जीना इसी का नाम है: कोरोना संक्रमित होने पर सकारात्मकता ही सबसे बड़ा हथियार

जीना इसी का नाम है: कोरोना संक्रमित होने पर सकारात्मकता ही सबसे बड़ा हथियार

कोरोना संक्रमित होने पर घबराने की नहीं बल्कि हौसला और संयम रखने की जरूरत है। संक्रमित होने के बाद पूरी तरह सकारात्मक रहें। इससे बढ़कर कोई दवा नहीं है। बीमारी घातक है।

JagranFri, 23 Apr 2021 07:11 PM (IST)

संवाद सहयोगी, बादशाहपुर: कोरोना संक्रमित होने पर घबराने की नहीं बल्कि हौसला और संयम रखने की जरूरत है। संक्रमित होने के बाद पूरी तरह सकारात्मक रहें। इससे बढ़कर कोई दवा नहीं है। बीमारी घातक है, पर इसकी चपेट में आने पर संयम रखा जाए तो जल्द काबू पाया जा सकता है। कोरोना संक्रमित होने के बाद ठीक होने वाले लोगों की भी लोगों का यही संदेश है कि मास्क पहने बिना किसी भी सूरत में घर से ना निकले। लापरवाही बरतने पर ही कोरोना संक्रमित होने का ज्यादा खतरा रहता है। यह कहना है कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हुए लोगों का।

गाडौली गांव के वन्य जीव प्रेमी अनिल गंडास देहरादून वन्य जीव पर आधारित एक सेमिनार में भाग लेने देहरादून गए थे। उनका मानना है कि वे वहीं पर किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने से संक्रमित हो गए। हल्का सा बुखार होने पर जांच कराई जांच में पाजिटिव पाया। अनिल गंडास का कहना है कि आज अस्पताल में जगह कम पड़ रही है। आक्सीजन की कमी हो रही है। लोगों को दवाइयां नहीं मिल रही। इन सब का कारण लोगों में संक्रमित होने के बाद घबराहट है। संक्रमित होने के बाद नियमित रूप से दवाइयां लेकर घर पर ही आराम करने की जरूरत है। केवल उन लोगों को ही इसमें ज्यादा दिक्कत है, जो पहले से किसी भयंकर बीमारी से पीड़ित हैं।

अनिल गंडास बताते हैं कि बीमारी में परिवार के लोगों ने भी पूरा हौसला दिया। इस दौरान मन में किसी प्रकार की नकारात्मक सोच पैदा नहीं होने दी। सोशल मीडिया पर जो कोरोना को लेकर लोग तरह-तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं। उन भ्रांतियों और नकारात्मक खबरों से दूर रहें। अनिल गंडास का कहना है कि एक महीने तक तो किसी भी सूरत में घर से ना निकले। अगर मजबूरी में घर से निकलना भी पड़े तो मास्क और हाथों में दस्ताने जरूर पहन लें। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर तो बिल्कुल ना जाएं। मास्क ही इस बीमारी से बचने की सबसे बड़ी दवा है।

मारुति कुंज में रहने वाले महावीर मिश्रा भी कुछ दिन पहले कोरोना संक्रमित हो गए थे। संक्रमित होने के बाद घर में ही क्वारंटाइन हो गए। उनका कहना है कि इस बीमारी में घबराना बिल्कुल नहीं चाहिए। मन को एकाग्र रखना चाहिए और अच्छे विचार मन में लाने चाहिए। घरवालों को भी मरीज की हिम्मत बढ़ाते रहना चाहिए। ये नहीं कि परिवार में कोई पाजिटिव हो गया है तो उसे अकेला छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से भागें। सावधानी रखकर मरीज की सेवा करें। उसकी हिम्मत बढ़ाते रहें। सब ठीक हो जाएगा। खाने पीने का पूरा ध्यान रखे।

महावीर मिश्रा कहा कहना है कि मन छोटा करने से मरीज की मनोदशा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। और मरीज खुद को अकेला समझने लगता है। इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ाते रहे ताकि वो जल्दी से ठीक हो सके। संक्रमित होने के बाद मरीज व उसके परिवार के लोग हौसला ज्यादा खो रहे हैं। ऐसी स्थिति में हौसला रखें पारिवारिक डाक्टर से समय-समय पर उचित सलाह लेकर अपना इलाज कराएं। वायरस है प्रतिरोधक क्षमता होने पर शरीर में इस वायरस का ज्यादा असर नहीं होता है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले प्रोटीन और खाद्य पदार्थ समय-समय पर लेते रहें।

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