शौर्य गाथा: महावीर चक्र विजेता के नाम पर बसा है शीशपाल विहार

Kargil Vijay Diwas News फौजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले शीशपाल भी 1940 में सेना में दो-जाट बटालियन में भर्ती हो गए। शीशपाल की बटालियन 1948 में जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। जम्मू कश्मीर आपरेशन में वे प्लाटून लीडर थे।

Mon, 26 Jul 2021 06:50 PM (IST)
बलिदानी महावीर चक्र विजेता नायक शीशपाल file photo

महावीर यादव, बादशाहपुर (गुरुग्राम) देश की आन-मान और शान के लिए बलिदान देने वाले वीरों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाते हैं। देश के लिए बलिदान देने वाले अमर हो जाते हैं। ऐसे ही एक बलिदानी महावीर चक्र विजेता नायक शीशपाल के नाम को अमर करने के लिए सेना के अधिकारियों ने बड़ा फैसला लिया। इंडो-पाक युद्ध 1947-48 में बलिदान देने वाले नायक शीशपाल के नाम पर सोहना रोड पर आर्मी वेलफेयर हाउ¨सग आर्गेनाइजेशन (एडब्ल्यूएचओ) ने एक सोसायटी का निर्माण किया। इस सोसायटी में सेना के अधिकारियों को ही फ्लैट अलाट किए गए। महावीर चक्र विजेता नायक शीशपाल का जन्म भिवानी जिले के गांव बामला में 26 जून 1920 को हुआ। फौजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले शीशपाल भी 1940 में सेना में दो-जाट बटालियन में भर्ती हो गए। शीशपाल की बटालियन 1948 में जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। जम्मू कश्मीर आपरेशन में वे प्लाटून लीडर थे। नौ अप्रैल 1948 को उनकी प्लाटून को प्वाइंट 3831 पर अटैक करने का आदेश मिला। प्लाटून का नेतृत्व करते हुए दुश्मन की गोली शीशपाल की छाती में लगी। गोली लगने के बाद भी जान की परवाह ना करते हुए साथियों को दृढ़ संकल्प और धैर्य के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सेक्शन कमांडर सहित उनके दो साथी भी घायल हो गए थे। जो मशीनगनों के साथ उनकी पलटन में भारी गोलीबारी कर रहे थे। गोली से घायल होने के बाद भी नायक शीशपाल जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए चिल्लाते रहे 'अरे जाटों चढ़ जाओ पोस्ट पे, फहरा दो तिरंगा मेरे मरने से पहले।' नायक शीशपाल के शब्दों ने पूरी प्लाटून में नया जोश भर दिया। प्लाटून ने कुछ ही देर में चोटी पर अपना कब्जा जमा लिया, लेकिन अपने वीर सैनिक नायक शीशपाल को खो दिया। देश के लिए बलिदान देने वाले नायक शीशपाल को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। महावीर चक्र के साथ-साथ सेना के अधिकारियों ने उनको एक बड़ा सम्मान दिया। सेना के अधिकारियों के लिए आर्मी वेलफेयर हाउ¨सग आर्गेनाइजेशन ने सोहना रोड पर एक हाउ¨सग सोसायटी बनाने का निर्णय लिया। इस हाउ¨सग सोसायटी का नाम नायक शीशपाल के नाम पर रखा गया। इस सोसायटी को आज शीशपाल विहार डिफेंस एन्क्लेव के नाम से जाना जाता है। साउथ सिटी-टू के साथ बनी नायक शीशपाल के नाम पर यह सोसायटी शहर की पाश सोसायटी में गिनी जाती है।

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