डेंगू का समय पर इलाज व बचाव गंभीर नहीं होने देता बीमारी : डा. नवीन

अब डेंगू से कोरोना व स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सजग रहना होगा। जिला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ फिजिशियन डा. नवीन कुमार की दैनिक जागरण के अनिल भारद्वाज के साथ खास बातचीत के मुख्य

JagranSun, 17 Oct 2021 06:10 PM (IST)
डेंगू का समय पर इलाज व बचाव गंभीर नहीं होने देता बीमारी : डा. नवीन

डेंगू मरीजों की संख्या डेढ़ सौ पार हो चुकी है। वायरल- बुखार से ग्रस्त मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल में जनरल वार्ड मरीजों की संख्या अधिक है। अब आने वाले सर्दी के मौसम में स्वाइन फ्लू संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। डाक्टरों का कहना है कि बीमारियां मौसम के हिसाब से आती-जाती रहती है, लेकिन सजगता से बचाव जरूरी है। अब डेंगू से कोरोना व स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सजग रहना होगा। जिला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ फिजिशियन डा. नवीन कुमार की दैनिक जागरण के अनिल भारद्वाज के साथ खास बातचीत के मुख्य : डेंगू मरीज बढ़ रहे हैं और वायरल- बुखार से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डेंगू का खतरा कब तक रहेगा?

- यह नहीं कहा जा सकता कि डेंगू का खतरा कब तक रहेगा। अगर इसका प्रकोप कम करना है तो डेंगू मच्छरों को पैदा होने से रोकना होगा। लोगों को कम से कम अपने घरों में ध्यान देना होगा। अभी मौसम को देखते हुए कहा जा सकता है कि डेंगू ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ेगी। क्योंकि जब सर्दी तेज होगी, तभी डेंगू मच्छरों का प्रकोप कम होगा। एक बार डेंगू मच्छर पैदा हो गया तो बढ़ता जाएगा। इस लिए पहले ही सावधानी रखे। . डेंगूग्रस्त मरीज बढ़ रहे हैं लेकिन मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं हो रही। यह कैसा डेंगू है।

- डेंगू बीमारी कोई अलग नहीं है। फर्क यह है कि इस बार लोगों में बीमारी को लेकर सजगता है। समय पर इलाज ले रहे हैं। यही कारण है कि मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी बीमारी का समय पर इलाज लेने के यही फायदा होता है कि बीमारी गंभीर नहीं हो पाती। मरीज को जैसे ही बुखार होता है वह स्वयं दवा खरीद कर खाने के बजाए डाक्टर से दवा ले रहा है। . क्या प्लेटलेट्स कम होना डेंगू ग्रस्त होने की निशानी है?

- देखिए, यह समझना होगा कि सामान्य बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने को डेंगू न समझें। अगर कोई मरीज बीमार है तो उसे डाक्टर के पास दिखाएं। डाक्टर तय करेंगे कि मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत है या नहीं। किसी भी मरीज को 20 से 25 हजार संख्या प्लेटलेट्स होने पर चढ़ाने की जरूरत होती है, इससे पहले नहीं। अगर मरीज को बुखार में 60-70 हजार तक प्लेटलेट्स संख्या पहुंच गई है तो यह जरूरी नहीं है कि यह डेंगू है। . वायरल - बुखार तेजी से बढ़ रहा है। इसका क्या कारण है।

- यह मौसम के बदलाव के कारण हुआ है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की सर्दी है। अगर ऐसी में सो रहे हैं और आइसक्रीम खा रहे हैं तो बुखार को न्योता दे रहे हैं। सर्द-गर्म के बीमार अधिक हो रहे हैं। यह खतरा तब तक रहेगा, जब तक अधिक सर्दी नहीं हो जाती है। लोग जबतक ठंडा खाना नहीं छोड़ते हैं जब तक अधिक सर्दी नहीं हो जाती है। . क्या अब भी कोरोना की तीसरी लहर का खतरा है।

- यह नहीं कह सकते कि खतरा नहीं है। अभी नियंत्रण है लेकिन बीमारी कभी भी वापसी कर सकती है। इसके लिए सावधान रहना होगा। इसका बचाव करने के लिए वही नियम है जो पहले भी बताए गए हैं। दो गज की शारीरिक दूरी बनाए रखे और मास्क लगाए। इससे स्वयं का बचाव होगा। अगर बुखार होता है तो डाक्टर को जरूरत दिखाएं। सावधान रहने से तीसरी लहर को कमजोर किया जा सकता है। सभी लोग कोरोनारोधी टीका जरूर लगवा लें। इससे बचाव में बहुत लाभ मिलेगा। अगर कोई टीका लगवाने के बाद भी कोरोना ग्रस्त होता है तो उसे कोरोना गंभीर बीमार नहीं कर पाएगा। . क्या कोरोनारोधी टीका लगवाने से कोरोना संक्रमण नहीं होगा।

