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गुरुग्राम में आलोक मित्तल ने कराई थी राहगीरी की शुरुआत

सत्येंद्र सिंह, गुरुग्राम

सीआइडी के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) बनाए गए आलोक मित्तल अपने खास अंदाज के लिए जाने जाते हैं। गुरुग्राम में संयुक्त पुलिस आयुक्त रहते हुए उन्होंने ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए कई कदम उठाए थे। शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के मकसद से उन्होंने साइकिलिग को बढ़ावा देने के लिए राहगीरी कार्यक्रम शुरू किया था। आलोक खुद पत्नी व बच्चों के साथ साइकिल चलाते हुए घर से सेक्टर-29 स्थित राहगीरी स्थल जाते थे।

आलोक मित्तल के कार्यकाल में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे स्थित सिरहौल टोल प्लाजा को हटाया गया था। दैनिक जागरण की मुहिम को तत्कालीन पुलिस आयुक्त एसएस दलाल के निर्देश पर आलोक मित्तल व तत्कालीन डीसीपी ट्रैफिक भारती अरोड़ा ने पैरवी कर संबल दिया था, जिसके बाद ट्रैफिक जाम का पर्याय बने सिरहौल टोल प्लाजा से लोगों को मुक्ति मिली थी।

फरवरी 2013 में आलोक मित्तल गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त बने तो उन्होंने सबसे पहले पुलिस आयुक्त कार्यालय में जनता दरबार की परंपरा डाली थी। कार्यालय परिसर में ही वह एक घंटे तक सभी की फरियाद सुनते थे। उस वक्त अगर कोई नेता भी आ जाता था, तो उसे भी अपनी बात दरबार में ही रखनी पड़ती थी।

राहगीरी कार्यक्रम के दौरान डीसीपी व एसीपी से लेकर सुरक्षाकर्मी भी साइकिल से ही चलते थे। इसके अलावा वह सप्ताह में एक दिन पुलिस लाइन स्थित आवास से पुलिस आयुक्त कार्यालय तक साइकिल से ही आते-जाते थे। वह अनिवार्य रूप से एक दिन पैदल भी आते-जाते थे। तब वह इतनी तेज चलते थे कि सुरक्षाकर्मियों को उनके साथ दौड़ लगानी पड़ती थी। उन्होंने सरकारी एजेंसियों के साथ बैठक कर शहर में साइकिल ट्रैक बनवाने की शुरुआत कराई थी, मगर तबादले के बाद मुहिम पूरी नहीं हुई।

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