नमो देव्यै, महादेव्यै: हर मुश्किल में कमजोरों के साथ खड़ी रहीं अलका

नमो देव्यै, महादेव्यै: हर मुश्किल में कमजोरों के साथ खड़ी रहीं अलका

सामाजिक सरोकारों के लिए प्रतिबद्धता दिखाने वाली एडवोकेट अलका ने कोरोना महामारी के दौर में भी अपने दायित्वों का बखूबी निर्वाह किया।

JagranMon, 12 Apr 2021 06:18 PM (IST)

प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम

सामाजिक सरोकारों के लिए प्रतिबद्धता दिखाने वाली एडवोकेट अलका ने कोरोना महामारी के दौर में भी अपने दायित्वों का बखूबी निर्वाह किया। मालिबू टाउन निवासी अलका ने कभी यह नहीं सोचा कि शहर में भी किसी भी व्यक्ति या वर्ग की समस्या उनकी नहीं हैं। उन्होंने हमेशा हर वर्ग की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उसका समाधान करने का हर संभव प्रयास किया। स्वयंसिद्धा, यह नाम है उस संस्था का जो अलका ने बनाया महिलाओं को सशक्त करने के लिए था, लेकिन वह इस संस्था के सहारे महिलाओं के साथ ही पुरुषों और कमजोर तबके के लोगों के उत्थान का कार्य करती हैं। कोरोना काल में स्वयंसिद्धा से जुड़ी महिलाओं, चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों की सहायता की। लोगों को पहुंचाया घर

लाकडाउन के बाद जिले में फंसे हुए कामगारों और बाहर के प्रदेशों से आए कर्मचारियों के लिए अलका मसीहा साबित हुईं। उन्होंने प्रशासन अपने सदस्यों की मदद से लोगों को घर भेजने की व्यवस्था की। ऐसे लगभग 25 परिवार थे जो कामगार वर्ग के थे और काम के अभाव में संसाधन विहीन हो गए थे। अलका ने कुछ समय तक उन्हें राशन और अन्य आवश्यक सामग्री मुहैया करवाई। बाद में उन्हें उनके घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की। कर रही हैं जागरूकता का संचार

कोरोना महामारी एक बार फिर पहले से अधिक भयावह रूप लेकर सामने आई है। ऐसे में अलका ने दोबारा कमर कस ली है और स्वयं जाकर हर वर्ग से उनकी जरूरतों के बारे में पूछती हैं। उन्होंने कोरोना कमेटी का गठन करके विशेषज्ञों और चिकित्सकों का एक समूह बनाया है, जिसके माध्यम से वे लोगों को जागरूक करती हैं। इसके अलावा वे नगर निगम के साथ मिलकर विभिन्न इलाकों में सैनिटाइजेशन भी करा रही हैं। इस समय उन परिवारों की सहायता भी कर रही हैं, जहां कोरोना मरीज हैं। उन्हें जरूरत की सामग्री से लेकर चिकित्सकीय सुविधा भी उपलब्ध करा रही हैं।

करती हैं काउंसलिग

कोरोना महामारी के पहले से भी कोरोना एक जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाती रही हैं। पेशे से एडवोकेट अलका कमजोर तबके के लोगों को कानूनी परामर्श देने के साथ, उनके लिए लड़ती भी हैं। वे कामगार वर्ग, गार्ड, ड्राइवर, घरेलू सहायकों और उनके बच्चों की मदद करती हैं और उन्हें नागरिक अधिकारों के प्रति भी जागरूक करती हैं।

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