लाइफस्टाइल: वक्त मिला है, क्यों न कपड़ों के बहाने थोड़ी जिदगी भी रफू कर ली जाए

लाइफस्टाइल: वक्त मिला है, क्यों न कपड़ों के बहाने थोड़ी जिदगी भी रफू कर ली जाए

आइए उस दौर में चलें जब कपड़े पुराने होने में वक्त लगता था। हर कोई इन्हें संभाल कर रखता था। अक्सर तब तक जब तक कि उनमें रफू की गुंजाइश खत्म न हो जाए। उस दौर में जब कपड़ों से केवल फैशन सेंस ही नहीं बल्कि जज्बात जुड़ जाया करते थे।

JagranMon, 19 Apr 2021 06:44 PM (IST)

प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम

आइए, उस दौर में चलें जब कपड़े पुराने होने में वक्त लगता था। हर कोई इन्हें संभाल कर रखता था। अक्सर तब तक, जब तक कि उनमें रफू की गुंजाइश खत्म न हो जाए। उस दौर में जब कपड़ों से केवल फैशन सेंस ही नहीं, बल्कि जज्बात जुड़ जाया करते थे। आज की तरह नहीं कि दो बार पहने, मन भर गया तो फेंक दिए। एक बार फिर वही दौर लौट रहा है, फिर वही सोच बन रही है और अपनी चीजों को लेकर फिर वही भावनाएं पनप रही हैं। बदले वक्त में घरों पर रहते हुए लोग कपड़े ही नहीं, उनके साथ-साथ जीवनशैली और अपनी आदतों को भी रफू कर रहे हैं। रफू होतीं आदतें

रफू का हुनर हर किसी में नहीं होता, हर कोई इसे उस खूबसूरती के साथ नहीं कर सकता, क्योंकि इसमें हाथों की जादूगरी के साथ-साथ रचनात्मक सोच की भी जरूरत होती है। बदला वक्त अब लोगों की इसी रचनात्मक सोच को उभार रहा है। लोग फिर से हाथों में सुई-धागा पकड़ फैशन के साथ कदमताल करते हुए स्टाइल को नए आयाम दे रहे हैं। फैशन के क्षेत्र में यह बदलाव लोगों को न केवल नकारात्मक विचारों से दूर कर रहा है बल्कि उन्हें अपने जीवन के पहलुओं से जुड़ने का मौका भी दे रहा है, जिसकी परिणति सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति और आत्मसंतुष्टि में हो रही है। रचनात्मक समूहों से मिलती प्रेरणा

जड़ों की तरफ लौटना शायद इसी को कहते हैं। इन दिनों इस तरह की गतिविधियां दशकों के उस ²श्य को प्रस्तुत करती जान पड़ती हैं, जहां उंगलियां फोन की जगह सुइयों-सलाइयों, कपड़ों और कैंचियों पर होती थीं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य साइटों पर अब कशीदाकारी, पैचवर्क, पेंटिग और परिधान रीडिजाइनिग के तरह-तरह के वीडियो आम हो रहे हैं। लोग इनका अनुसरण कर रहे हैं और इनसे सीखकर स्वयं अपने परिधानों को खूबसूरत और नया लुक दे रहे हैं। खुद बन रहे हैं डिजाइनर

लोग अपने कुछ समय पुराने कपड़ों को लेकर उनके खूबसूरत हिस्सों के पैच निकालकर दूसरे परिधानों पर सजा रहे हैं। फैशन डिजाइनर सोनल माहेश्वरी का कहना है कि अधिकतर लोग इस पर सलाह ले रहे हैं और ट्रेंडी कपड़ों को आरामदायक परिधानों में बदल रहे हैं। लोअर व ट्राउजर में सुंदर पैच लगाकर बेहतरीन शा‌र्ट्स बनाए जा रहे हैं, क्राप टाप और पारंपरिक कशीदाकारी को आधुनिक परिधानों पर सजा रही हैं। अपनी चीजों से लोगों की भावनाएं भी जुड़ रही हैं। अब वक्त के साथ लोगों की सोच, उनका अंदाज और उनका पहनावा बदल रहा है। लोग अपने डिजाइंस में खुद शामिल होना चाहते हैं। ऐसे में फैशन अब केवल सुंदरता और स्टाइल की परिधियों को तोड़ भावनात्मक और रचनात्मक स्तर तक पहुंच रहा है।

- गौरव मनचंदा, डिजाइनर, स्टाइल आफ फैशन पूरी जीवनशैली बदल गई है, इसका प्रभाव फैशन पर आना ही था। अब लोग फिर से कपड़ों के रीफर्बिशिग, रीस्टाइलिग और रीकंस्ट्रक्शन से जुड़ रहे हैं। लोगों के वक्त और ऊर्जा का सदुपयोग हो रहा है। इस समय लोग घर पर रहते हुए आरामदायक, लेकिन स्टाइल परिधान चाहते हैं।

- रिपी, फैशन डिजाइनर, जीवा फैशन कुटियोर

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