शहादत को नमन, 1971 के शहीद हरियाणा के 307 लालों को साइकिल यात्रा से मिलेगी पहचान

यह यात्रा दो चरणों में होगी। पहला चरण हिसार समेत 14 जिलों में 23 से 27 मार्च तक होगा।

हिसार के मिर्जापुर के शहीद वीरचक्र विजेता शहीद लेफ्टिनेंट हवासिंह को खोजने वाली सोसाइटी मुहिम शुरू करेगी। शहीदाें की पहचान के लिए प्रतिमा और स्कूलों पर नाम अंकित किया जाएगा। सोसाइटी सैनिक कल्याण बोर्ड के साथ मिलकर 1971 में शहीद हरियाणा के बेटों के यहां साइकिल यात्रा के साथ जाएगी।

Umesh KdhyaniTue, 02 Mar 2021 07:15 AM (IST)

हिसार [वैभव शर्मा]। हिसार के गांव मिर्जापुर में 1971 में भारत पाक युद्ध के शहीद वीरचक्र विजेता शहीद लेफ्टिनेंट हवा सिंह का इतिहास लगभग 47 वर्ष से किताबों में दफन हो गया था। इस शहीद को खोजकर फिर से पहचान शहीद लेफ्टिनेंट हवासिंह वीरचक्र वेलफेयर सोसाइटी मिर्जापुर (हिसार) ने दिलाई। अब यही सोसाइटी हरियाणा के 318 शहीद लालाें को पहचान दिलाने के लिए एक बड़ी मुहिम छेड़ने जा रही है। सोसाइटी सैनिक कल्याण बोर्ड के साथ मिलकर 1971 में शहीद हुए हरियाणा के बेटों के यहां साइकिल यात्रा के साथ जाएगी। यह यात्रा दो चरणों में होगी। पहला चरण हिसार समेत 14 जिलों में  23 से 27 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। बाकी जिलों में दूसरा चरण इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर में संपन्न होगा।

शहीदों के लिए कर्नल धर्मबीर ने दिया साइकिल यात्रा का सुझाव

मिर्जापुर के शहीद वीरचक्र विजेता शहीद लेफ्टिनेंट हवा सिंह को खोजने में मिर्जापुर के पास नियाणा गांव के कर्नल धर्मबीर नेहरा (तत्कालीन कमांड अधिकारी प्रथम हरियाणा आरएंडवी स्क्वाड्रन हिसार) ने दिन रात एक कर दिए थे। उन्होंने बचपन में किताबों में शहीद हवा सिंह के बारे में पढ़ा था। उनकी पहल से मिर्जापुर में शहीद के नाम से प्रतिमा, स्टेडियम और मुख्य द्वार पंचायत के सहयोग से तैयार हो चुका है। कर्नल धर्मबीर ने सोचा कि प्रदेश में हर शहीद को उसके गांव में पहचान मिलनी चाहिए। इसीलिए उन्होंने मिर्जापुर की सोसायटी को साइकिल यात्रा का सुझाव दिया। इसके साथ ही सैनिक कल्याण बोर्ड के साथ मिलकर शहीद के परिजनों व पंचायतों से बात भी की। खास बात है कि यह वर्ष 1971 की विजय का स्वर्णिम वर्ष है।

हिसार के हैं 16 शहीद, एक की अभी भी चल रही है खोज

यात्रा का प्रारंभ हिसार जिले से होगा। हिसार जिले से इस युद्ध में 16 जवान शहीद हुए थे। इनमें से एक शहीद श्यामलाल के परिवार के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। बाकी 15 शहीद, देवां, बुड़ाक, डोभी, काजलां, मोठसरा, कालीरावण, खासा महाजन, खैरी, दौलतपुर, राखी शाहपुर, भैणी अमीरपुर, थुराना, भाटला, बुगाना और मिर्जापुर से हैं। जिला सैनिक बोर्ड और सोसाइटी दोनों शहीद श्यामलाल के परिजनों के बारे में बी ई जी सेंटर रुड़की से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

23 मार्च को लघु सचिवालय से शुरू होगी यात्रा

साइकिल यात्रा 23 मार्च को सुबह 9 बजे हिसार के लघु सचिवालय के पास स्थित शहीद स्मारक से शुरू होगी। यात्रा में 21 साइकलिस्ट होंगे। हर शहीद के परिवार या गांव का कम से कम एक सदस्य इसमें भाग लेगा और बाकी मिर्जापुर गांव के होंगे। ये साइकिल यात्रा 27 मार्च को शाम 4 बजे गांव मिर्जापुर के शहीद लेफ्टिनेंट हवासिंह वीरचक्र स्टेडियम में स्थित स्मारक पर पहुंचेगी।

इन जिलों में जाएगी दो चरणों में साइकिल यात्रा

पहला चरणः अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुरुग्राम, हिसार, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, पानीपत, पलवल, सिरसा, यमुनानगर

दूसरा चरणः भिवानी, झज्जर, रेवाड़ी, रोहतक, सोनीपत

यात्रा का उद्देश्य

पंचायत व शहीद परिजन मिलकर इस परियोजना पर करेंगे काम हर शहीद के गांव के प्रवेश द्वार पर शहीद का नाम लिखा जाएगा। उस गांव के स्कूल का नामकरण भी शहीद के नाम पर किया जाएगा। गांव में शहीद की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। गांव के किसी रोड का नाम शहीद के नाम पर रखा जाएगा। गांव में शहीद के नाम पर स्टेडियम या पार्क बनाया जाएगा। गांव में शहीद के नाम पर हर साल शहीदी दिवस मनाया जाएगा।

--- इस तरह के श्रद्धापूर्ण आयोजनों और योजनाओं से न सिर्फ गांवों को फायदा होगा बल्कि इससे हमारे नौजवानों और आने वाली पीढ़ियों को शहीदों का सम्मान करने की भी प्रेरणा मिलेगी।

- कर्नल धर्मवीर नेहरा, कमांड अधिकारी, टू पंजाब आरएंडवी स्क्वाड्रन एनसीसी, बठिंडा

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