सिरहौल से रजोकरी बार्डर तक रेंगते रहे वाहन

सिरहौल से रजोकरी बार्डर तक रेंगते रहे वाहन

किसानों के दिल्ली कूच को लेकर दिल्ली पुलिस की सख्ती बुधवार को भी जारी रही। इसका असर यह रहा कि सिरहौल बार्डर से लेकर रजोकरी बार्डर तक पूरे दिन वाहन रेंगते रहे।

Publish Date:Wed, 02 Dec 2020 06:01 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: किसानों के दिल्ली कूच को लेकर दिल्ली पुलिस की सख्ती बुधवार को भी जारी रही। इसका असर यह रहा कि सिरहौल बार्डर से लेकर रजोकरी बार्डर तक पूरे दिन वाहन रेंगते रहे। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। परेशान लोगों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ने किसानों से बातचीत शुरू कर दी है, फिर आंदोलन स्थगित कर देना चाहिए।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले एक सप्ताह से चल रहा है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने रजोकरी बार्डर पर नाका लगा रखा है। जैसे ही नाके पर सख्ती की जाती है उसका असर गुरुग्राम इलाके पर पड़ता है। बुधवार सुबह नौ बजे के बाद जैसे ही नाके पर सख्ती की गई, वाहनों की लाइनें पीछे सिरहौल बार्डर तक लग गईं।

जाम से बचने के लिए काफी वाहन चालक रांग साइड शंकर चौक तक पहुंचे। इस वजह से उद्योग विहार इलाके में भी ट्रैफिक का दबाव बन गया था। जाम में फंसे मानेसर निवासी रमेश कुमार एवं जयशंकर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है। ऐसे में आंदोलन जारी रखना उचित नहीं। किसानों को साइड में निर्धारित जगह पर चले जाना चाहिए।

किसानों के आंदोलन की वजह से दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी रजोकरी बार्डर से लेकर सिरहौल बार्डर तक प्रतिदिन घंटों वाहन रेंगते रहते हैं। यह विकास के लिए सही नहीं है। समय पर न माल पहुंच पाता है और न ही लोग अपने काम पर समय से पहुंच पाते हैं। इधर, जिला पुलिस भी मेवात, पलवल, रेवाड़ी इलाके और राजस्थान से आने वाले वाहनों पर लगातार नजर रख रही है। झाड़सा खाप ने दिया आंदोलन को समर्थन

360 गांव झाड़सा खाप के अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान की अध्यक्षता में बुधवार को गांव झाड़सा स्थित सर छोटूराम भवन में बैठक हुई। इसमें सभी ने एक सुर से किसानों के आंदोलन का समर्थन देने का निर्णय लिया। बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर वे लोग भी आंदोलन में भाग लेने के लिए कूच कर सकते हैं।

चौधरी महेंद्र सिंह ठाकरान ने कहा कि कृषि कानूनों को लागू करने से पहले केंद्र सरकार को किसानों से भी संवाद करना चाहिए था। अपने स्तर पर ही निर्णय ले लिया गया। यदि संवाद किया जाता तो कानून में कमी नहीं रहती। बैठक में सुमेर सिंह, अधिवक्ता राजेंद्र महलावत, डा. मुकेश शर्मा, जसबीर ठाकरान, तेज सिंह ठाकरान, चौधरी रिसाल सिंह, भीम सिंह ठाकरान सहित काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

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