राहगीरों के लिए सुरक्षित नहीं हैं साइबर सिटी की सड़कें

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी कई जगह जरूरत के हिसाब से अंडरपास फुट ओवरब्रिज एवं फ्लाईओवर नहीं है। इन सभी कारणों से प्रतिदिन शहर व आसपास दो से तीन हादसे हो रहे हैं। इस साल 240 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

JagranFri, 22 Oct 2021 03:15 PM (IST)
राहगीरों के लिए सुरक्षित नहीं हैं साइबर सिटी की सड़कें

आदित्य राज, गुरुग्राम

जिले में राहगीरों के लिए सड़कें सुरक्षित नहीं हैं। एक भी सड़क के किनारे फुटपाथ नहीं है। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी कई जगह जरूरत के हिसाब से अंडरपास, फुट ओवरब्रिज एवं फ्लाईओवर नहीं है। इन सभी कारणों से प्रतिदिन शहर व आसपास दो से तीन हादसे हो रहे हैं। इस साल अब तक जहां सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं वहीं 240 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। काफी लोगों की मौत बुनियादी सुविधाओं के अभाव में हुई है।

नियमानुसार पैदल लोगों के लिए सड़कों के किनारे फुटपाथ की सुविधा होनी चाहिए। चौराहों के नजदीक जेब्रा क्रासिग होनी चाहिए। हाईवे या किसी सड़क पर जहां से लोग एक तरफ से दूसरी तरफ जाते हैं वहां पर अंडरपास, फुट ओवरब्रिज या फ्लाईओवर की सुविधा होनी चाहिए। इनके ऊपर जितनी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, नहीं दिया जा रहा है। उदाहरणस्वरूप दिल्ली-जयपुर हाईवे के निर्माण के साथ ही सिरहौल बार्डर पर यू-टर्न अंडरपास का निर्माण होना चाहिए।

ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर होने के साथ ही हाईवे पार करने के दौरान कई लोगों की मौत के बाद यू-टर्न अंडरपास का निर्माण शुरू किया गया है। मानेसर में फ्लाईओवर, पचगांव चौक पर अंडरपास या फ्लाईओवर एवं बिलासपुर में फ्लाईओवर का निर्माण न होने से लोग हाईवे क्रास करने को मजबूर हैं। अक्सर इन स्थानों पर हादसे होते रहते हैं। कई जगह फ्लाईओवर उस जगह पर नहीं बनाए गए जहां से लोग हाईवे क्रास करते हैं।

फुटपाथ बनाने की योजना कागजों में ही

प्रशासन की ओर से कई बार सड़कों के किनारे फुटपाथ बनाने की बात की जा चुकी है लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं। जहां कहीं भी फुटपाथ है वह भी अतिक्रमण का शिकार। इस वजह से सड़कों पर चलने के लिए लोग मजबूर हैं। रेलवे रोड पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। कुछ दिन पहले ही एक बुजुर्ग महिला की मौत एक वाहन की चपेट में आने से हो चुकी है। जिले में 20 से अधिक ब्लैक स्पाट

जिले में 20 से अधिक ब्लैक स्पाट हैं। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर गुरुग्राम इलाके में सिरहौल बार्डर, एटलस चौक, इफको चौक, सेक्टर-31 के सामने, झाड़सा चौक, राजीव चौक से पहले मेदांता अस्पताल मोड़, राजीव चौक, ईदगाह के सामने, हीरो होंडा चौक, नरसिंहपुर गांव के सामने, खेड़कीदौला टोल प्लाजा, शिकोहपुर मोड़, मानेसर बाजार, मानेसर घाटी, पचगांव चौक, बिलासपुर चौक पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। एमजी रोड पर सहारा माल के सामने अक्सर हादसे होते हैं। गुरुग्राम-सोहना रोड पर वाटिका चौक, बादशाहपुर बाजार, गांव भोंडसी के सामने एवं अलीपुर मोड़ के नजदीक हादसे होते रहते हैं। इन सभी स्थानों पर ढांचागत सुविधाएं विकसित करने के साथ ही पुलिस की सक्रियता बढ़ाने की आवश्कयता है।

जहां भी फुटपाथ पर अतिक्रमण है, उसे हटाने पर जोर देना चाहिए। जहां तक हाईवे पर बुनियादी सुविधाओं का सवाल है तो योजनाएं बन गई हैं। उनके ऊपर जल्द ही काम शुरू होने वाला है। बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर होने के बाद लोग हाईवे क्रास नहीं करेंगे। इससे हादसे काफी हद तक कम हो जाएंगे। लोगों से अपील है कि कुछ दूरी पर ही यदि फुट ओवरब्रिज है उसका इस्तेमाल करें।

-संजीव बल्हारा, सहायक पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक, मुख्यालय), गुरुग्राम

बीते कुछ सालों के दौरान हादसे

वर्ष हादसे मौत

2017 1214 481

2018 1075 442

2019 1205 433

2020 1204 375

(सैकड़ों लोग हर साल घायल भी होते हैं)

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