धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ा है शीतला माता श्राइन बोर्ड

धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ा है शीतला माता श्राइन बोर्ड

शीतला माता का नाम आते ही श्रद्धालुओं के मस्तक श्रद्धा से झुक जाते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र शीतला माता मंदिर न केवल धार्मिक आयोजन और उत्सव के लिए जाना जाता है बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी इसका गहरा नाता है।

JagranFri, 16 Apr 2021 05:11 PM (IST)

महावीर यादव, बादशाहपुर

शीतला माता का नाम आते ही श्रद्धालुओं के मस्तक श्रद्धा से झुक जाते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र शीतला माता मंदिर न केवल धार्मिक आयोजन और उत्सव के लिए जाना जाता है, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी इसका गहरा नाता है। शिक्षा के क्षेत्र में दान देने के अलावा शीतला माता मंदिर स्वास्थ्य के प्रति भी लोगों की सेवा में जुटा हुआ है। मंदिर में प्रतिवर्ष 15 से 16 करोड़ रुपये की राशि एकत्रित होती है। वेदों का ज्ञान देने के लिए मंदिर परिसर में वेद पाठशाला चल रही है, वही मंदिर में आने वाले दान से श्रवण एवं वाणी विकलांग स्कूल को प्रतिमाह बड़ी राशि सहायता के लिए दी जाती है। शीतला माता को श्रद्धालु गुड़गांमा वाली माता के नाम से भी पुकारते हैं।

गुड़गांव गांव के पास शीतला माता का एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में अश्विन व चैत्र मास के नवरात्र में विशाल मेला भरता है। इसके अलावा वर्षभर श्रद्धालु अपने बच्चों के मुंडन और माता के दर्शन को इस मंदिर में काफी संख्या में आते हैं। शीतला माता मंदिर नौ शक्तिपीठों में से एक है।

ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य ने कौरव और पांडवों को गुरुग्राम में दीक्षा दी थी। गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी कृपा देवी के नाम से इस मंदिर की नींव पड़ी। 17वीं शताब्दी में भरतपुर के राजा ने कृपी देवी के मंदिर का पुनरुद्धार कर शीतला माता का नाम दिया था। ऐसी मान्यता है कि माता के दर्शन से बच्चों में चिकनपाक्स व स्मालपाक्स जैसी बीमारियां खत्म हो जाती हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार ने इस मंदिर का कामकाज संभालने के लिए श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड का गठन किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री इस बोर्ड के चेयरमैन हैं। नगर निगम आयुक्त विनय प्रताप सिंह मंदिर के प्रशासक और सेवानिवृत्त तहसीलदार यज्ञदत्त शर्मा बतौर मंदिर अधिकारी कार्यरत हैं।

श्रवण एवं वाणी विकलांग केंद्र को सहायता

श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड महरौली रोड स्थित श्रवण एवं वाणी विकलांग केंद्र को प्रतिमाह 2.5 लाख रुपये की सहायता प्रदान करता है। इस राशि से इस स्कूल के शिक्षकों को वेतन आदि दिया जाता है। मंदिर परिसर में एक वेद पाठशाला चलाई जाती है। इस वेद पाठशाला में छात्रों को वेदों का ज्ञान दिया जाता है। हर वर्ष करीब 50 छात्र इस वेद पाठशाला में वेद शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर पंडित बनते हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में एक बड़ा पुस्तकालय बनाया गया है। इस पुस्तकालय में छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा संबंधी किताबों के अलावा धार्मिक किताबें भी उपलब्ध हैं।

सेक्टर-39 में है श्राइन बोर्ड की डायग्नोस्टिक लैब

स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों की मदद करने के लिए श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड ने डायग्नोस्टिक लैब खोलने का फैसला लिया। सेक्टर-39 में इस लैब को तैयार करने में करीब 6.5 करोड़ रुपये की लागत आई। इसमें श्राइन बोर्ड ने करीब तीन करोड़ रुपये की सहयोग राशि दी। इस लैब का नाम भी शीतला माता साइन बोर्ड डायग्नोस्टिक लैब रखा गया है। लैब में लोगों को सस्ते दामों पर जांच की सुविधा मिलती है। नागरिक अस्पताल में दो बड़े जनरेटर भी श्राइन बोर्ड ने उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय श्राइन बोर्ड का विशेष योगदान रहता है। पिछले साल कोरोना काल में श्राइन बोर्ड ने मुख्यमंत्री कोरोना फंड में पांच करोड़ रुपये की राशि का सहयोग दिया था।

मंदिर धार्मिक उत्सवों का आयोजन करता है। यह तो सभी मंदिरों की प्राथमिकता होती है। मंदिर लोगों की आस्था के केंद्र भी हैं। मंदिरों से आने वाले दान से सामाजिक हितों का ध्यान रखा जाना बड़ी बात है। श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्य किए हैं। आगे भी सामाजिक उत्थान के लिए कार्य किए जाएंगे।

परमिदर कटारिया, सदस्य, श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड शीतला माता मंदिर लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। मंदिर में काफी बड़ी मात्रा में दान राशि श्रद्धालु देते हैं। इस धनराशि को विभिन्न सामाजिक कार्यों में खर्च करना ही श्राइन बोर्ड का उद्देश्य रहता है। फिलहाल मंदिर का जीर्णोद्धार कर भव्य रूप प्रदान किया जा रहा है। ताकि शीतला माता के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो।

प्रदीप शर्मा, सदस्य, श्री माता शीतला देवी श्राइन बोर्ड

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