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किसानों को बेहतर मंच देने की जिद्दोजहद में जुटी हैं गौरी

प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम

ऑर्गेनिक भोजन के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है और लोग अब इसे तेजी से अपना रहे हैं। जैविक खेती को इससे बढ़ावा मिला है और ऊंचे दामों में भी ऑर्गेनिक अनाज लोगों को घाटे का सौदा नहीं लग रहा है। बावजूद इसके किसानों को इस बदलाव का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण यह है कि किसानों के खेतों से निकलकर अनाज लोगों तक नहीं पहुंचता। किसान इस बारे में कुछ कर नहीं पाते। इन्हीं किसानों को ऑर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित कर उनकी मेहनत का मोल समझा रही हैं शहर की गौरी सरीन। गौरी 'लिविग विदाउट मेडिसिन' अभियान के तहत 'विलेज टू किचन' की अवधारणा बना किसानों को अपनी बात रखने का मंच दे रही हैं। इसके तहत किसानों को उनके अधिकारों की जानकारी तो मिल ही रही है साथ ही उन्हें अपनी मेहनत के लाभ के बारे में भी जानकारी हो रही है। ऐसे कर रही हैं काम

'लिविग विदाउट मेडिसिन' के 'विलेज टू किचन' अभियान के तहत गौरी गांवों के किसानों से मिलकर उन्हें जैविक खेती का महत्व समझा रही हैं। इसके अलावा उन्हें सीधा ऐसे मंचों पर ला रही हैं जहां उनके अनाज का उचित दाम उन्हें मिल सके। उन्हें ऐसा मंच दे रही हैं कि किसान अपनी समस्याएं व अपनी बात रख सकें। गौरी के मुताबिक इस अभियान से उनके तीन मकसद हल होंगे। एक तो किसानों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जा सकेगा, दूसरे बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलेगा और तीसरा पर्यावरण को स्वच्छ बनाया जा सकेगा। किसानों को देती हैं कानूनी जानकारी

गौरी किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में जा रही हैं और उन्हें फसल मुआवजा से लेकर किसानों से संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक कर रही हैं। यहां तक कि वे किसानों के साथ विभागीय अधिकारियों के पास भी जाती हैं और उन्हें उनके अधिकारों को दिलवाने के लिए जद्दोजहद करती हैं। वे किसानों को अपने अधिकारों के लिए बोलने के लिए आगे ले जाती हैं। उन्हें उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कानूनी जानकारी देती हैं। उनकी इस योजना से किसानों की समस्याएं अधिकारियों तक पहुंच रही हैं और अधिकारी उनका समाधान भी कर रहे हैं। किसान जागरूक होकर जैविक खेती को अपना रहे हैं और अपनी मेहनत को असल मोल को पहचान कर उसकी मांग भी कर रहे हैं।

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