हेलीमंडी का नाम बदले जाने की मांग हुई तेज

संवाद सहयोगी, हेलीमंडी: हेलीमंडी का नाम जाटौली मंडी रखने की मांग तेज होने लगी है। मांग करने वाले प्रमुख लोगों ने बुधवार को मीडिया के सामने तर्क दिए कि उनकी मांग क्यों जायज है। समाज कल्याण समिति जाटौली-हेलीमंडी-टोड़ापुर के अध्यक्ष राज ¨सह एवं नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ¨सह ने कहा कि जाटौली एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक गांव रहा है। अंग्रेजों के राज में पंजाब के गर्वनर सर विलियम मैल्कोल्म हेली ने जाटौली की 37 एकड़ भूमि पर आनजमंडी की स्थापना की थी तथा उनके नाम से अनाजमंडी हेलीमंडी के नाम से जानी जाने लगी थी। बाद में नगरपालिका बनने पर इसका नाम हेलीमंडी रख दिया गया जबकि जिस क्षेत्र पर जाटौली, हेलीमंडी अनाजमंडी एवं टोड़ापुर क्षेत्र बसे हैं वे सभी जाटौली पंचायत की भूमि में ही बसे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि हेली संयुक्त पंजाब के 1928 से 1932 तक गर्वनर रहे। उनके कार्यकाल में ही साइमन कमीशन का विरोध करने पर लाजपत राय पर लाठी चार्ज किया गया एवं वे शहीद हो गए। उन्हीं के कार्यकाल में शहीद भगत ¨सह, राजगुरु एवं सुखदेव को फांसी हुई। लाल लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए क्रांतिकारी महिला दुर्गा भाभी ने तो 9 अक्टूबर 1930 को हेली पर गोली चला दी थी परंतु हेली बच गए थे उनके साथ अंग्रेज अफसर टेलर घायल हुए थे। ऐसे व्यक्ति के नाम पर हेलीमंडी रखना शहीदों का अपमान है। लोगों ने कहा जहां जहां भी आनाज मंडी बनाई गई हैं, वहां वे उन नगरों अथवा गांवों के नाम से ही बनाई गई हैं जैसे अटेली मंडी, कनीना मंडी आदि। परंतु जाटौली की मंडी का नाम उसके नाम पर न रखकर हेली के नाम पर रखा गया। वैसे भी रेवेन्यू रिकॉर्ड में तो आज भी सारी भूमि जाटौली के नाम से ही है। इस अवसर पर उनके साथ कप्तान जनक ¨सह तथा अजयपाल साथ थे।

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