ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों में बढ़ा इस बीमारी का खतरा, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों में बढ़ा इस बीमारी का खतरा, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर
Publish Date:Sun, 20 Sep 2020 11:03 AM (IST) Author: Mangal Yadav

गुरुग्राम [प्रियंका दुबे मेहता]। स्मार्ट फोन, लैपटॉप व कंप्यूटर भले ही आज की जरूरत हो लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चे इन उपकरणों के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। आंखों की जो बीमारियां एक उम्र के बाद शुरू होती थी, वह अब अब छोटे छोटे बच्चों तक में होने लगी हैं।

ऐसी ही समस्या है ‘मायोपिया’। लगातार पास देखने से आंखों की दूर देख पाने में सहयोग करने में मदद करने वाली मसल्स काम करना कम करने लगती हैं। ऐसे में यह बीमारी होती थी लेकिन अब छोटी उम्र से लोग इसका शिकार हो रहे हैं।

बच्चों में लगातार बढ़ रही है समस्या

गैजेट्स के बढ़ते प्रयोग से मायोपिया की समस्या बच्चों में पिछले सालों के मुकाबले दोगुनी हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक स्कूली बच्चों में 15-16 प्रतिशत से बढ़कर यह समस्या तकरीबन चालीस प्रतिशत हो गई है। युवाओं में स्मार्टफोन का लगातार बढ़ता उपयोग इस प्रतिशत को और बढ़ा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक उनके पास ऐसे स्कूल बच्चों की संख्या बढ़ रही है जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं।

क्यों हो रही है यह बीमारी

स्मार्ट फोन, लैपटॉप, गेमिंग गैजेट्स को पास से देखने की लत ने दूर देखने की आदत को कम कर दिया है। इसके अलावा बढ़ते आपर्टमेंट कल्चर में दूर तक देखने की जगह नहीं मिल पाती और निगाहें आसपास के अपार्टमेंट या ऊंचे भवनों पर ही टिक जाती हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. हीतेंद्र आहूजा के मुताबिक इस स्थिति ऐसे में आंखों की सिलिरी मसल्स (दूर दखने में सहायक मांसपेशियां) का काम खत्म हो रहा है। इसकी वजह से लेमार्क ‘थ्योरी आफ एवेल्यूशन’ के सिद्धांत के अनुसार जीव जिन अंगों का प्रयोग नहीं करता धीरे धीरे उनकी काम करने की क्षमता व उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है। ऐसे में आने वाले समय में आंखों की दूर दृष्टि पूरी तरह से प्रभावित होने व आने वाली पीढ़ियों में इन मासपेशियों की विलुप्ति का खतरा भी है।

क्या है बचाव के उपाय

डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी से बढ़ने व आंखों की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए गैजेट्स का उपयोग कम से कम करना चाहिए। इसके अलावा कहीं ऐसी जगह खड़े होकर दूर या क्षितिज पर देखने की कोशिश की जाए। इस प्रक्रिया को कुछ मिनटों तक दोहराने से मसल्स की कसरत होगी। इसके अलावा पिनहोल गतिविधि करने से भी सिलिरी मसल्स को सक्रिय किया जा सकता है जोकि लेंस व चश्मे के रूप में विशेषज्ञ देते हैं।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हीतेंद्र आहूजा के मुताबिक शहरी लाइफस्टाइल ने इस तरह की समस्याओं को बढ़ा दिया है। स्मार्ट फोन व गैजेट्स के के प्रयोग बढ़ जाने से यह समस्या गहरा गई है। यह समस्या बच्चों व युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। उनके पास आने वाले इस रोग के मरीजों में बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।

डॉ. अमित खन्ना का कहना है कि बच्चों की इनडोर एक्टीविटी में व्यस्त हो जाते हैं इससे मायोपिया दुनिया बढ़ रहा है। एक अध्ययन के मुताबिक 2050 तक पचास प्रतिशत शहरी बचपन में ही मायोपिया का शिकार हो जाएंगे। मैं बच्चों व माता-पिता की काउंसलिंग करता हूं कि बच्चों को गेम्स व गैजेट्स से हटाकर कोई रचनात्मक गतिविधि करवाएं।

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