अभय चौटाला के विधायक पद से इस्तीफा देने से ऐलनाबाद में तीसरी बार होगा उप चुनाव

अभय चौटाला इनेलो के इकलौते विधायक बचे थे

अभय चौटाला ने किसान आंदोलन के समर्थन और कृषि कानूनों के विरोध में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद ऐलनाबाद में तीसरी बार उप चुनाव होगा।सबसे पहले ऐलनाबाद में उप चुनाव 1970 में हुआ था।

Manoj KumarThu, 28 Jan 2021 09:38 AM (IST)

सिरसा,जेएनएन। किसान आंदोलन के समर्थन में ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला के इस्तीफा देने के बाद ऐलनाबाद में तीसरी बार उप चुनाव होगा।सबसे पहले ऐलनाबाद में उप चुनाव 1970 में हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में 1968 के चुनाव में जीते लाल चंद खोड के चुनाव को चुनौती दी गई थी। इसके बाद हुए उप चुनाव में चौ. ओमप्रकाश चौटाला ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2010 में फिर यहां उप चुनाव हुआ। इस उप चुनाव में अभय सिंह चौटाला ने जीत दर्ज की।

यह उप चुनाव चौ. ओमप्रकाश चौटाला के दो जगह जीतने के बाद यहां से त्यागपत्र देने के कारण हुआ था। तब से लेकर अब तक उन्होंने ही इस हलके का प्रतिनिधित्व किया है। 1977 से 2005 तक यह सीट आरक्षित रही जिसके चलते चौ. देवीलाल परिवार यहां से चुनाव नहीं लड़ पाया वरना सबसे पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस की टिकट पर 1967 में प्रताप सिंह चौटाला ने जीत दर्ज की। 1972 में यहां से बृजलाल विजयी रहे थे।

1977 से लेकर 1987 तक यहां लोकदल के भागीराम विधायक रहे। 1991 में मनीराम केहरवाला ने भागीराम को हराया और 1996 व 2000 में फिर भागीराम ने यहां से चुनाव जीता। 2005 में यहां से इनेलो के ही सुशील इंदोरा ने जीत दर्ज की थी।

2009 में सीट सामान्य होते ही देवीलाल परिवार ने फिर लड़ा च़नाव

2009 में आरक्षित से यह सीट सामान्य हो गई। यहां से चौ. ओमप्रकाश चौटाला ने चुनाव लड़ा और जीत गए। हालांकि उन्होंने उचाना से भी जीत दर्ज की जिसके चलते 2010 में उप चुनाव में अभय सिंह को चुनाव लड़ाया गया और उन्होंने जीत दर्ज करवाई। इसके बाद 2014 और 2019 के चुनाव में अभय सिंह चौटाला यहां से विधायक बने हैं।

उप चुनाव से हुआ सक्रिय राजनीति में अभय का पदार्पण

अभय सिंह चौटाला का पहला चुनाव ग्राम पंचायत चौटाला का रहा। यहां वह पंच चुने गए। वर्ष 2000 में उन्होंने रोड़ी से उप चुनाव लड़ा और करीबन 90 फीसद वोटरों के समर्थन से वे रिकार्ड मतों से चुने गए। इसके बाद ऐलनाबाद में भी 2010 में हुए उप चुनाव में जीत दर्ज करवाई। इससे पहले वे 2005 में जिला परिषद के चेयरमैन भी रहे हैं।

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