प्रिंस हत्याकांड : विशेष सीबीआइ अदालत में चालान पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुरू

आठ सितंबर 2017 को एक स्कूल के छात्र की गला रेतकर कर की गई थी हत्या।

प्रिंस हत्याकांड मामले में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपित तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त बिरम सिंह भोंडसी थाने के तत्कालीन प्रभारी नरेंद्र खटाना सब-इंस्पेक्टर शमशेर सिंह एवं ईएएसआइ सुभाषचंद के खिलाफ पंचकूला की विशेष सीबीआइ अदालत में पेश चालान पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई।

Prateek KumarFri, 15 Jan 2021 05:30 PM (IST)

गुरुग्राम (आदित्य राज)। प्रिंस हत्याकांड मामले में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपित तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) बिरम सिंह, भोंडसी थाने के तत्कालीन प्रभारी नरेंद्र खटाना, सब-इंस्पेक्टर शमशेर सिंह एवं ईएएसआइ सुभाषचंद के खिलाफ पंचकूला की विशेष सीबीआइ अदालत में पेश चालान पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई। अदालत में चालान के ऊपर सीबीआइ की ओर से अधिवक्ता अमित जिंदल ने जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने बहस की। मामले में अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।

दो फरवरी को पीड़ित पक्ष आरोपित चारों अधिकारियों को मामले में आजीवन कारावास की सजा हो, इसके लिए चाालान में धारा जोड़ने की मांग को लेकर आवेदन देगा। फिलहाल जो चालान पेश किया गया है उसमें जो धारा लगाई गई है उससे आरोपितों को दोषी ठहराए जाने के बाद केवल तीन साल की सजा होगी। यही नहीं चालान में स्कूल को क्लीनचिट दे दी गई है। इसके खिलाफ भी आवेदन पीड़ित पक्ष अदालत में देगा।

बता दें कि सोहना रोड स्थित एक नामी स्कूल के छात्र प्रिंस की गला रेतकर हत्या स्कूल के ही बाथरूम में आठ सितंबर 2017 को कर दी गई थी। हत्या के कुछ ही देर बाद गुरुग्राम पुलिस ने स्कूल के एक बस सहायक को आरोपित मानते हुए गिरफ्तार कर लिया था। जब जांच सीबीआइ ने शुरू की तो बस सहायक पूरी तरह निर्दोष निकला था।

यही नहीं जिस छात्र भोलू को गुरुग्राम पुलिस ने मुख्य गवाह बनाया था उसे ही सीबीआइ ने आरोपित के रूप में गिरफ्तार किया था। सीबीआइ ने चालान पेश कर साफ कर दिया है कि बस सहायक को फंसाने के लिए तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

चालान पर संज्ञान लेने के लिए शुक्रवार को अदालत ने सीबीआइ से चारों पुलिस अधिकारियों के बारे पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। वे फिलहाल कहां तैनात हैं, किस पद पर तैनात हैं आदि जानकारी दो फरवरी को सीबीआइ अदालत को देगी। सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सुशील टेकरीवाल ने कहा कि यदि सीबीआइ जांच नहीं होती तो बस सहायक को फांसी पर लटका दिया जाता। ऐसे में चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आइपीसी की 194 धारा के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इस धारा काे चालान में जोड़ा जाए। जिसकी गलती से किसी निर्दोष को फांसी पर लटका दिया जाता है, उसे कम से कम आजीवन कारावास की सजा होनी ही चाहिए।

शुक्रवार को चालान पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीद है दो फरवरी को प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा शुरू हो जाएगा। मामले में जो भी दोषी हैं उन्हें अधिक से अधिक सजा दिलाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाएगी।

सुशील टेकरीवाल, अधिवक्ता, पीड़ित पक्ष

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