सके। ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर पीजीआइएमएस के डा. रमेश वर्मा से विशेष बातचीत के मुख्य अंश...

ओमिक्रोन वैरिएंट कितना खतरनाक है?

पीजीआइएमएस के कम्यूनिटी मेडिकल प्रोफेसर एवं को-वैक्सीन ट्रायल के को-इन्वेष्टीगेटर डा. रमेश वर्मा ने बताया कि अभी तक ओमिक्रोन वैरिएंट के प्रभावों को लेकर कोई खास स्टडी सामने नहीं आई है। लेकिन प्रारंभिक तौर पर जो स्टडी आ रही है, उसमें सामने आया है कि ओमिक्रोन वैरिएंट पहले के मुकाबले कई गुणा तेजी से फैल रहा है। कोरोना वायरस में 50 म्यूटेशन होने के बाद ओमिक्रोन वैरिएंट सामने आया है। डेल्टा वैरिएंट में 13 ही म्यूटेशन हुए थे। दक्षिण अफ्रीका में इस वैरिएंट के प्रभाव गंभीर नहीं आए हैं, मृत्यु दर में कोई इजाफा नहीं है।

ओमिक्रोन किस उम्र के लोगों को पहुंचा सकता है नुकसान

डा. रमेश वर्मा का कहना है कि ओमिक्रोन वैरिएंट के प्रभाव को लेकर कोई स्टडी सामने नहीं आई है। लेकिन यह तय है कि अगर इसका फैलाव होता है तो ज्यादा उम्र के लोगों को नुकसान पहुंचाएगा। चूंकि बच्चों में ऐस फैक्टर काम करता है, इसलिए उनके लिए ज्यादा घातक नहीं रहेगा। गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, शुगर के मरीजों को सबसे ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।

वैक्सीन की दोनों डोज कितनी कारगर

डा. रमेश वर्मा का कहना है कि को-वैक्सीन के ट्रायल पीजीआइएमएस रोहतक में हुआ था। जब स्टडी के दौरान सामने आया था कि दस से बीस फीसद लोग वैक्सीन लगने के बाद भी कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। लेकिन वे गंभीर नहीं होंगे। अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डेल्टा वैरिएंट ने तबाही मचाई, लेकिन कोरोना वैक्सीन लगने वाले लोगों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकी। इसलिए कोरोना की दोनों डोज हर किसी के लिए जरूरी है।

क्या ओमिक्रोन के बाद नए वैरिएंट की भी संभावना

ओमिक्रोन वैरिएंट के बाद भी कोरोना का नया वैरिएंट सामने आ सकता है। कोरेाना के अभी तक पांच वैरिएंट आ चुके हैं। सबसे पहले अल्फा, इसके बाद बीटा, गामा, डेल्टा और अब ओमिक्रोन वैरिएंट का संक्रमण फैल रहा है। हालांकि ओमिक्रोन के भारत में अभी तक केस बहुत कम है। लेकिन इसका संक्रमण पहले से कई गुणा है, जो तेजी से फैल सकता है।

ओमिक्रोन से कैसे करें बचाव

डा. रमेश वर्मा का कहना है कि ओमिक्रोन वैरिएंट से केवल कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर ही बचा सकता है, जिसमें फेस मास्क, दो गज दूरी और हैंडवास। लेकिन सबसे ज्यादा कारगर कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज है। लेकिन 50 फीसद लोगों ने अभी तक कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगवाई है, जो चिंता का कारण है। इसलिए जिन लोगों ने दूसरी डोज नहीं लगवाई है, वो तुरंत अपने आसपास डोज लगवाने का काम करें।

ओमिक्रोन वैरिएंट के लक्षण क्या है?

ओमिक्रोन वैरिएंट के लक्षण पहले की तरह ही है। खांसी, जुकाम, हल्का बुखार और गले में खरास के लक्षण सामने आ रहे हैं। साथ में शरीर में थकावट और दर्द की बात भी सामने आई है। खाने का स्वाद और सुंघने की क्षमता इस वैरिएंट में जाने की जानकारी नहीं मिल रही है।

डा. ध्रुव चौधरी, विभागाध्यक्ष पुलमोनरी एंड क्रिटिकल केयर सेंटर पीजीआइएमएस, रोहतक ने बताया पीजीआइएमएस में ओमिक्रोन वैरिएंट के संक्रमण की संभावना को देखते हुए पूरी तैयारियां की गई है। अभी तक इसके प्रभाव को लेकर कोई खास जानकारी सामने नहीं आई है। ओमिक्रोन वैरिएंट का पता लगाने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग लैब का होना जरूरी है। अभी तक दिल्ली में ही इसका पता लगाया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट में देरी हो रही है। पीजीआइएमएस में भी जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। सरकार इसको लेकर गंभीर है। एमडीयू रोहतक में भी जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन लगी हुई है, उसके साथ भी काम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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