तनाव से खत्म हो रही अनमोल जिदगी

तनाव से खत्म हो रही अनमोल जिदगी

तनाव से अनमोल जिदगियां खत्म हो रही हैं। मां की ममता के ऊपर भी तनाव भारी पड़ने लगा है। नूंह इलाके में अपने ही हाथों से एक मां द्वारा बच्चों की कत्ल करने की बात सामने आना यही दर्शाता है।

Publish Date:Fri, 27 Nov 2020 08:16 PM (IST) Author: Jagran

आदित्य राज, गुरुग्राम

तनाव से अनमोल जिदगियां खत्म हो रही हैं। मां की ममता के ऊपर भी तनाव भारी पड़ने लगा है। नूंह इलाके में अपने ही हाथों से एक मां द्वारा बच्चों की कत्ल करने की बात सामने आना यही दर्शाता है। इस घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। बताया जाता है बेटा नहीं होने की वजह से महिला तनाव में थी। कुछ महीने पहले नारनौल में इसी तरह की वारदात सामने आई थी। एक व्यक्ति ने अपने तीन मासूम बच्चों के साथ ही पत्नी की भी हत्या कर दी थी। इससे पहले गुरुग्राम में पिछले साल सन फार्मा कंपनी में रिसर्च साइंटिस्ट सहित कई पदों पर कार्यरत रहे डा. श्रीप्रकाश सिंह ने अपनी बेटी, बेटा व पत्नी की हत्या करने के बाद खुद भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली थी। बताया जाता है कि साइंटिस्ट कुछ महीनों से बेरोजगार थे। इसी तनाव में उन्होंने अपने पूरे परिवार को ही समाप्त कर दिया।

इन घटनाओं पर द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा. भूप सिंह कहते हैं कि समाज व परिवार की संरचना समाप्त होती जा रही है। अब पारिवारिक व सामाजिक ताना-बाना का आधार आर्थिक हो गया है। आज सही मायने में उसी को लोग अधिक सम्मान देते हैं जो अधिक पैसा खर्च करता है। पहले ऐसा नहीं था। समाज में हर व्यक्ति का सम्मान था। परिवार में जो सबसे कमजोर होता था, उसका सबसे अधिक ध्यान रखा जाता था। यदि किसी को केवल बेटियां रहती थीं तो उसकी पढ़ाई से लेकर शादी तक का खर्च परिवार के सभी लोग मिलकर उठाते थे। परिवार का ताना-बाना बिगड़ने से हर कोई अपने आपको अकेला महसूस कर रहा है। कोई किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है।

यदि किसी को केवल बेटियां हैं तो उसे कोई यह कहने वाला नहीं कि बेटा व बेटी में कोई फर्क नहीं। इससे तनाव बढ़ रहा है। तनाव इतना बढ़ जाता है कि जिस बच्चे के शरीर पर खरोंच भी माता-पिता बर्दाश्त नहीं कर सकते, उसकी हत्या तक कर डालते हैं। यह काफी गंभीर विषय है। परिवार में बुजुर्ग धरोहर की तरह होते थे, आज अधिकतर लोग बोझ समझने लगे हैं। उनकी बात की कद्र नहीं। ऐसे में वे किसी को सुझाव देने से हिचकते हैं।

तनाव को खत्म करना है तो भावनात्मक लगाव के ऊपर जोर देना होगा। लोग एक-दूसरे की परेशानी को समझें न कि उसका मजाक उड़ाएं। मजाक उड़ाए जाने के डर से ही लोग अपनी परेशानी दूसरों को नहीं बताते हैं। पहले बड़ी से बड़ी परेशानी किसी से भी लोग शेयर कर लेते थे। अब विश्वास नहीं रहा। इस विश्वास को फिर से बढ़ाना होगा।

हर महीने 40 से 50 आत्महत्या

पूरी दुनिया में साइबर सिटी की पहचान है। इसे प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। सच्चाई यह है कि अधिकतर लोग तनाव से ग्रस्त हैं। इसी तनाव में वे अपनी जिदगी समाप्त कर रहे हैं। हर महीने 40 से 50 लोग आत्महत्या के मामले सामने आते हैं। पति-पत्नी के बीच विश्वास की कमी भी तनाव के पीछे एक कारण है। पत्नी यदि किसी से बात करती है तो पति उसके ऊपर शक करना शुरू कर देता है। इससे परिवार में विवाद शुरू होता है। नौकरी जाने की वजह से, उधार न चुकाने की वजह से लोग आत्महत्या कर रहे हैं। बृहस्पतिवार शाम ही मानेसर इलाके में एक युवक ने उधार न चुका पाने की वजह से अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

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