उद्योग जगत पर भारी पड़ता दिख रहा है वायु प्रदूषण

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ता वायु प्रदूषण उद्योग जगत पर भारी पड़ता दिख रहा है। गुरुग्राम की बात की जाए तो बुधवार को शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 400 तक पहुंच गया।

JagranWed, 01 Dec 2021 07:26 PM (IST)
उद्योग जगत पर भारी पड़ता दिख रहा है वायु प्रदूषण

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ता वायु प्रदूषण उद्योग जगत पर भारी पड़ता दिख रहा है। गुरुग्राम की बात की जाए तो बुधवार को शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 400 तक पहुंच गया। उद्यमियों का कहना है कि यदि यही स्तर लगातार बना रहा तो उद्योगों के लिए परेशानी और अधिक हो जाएगी। अभी डीजल जेनरेटर के संचालन और कोयले के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इससे औद्योगिक इकाइयों का काम प्रभावित हो रहा है। सतत प्रकिया से संबंधित औद्योगिक इकाइयों का काम इस समय बुरी तरह से प्रभावित है। इनका कहना है कि यह हाल तब है जब वायु प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में औद्योगिक इकाइयों की कोई खास भूमिका नहीं है।

उद्यमियों का कहना है कि गुरुग्राम स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में अभी 24 घंटे बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है। जबकि इसे लेकर सरकारी स्तर पर लगातार दावा किया जाता रहा है। जब बिजली की अघोषित कटौती होती है तो उस समय औद्योगिक इकाइयों में काम पूरी तरह से बंद हो जाता है। यदि जेनरेटर चलाने की अनुमति होती तो औद्योगिक कामकाज प्रभावित नहीं होता।

आइएमटी मानेसर, उद्योग विहार, आइडीसी, सेक्टर-37, दौलताबाद, बसई, कादीपुर, बिनौला और बहरामपुर औद्योगिक क्षेत्रों में से किसी में भी 24 घंटे बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है। यदि कहीं पावर लाइन में फाल्ट आ जाए तो उसे ठीक कराने में बिजली निगम को काफी समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में उद्योगों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उद्यमी मनीष पाहूजा का कहना है कि गुरुग्राम स्थित औद्योगिक इकाइयों का वायु प्रदूषण से कोई लेनादेना नहीं है। इसके बावजूद इन पर पाबंदी लगाई जाती है।

हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि कोविड-19 महामारी की मार से उबरने का प्रयास कर रहे उद्योग जगत के लिए जब कुछ अच्छा समय आता है उसी समय वायु प्रदूषण सभी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। देश-विदेश से मिले आर्डर को पूरा करने में इन पाबंदियों के कारण परेशानी खड़ी हो सकती है।

उद्यमियों द्वारा सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि वह वायु प्रदूषण के असल कारणों पर प्रहार करे न कि उद्योगों को निशाना बनाया जाए। पाबंदियों के कारण कोयला आधारित उद्योगों, डीजल जनरेटर और गैर-पीएनजी बायलर संचालित औद्योगिक इकाइयों में काम ठप हो गया है। इसका सबसे अधिक नुकसान वस्त्र, माल्ट और आटोमोबाइल क्षेत्र के उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है।

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वायु प्रदूषण को लेकर उद्योगों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाना ठीक नहीं है। यदि उद्यमियों को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति की जाए तो डीजल जेनरेटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। औद्योगिक कामकाज की ²ष्टि से यह समय काफी महत्वपूर्ण है।

प्रवीण यादव, अध्यक्ष, गुड़गांव उद्योग एसोसिएशन

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वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर चिता का विषय है। इसके नियंत्रण को लेकर ठोस योजना बनाने और इस पर काम करने की जरूरत है। प्रयास यह होना चाहिए कि उद्योग जगत का कामकाज किसी भी प्रकार से इससे प्रभावित नहीं होना चाहिए। गुरुग्राम के उद्योगों की वायु प्रदूषण में कोई भूमिका नहीं है।

केके गांधी, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एसोसिएशन, सेक्टर-37

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