EXCLUSIVE: हरियाणा की मानेसर तहसील में करोड़ों रुपये का रजिस्ट्री घोटाला, मचा हड़कंप

गुरुग्राम, जेएनएन। गुड़गांव नगर निगम (Gugaon Municipal corporation) क्षेत्र के दायरे में आने वाली जमीन को क्षेत्र से बाहर दिखाकर रजिस्ट्री करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छह बिल्डरों ने तीन तहसीलदारों से लेकर क्लर्क एवं कंप्यूटर आपरेटरों के साथ मिलीभगत करके सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। इस बारे में आरटीआइ कार्यकर्ता ओमप्रकाश कटारिया की अर्जी पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके शर्मा की अदालत द्वारा शनिवार को जारी आदेश के बाद मानेसर थाना पुलिस ने रविवार शाम मामला दर्ज कर लिया।

शिकायत के मुताबिक मानेसर तहसील के गांव सीही को नगर निगम क्षेत्र के दायरे से बाहर दिखाकर वर्ष 2010 से 2013 के दौरान काफी संख्या में रजिस्ट्रियां की गईं जबकि वर्ष 2008 में ही गांव सीही नगर निगम के दायरे में आ गया था। नगर निगम क्षेत्र के दायरे में आने वाली जमीन की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप डयूटी सात प्रतिशत लगती है जबकि ग्रामीण क्षेत्र की जमीन पर पांच फीसद लगती है। इस तरह दो प्रतिशत का चूना मिलीभगत करके लगाया गया। उदाहरणस्वरूप फिलहाल आरटीआइ कार्यकर्ता ओमप्रकाश कटारिया ने आठ रजिस्ट्री की जानकारी अदालत को दी है। उसके मुताबिक 2,47,7,488 रुपये का चूना लगाया गया। उनका कहना है कि मामला दर्ज होने के बाद जितनी भी रजिस्ट्री मिलीभगत करके की गई हैं, उनकी सच्चाई सामने आ जाएगी।

ये हैं मामले में आरोपित

शिकायत के मुताबिक वर्ष 2010 से 2013 तक मानेसर तहसील में तहसीलदार के पद पर हरिओम अत्री, केएस ढाका एवं रणविजय तैनात थे। इनके अलावा क्लर्क एवं कंप्यूटर के पद पर अशोक, देवेंद्र, सुनीता, रॉबिन एवं सर्वजीत कार्यरत थे। जिन बिल्डरों के ऊपर मिलीभगत का आरोप लगाया है उनमें वाटिका लिमिटेड, मैराथन प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, एस्पो डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेंडेल डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, नार्थ स्टार अपार्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड के नाम शामिल हैं। मानेसर थाना प्रभारी को आरोपित इसलिए बनाया गया है कि उन्होंने शिकायत देने के बाद कार्रवाई नहीं की।

ओमप्रकाश कटारिया (आरटीआइ कार्यकर्ता) के मुताबिक, जब गांव सीही नगर निगम के दायरे में है फिर किस आधार पर रजिस्ट्री पांच प्रतिशत स्टांप डयूटी के हिसाब से की गई। बिल्डरों के मामले में ही क्यों ऐसा किया गया। आम लोगों से सात फीसद स्टांप डयूटी वसूली गई। साफ है बिल्डरों ने तहसीलदारों के साथ मिलीभगत करके सरकार के राजस्व को करोड़ रुपये का चूना लगाया है। सभी आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

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