- यह किसने कहा है कि कोरोनारोधी टीका लगवाने से कोरोना संक्रमण नहीं होगा। हां, संक्रमण होने का खतरा कम रहेगा। अगर संक्रमण हो भी गया, तो मरीज गंभीर बीमार नहीं होगा। जिसने टीका लगवाया है अगर उसे कोरोना संक्रमण हो गया है तो मरीज गंभीर बीमार नहीं होगा और उसकी जान का खतरा नहीं होगा। कोरोनारोधी टीका लगवाने के बाद यह न सोचें कि अब मास्क लगाने की आवश्यकता नहीं है। टीका लगवाने के बाद भी बचाव पर ध्यान देना होगा। . इस बार स्वाइन फ्लू का कितना खतरा है।

- स्वाइन फ्लू का खतरा कितना है यह नहीं कहा जा सकता। मौसमी बीमारी है और उसका खतरा रहेगा। लोगों को बुखार या जुकाम होता है तो लोगों में कोरोना व स्वाइन फ्लू का डर रहता है लेकिन हर बुखार स्वाइन फ्लू नहीं है और बुखार होने पर डाक्टर को दिखाएं। डाक्टर को तय करने दे कि मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण है या नहीं। अगर समय पर दवा मिलेगी, तो मरीज के लिए खतरा कम होगा। . क्या सावधानी की जाए, जिससे स्वाइन फ्लू से बचाव किया जा सके।

- स्वाइन फ्लू वायरस से संक्रमण व्यक्ति का खांसना और छींकना या ऐसे उपकरणों का स्पर्श करना जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, तो वो दूसरे का संक्रमित कर सकता है। जो संक्रमित नहीं है वो भी दरवाजा के हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर या टायलेट के नल के स्पर्श के बाद स्वयं की नाक पर हाथ लगाने भर से संक्रमित हो सकते हैं। सामान्य एन्फ्लूएंजा के दौरान रखी जाने वाली सभी सावधानियां इस वायरस के संक्रमण के दौरान भी रखी जानी चाहिए। जैसे बार-बार अपने हाथों को साबुन से धोना जरूरी होता है जो वायरस का खात्मा कर देते हैं। नाक और मुंह पर हमेशा मास्क पहन कर रखना। . अगर मरीज को स्वाइन फ्लू का डर है तो वो क्या करे।

- डाक्टर के पास जाएंगे, तो डाक्टर स्वयं तय करेगा कि मरीज को स्वाइन फ्लू है या नहीं। कोई भी मरीज स्वयं दवा न खाए। मरीज में अगर स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं तो भी मरीज को डॉ. की सलाह पर ही टैमी फ्लू दवा का सेवन करना चाहिए। अगर किसी भी मरीज ने एक बार टैमी फ्लू टेबलेट खा ली और जब स्वाइन फ्लू होगा, तो टैमी फ्लू काम नहीं असर नहीं करेगी। . मरीज जुकाम व स्वाइन फ्लू में कैसे अंतर पहचानें।

-सर्दी-जुकाम के समय पहले गले में खराश पैदा होती है और जलन होती है। नाक बंद हो जाती है या बहने लगती है। रोगी को बार-बार छींकने लगता है। हलका बुखार भी आ जाता है। सामान्य लोगों में आमतौर पर सात दिनों के बाद जुकाम दूर हो जाता है और यह स्वाइन फ्लू नहीं है। इसमें पहचान के लिए गला खराब होना, जुकाम होना, नार्मल कोल्ड होना, आंखों में दर्द व पानी आना, सिर दर्द करना, खांसी होना, मांसपेशियों में दर्द होना,आंखे लाल होना, जी मचलाना जैसे लक्षण स्वाइन फ्लू की तरफ इशारा करते हैं। . मरीजों की संख्या अधिक है। ओपीडी में छह घंटे में तीन सौ अधिक मरीजों को इलाज देता है। क्या ऐसे में बेहतर इलाज संभव है।

- यह सही है कि मरीज की बीमारी को जानने के लिए समय चाहिए लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होती है तो हम उस से बीमारी और परेशानी पूछ लेते हैं उसी हिसाब से रक्त जांच कराते हैं या दवा लिखते हैं। सभी मरीजों को इलाज देना होता है। आप कह सकते हैं कि डाक्टर के लिए हर रोज का यह काम होता है तो उसे बीमारियों को लेकर इतना अनुभव हो गया है कि मरीज के बताने पर तुरंत समझ जाते हैं कि मरीज को क्या हुआ है। मरीज कह स्थिति गंभीर लगती है तो उसे भर्ती कर लिया जाता है। परिचय:

.जन्म : 7 फरवरी 1980

.पिता का नाम : दिलबाग सिंह

.माता का नाम : सावित्री देवी

जन्म स्थान. गांव : पपोसा, जिला : भिवानी

.एमबीबीएस डिग्री 2002 में पीजीआइ रोहतक से हासिल की

.हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस ज्वाइनिग वर्ष 2004 में

.एमडी डिग्री 2013 पीजीआइ रोहतक

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