फर्ज के जुनून में खुद से पहले मरीजों के स्वास्थ्य की चिता

फर्ज के जुनून में खुद से पहले मरीजों के स्वास्थ्य की चिता

इन दिनों स्वास्थ्य विभाग व प्राइवेट अस्पतालों में स्टाफ नर्स चौबीस घंटे कोरोना मरीजों की देखभाल कर रही हैं। उन्हें पता है कि छोटी से लापरवाही भी मौत का कारण बन सकती है फिर भी स्टाफ नर्स अपनी ड्यूटी के फर्ज से पीछे नहीं हट रही हैं।

JagranTue, 11 May 2021 04:53 PM (IST)

अनिल भारद्वाज, गुरुग्राम

कोरोना महामारी की दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं और मरने वालों की संख्या भी अधिक है। कोरोना का डर इतना फैला हुआ है कि मरने वाले की अंतिम यात्रा में रिश्तेदार व पड़ोसी तक शामिल होने में डर रहे हैं। ऐसे डर के माहौल में हमारे बीच कोई है जो 24 घंटे कोरोना मरीजों के इलाज में लगी रहती हैं। इन दिनों स्वास्थ्य विभाग व प्राइवेट अस्पतालों में स्टाफ नर्स चौबीस घंटे कोरोना मरीजों की देखभाल कर रही हैं। उन्हें पता है कि छोटी से लापरवाही भी मौत का कारण बन सकती है फिर भी स्टाफ नर्स अपनी ड्यूटी के फर्ज से पीछे नहीं हट रही हैं। ड्यूटी के फर्ज में डर याद नहीं रहता। जब मरीजों के बीच पहुंचते हैं तो फिर मरीजों का दुख-दर्द याद रहता है। कुछ मरीज ऐसे रहे हैं कि उनके परिवार के एक-दो सदस्य की मौत हो चुकी है और अब वह भी कोरोना संक्रमित हैं। उनकी देखभाल करने में कोरोना का खतरा भूल जाते हैं। हम नहीं उनकी सेवा करेंगे तो फिर कौन करेगा?

शुभ लता, स्टाफ नर्स फर्ज के आगे सबसे कुछ पीछे छूट जाता है। कई बार सोच कर डर लगता है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ आइसोलेशन वार्ड में कई घंटे हर रोज ड्यूटी देनी है। घर पर बच्चों से भी मिलना होता है वहीं परिवार के स्वास्थ्य की चिता होती है। लेकिन फिर सोचते हैं कि इस महामारी में हम नहीं तो कौन इलाज देगा।

सरोज, स्टाफ नर्स हमें मरीजों की सेवाभाव पहले सिखाया जाता है। महामारी के संकट में जितने लोगों को इलाज दे पाए उतना कम है। हमें खुशी होती है जब हमारे वार्ड से मरीज स्वस्थ होकर घर लौटता है। कई बार बहुत दुखी होते हैं जब मरीज का शव वार्ड से निकलता है। हमारा प्रयास रहता है कि किसी मरीज को कोई तकलीफ न हो।

जपिदर, स्टाफ नर्स इस महामारी में आसान नहीं है ड्यूटी करना। कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहता है और मरीज की आक्सीजन का कुछ-कुछ देर में ध्यान रखना होता है। खुशी तब मिलती है जब मरीज स्वस्थ होकर घर जाता है। दुख तब बहुत होता है जब मरीज को कई दिन इलाज करने के बाद भी बचा नहीं पाते।

जया रानी, स्टाफ नर्स हर मरीज स्वस्थ होकर जाए यह हमारा प्रयास और भगवान से प्रार्थना रहती है। दुख तो तब होता है जब मरीज का 10-12 दिन इलाज करने के बाद निधन हो जाता है। इस संकट में लोगों की जितनी सहायता हो पाए, यही सोचकर काम कर रहे हैं। मानवता पर आया यह संकट कब जाएगा, अब इसी का इंतजार है।

सरोज चोपड़ा, स्टाफ नर्स कोरोना संक्रमण से सभी बचते घूम रहे हैं, लेकिन हमारी ड्यूटी तो उन मरीजों के साथ है जो कोरोना संक्रमित हैं। हम कोरोना संक्रमण होने के बारे में नहीं सोचते, हम तो मरीजों के स्वस्थ होने की सोचते हैं। क्योंकि हर मरीज दुख में है और ऐसे में उनका स्वस्थ होना परिवार के लिए बहुत जरूरी है।

रीतू मलिक, स्टाफ नर्स

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