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क्राइम फाइल: आदित्य राज

गरीब हूं इसलिए पुलिस डंडा मारती है

कुछ पुलिस वाले चेहरा देखकर बात करते हैं या फिर डंडा चलाते हैं। कापसहेड़ा बॉर्डर पर लगाए गए नाके पर कुछ ऐसा ही दिखता है। एक व्यक्ति बॉर्डर पर खड़ा था। वह घूमने आया होगा या फिर दिल्ली जाना चाहता था। एक खाकी वाले ने उसके ऊपर एकदम डंडा बरसाना शुरू कर दिया। जब आसपास खड़े लोगों ने वीडियो बनाने का प्रयास किया तो खाकी वाले ने डंडा चलाना बंद किया। रोते हुए वह व्यक्ति डूंडाहेड़ा की तरफ चल दिया। वह बोलता जा रहा था कि गरीब हूं, इसलिए पुलिस डंडा मारती है। कार वालों से आराम से पूछताछ करती है। बताया जाता है कि यह मामला इलाके के सहायक पुलिस आयुक्त बिरम सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने पुलिसकर्मियों को संदेश दिया कि किसी के ऊपर डंडा नहीं चलाना है। सभी मजबूर हैं। उन्हें प्यार से समझाने का प्रयास करो। इसके बाद से पुलिसकर्मी डंडा नहीं चला रहे हैं। कोरोना का नाम सुनते ही खिसक लिए

वैश्विक महामारी कोरोना ने अपनों को अपनों से दूर कर दिया है। न रिश्तेदार मिलना पसंद करते हैं, और न ही नजदीकी परिवार वाले। कोरोना संकट से पहले अगर किसी की मौत हो जाती थी तो परिजन ही नहीं रिश्तेदार से लेकर जानकार तक पोस्टमार्टम हाउस पहुंच जाते थे। अब गिनती के लोग आते हैं। उसमें भी जैसे ही पता चलता है कि जिसकी मौत हुई है उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है, सभी निकल जाते हैं। पिछले सप्ताह एक शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पोस्टमार्टम हाउस में काफी लोग पहुंचे थे। जैसे ही मेडिकल ऑफिसर डॉ. पवन चौधरी के मुंह से यह निकला कि रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है। कुछ ही देर में अधिकांश लोग वहां से खिसक गए। सभी इस बात से चितित हो गए कि सभी को अब टेस्टिंग करानी होगी। महामारी ने लोगों को इतना भयभीत कर दिया है कि नाम सुनते ही होश उड़ जाते हैं। सोशल मीडिया से पुलिस परेशान

सोशल मीडिया पर लोगों की सक्रियता से पुलिस की परेशानी बढ़ती जा रही है। लोग आपस में सोशल मीडिया पर बहस करते हैं। यही बहस धीरे-धीरे लड़ाई का कारण बन रही है। लड़ाई होते ही सभी न केवल मैसेज डिलीट कर लेते हैं, बल्कि एकाउंट तक बंद कर लेते हैं। इस वजह से पुलिस को किसी मामले की तह तक पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है। कुछ दिन पहले बिलासपुर थाने के एक गांव में युवकों के दो ग्रुप में सोशल मीडिया पर कुछ मैसेज डालने के बाद खूनी संघर्ष हुआ था। सोशल मीडिया पर क्या मैसेज डाले गए थे, इसका पता ही नहीं चल पाया। इसी तरह डीएलएफ इलाके में एक छात्र ने सोशल मीडिया पर एक छात्रा की पोस्ट को देखने के बाद आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के बाद छात्रा ने अपना एकाउंट ही बंद कर लिया। सोशल मीडिया कंपनी से जानकारी आते-आते काफी समय लग जाता है। कोरोना से उम्मीदों पर पानी फिरा

वैश्विक महामारी कोरोना ने जहां जिला बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ने के इच्छुक अधिवक्ताओं के मंसूबे पर पानी फेर दिया वहीं वर्तमान कमेटी का कार्यकाल बिना किसी प्रयास के बढ़ा दिया। चर्चा है कि अब इस साल चुनाव संभव नहीं। इस चर्चा ने चुनाव लड़ने के इच्छुक अधिवक्ताओं को निराश कर दिया है। जब तक चुनाव होने की आशा थी, तब तक अधिकांश एक-दूसरे का हालचाल पूछ रहे थे। अब कई-कई दिन हो जाते हैं, लेकिन हालचाल लेने फोन नहीं आता। मौजूदा कमेटी का कार्यकाल मार्च में ही पूरा हो गया था। एक बार एसोसिएशन का कार्यकाल एक के बजाय दो वर्ष करने का हरसंभव प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। कोरोना संकट ने बिना प्रयास के ही कार्यकाल बढ़ा दिया। एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष मीर सिंह यादव का मानना है कि फिलहाल कुछ महीनों तक चुनाव संभव नहीं है, क्योंकि कोरोना जल्द जाने वाला नहीं।

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