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गारमेंट एक्सपोर्टरों पर हर तरफ से पड़ रही है मार

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: उद्योग विहार जिले का सबसे बड़ा गारमेंट मैन्यूफैक्चरिग हब है। यहां स्थित गारमेंट एक्सपोर्ट करने वाली फैक्टरियों को लगातार कामगारों की कमी से जूझना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन कार्य लगातार प्रभावित चल रहा है। इस असर यह हो रहा है कि विदेश से मिले ऑर्डर एक के बाद एक रद होने लगे हैं। यदि दिल्ली सीमा पर सख्ती को जल्द से जल्द नहीं हटाया जाता है तो इस क्षेत्र का बहुत अधिक नुकसान हो जाएगा। उद्यमियों का कहना है कि यदि अर्थव्यवस्था को गति देनी है तो दिल्ली-एनसीआर के बीच के आवागमन को जल्द से जल्द से जल्द सुचारु करना होगा।

गारमेंट एक्सपोर्टरों का कहना है कि उन पर चौतरफा मार पड़ रही है। विदेश में उन्होंने जो क्लाइंट बनाए थे उनके भी टूटने की आशंका बढ़ गई है। जिसका फायदा गारमेंट क्षेत्र में भारत के कारोबारी प्रतिद्वंदी देशों द्वारा उठाया जाएगा। जो भी ऑर्डर अभी तक उनके पास हैं यदि उनकी डिलीवरी समय पर नहीं दी गई तो बॉयर्स की नजर में एक्सपोर्टरों की साख गिरेगी। जिसका नुकसान भविष्य के कारोबार पर भी पड़ेगा। उद्यमी ईश्वर सिंह का कहना है उद्योग विहार की सभी औद्योगिक इकाइयों का हाल बेहाल है। उद्योग विहार स्थित फैक्टरियों में काम करने वाले 80 फीसद से अधिक कर्मचारी जो गुरुग्राम सीमा से सटे दिल्ली के क्षेत्र में रहते हैं वह काम पर नहीं आ पा रहे हैं। इससे उद्योगों की हालत काफी खराब हो गई है। उनका कहना है कि यह पता नहीं चल रहा है कि सरकार इंडस्ट्री की बेहतरी चाहती है या उन्हें बंद कराना।

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उद्योग विहार इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फैक्टरियों में कामगारों को लेकर बड़ी दिक्कत हो गई है। सबसे अधिक परेशानी गारमेंट एक्सपोर्टरों को हो रही है। दिल्ली सीमा पर सख्ती के कारण गारमेंट एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है।

संजय केडिया, एमडी, शिव एक्सपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के शहरों के बीच आवागमन पर सख्ती समझ से परे है। इस मामले में सरकार को फिर से विचार करना चाहिए। दिल्ली में रहने वाले और गुरुग्राम में काम करने वाले कामगारों के फैक्टरियों में नहीं पहुंच पाने से उद्योगों का भारी नुकसान हो रहा है।

प्रवीण यादव, अध्यक्ष, गुड़गांव उद्योग एसोसिएशन

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