सदियों पुरानी सभ्यता के दर्शन पर लेटलतीफी का ग्रहण

- कुनाल में स्वीकृत साइट म्यूजियम दस माह बाद भी कागजी घोड़े से उतर नहीं पाया दूर है अभी ट

JagranSat, 25 Sep 2021 10:53 PM (IST)
सदियों पुरानी सभ्यता के दर्शन पर लेटलतीफी का ग्रहण

मणिकांत मयंक, फतेहाबाद:

कुनाल। तकरीबन सात हजार साल पुराना पुरातात्विक स्थल। भू-गर्भ में हड़प्पा-पूर्व सभ्यता व संस्कृति। वर्ष 1984-85 से करीब बारह बार हुए उत्खनन में सनातनी परंपराओं के अनेकानेक साक्ष्य मिले। मनोहर सरकार ने संज्ञान लिया। करीब दस माह पहले सरकार ने इस ऐतिहासिक-पुरातात्विक स्थल पर साइट म्यूजियम बनाने की स्वीकृति दे दी। सरकार की यह मनोहर मंशा तब से कागजी घोड़े पर ही सवार है। नतीजा यह कि सदियों पुरानी सभ्यता के दर्शन पर बाबुओं की लेटलतीफी का ग्रहण लग चुका है। साइट म्यूजियम की निर्मात्री सरकारी संस्था लोक निर्माण विभाग नौ माह चलकर भी अढ़ाई कोस अर्थात नींव तक नहीं पहुंच पाई है। साइट से ज्ञानार्जन व टूरिज्म बढ़ने पर सरकारी राजस्व बढ़ाने में सहायक संग्रहालय पर जिला प्रशासन भी उदासीन ही है।

ऐसा तब है जबकि पिछले साल के आखिरी महीने में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खुद स्वीकृति दे दी थी। आलम यह कि संग्रहालय का प्रारूप ही अभी फाइनल हो सका है। लोक निर्माण विभाग अब तक एस्टीमेट पास नहीं करवा सका है। विभाग कहता है कि रफ-कास्ट का रिवाइज्ड एस्टीमेट प्रदेश सरकार को भेजा है। पास होने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा। उधर, पुरातत्व विभाग की तैयारी पूरी है। विभाग लगभग दो करोड़ की लागत से बनने वाली इस साइट पर फाउंडेशन स्टोन रखने की जद्दोजहद में है। लेकिन यह सब निर्भर करता है निर्माण-प्रक्रिया की गति बढ़ाने पर। कागजी कार्रवाई पूरी होने तक संभवत: सनातनी सभ्यता के दर्शन पर ग्रहण लगा ही रहेगा।

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कुछ इस तरह होगा संग्रहालय

- पुरातत्व विभाग का लोगो लगा प्रवेश द्वार करेगा स्वागत

- टीलानुमा आकृति होगी

- पैरामीट्रिक छत की अवधारणा

- बाहरी दीवार पर होंगे उत्खनन से मिले अवशेष के चित्र

- फर्श की सुंदरता बढ़ाएंगे हल्के पीले रंग के पत्थर

- वेंटिलेशन आधारित गैलरीज होंगी- चेन लिक फेंसिग से बाउंडरी बनेगी- हरियाली रखेगी गर्मी संतुलित

- रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम व सोलर सिस्टम

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वर्जन..

साइट म्यूजियम के लिए हमारी तरफ से सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। पीडब्ल्यूडी की तरफ से भी इंस्पेक्शन व एनालिसिस हो गई है। हम तो अब फाउंडेशन स्टोन की तैयारी कर रहे हैं। मोटे तौर पर अभी मटका शेप में फाउंडेशन स्टोन की परिकल्पना की गई है।

डा. बनानी भट्टाचार्य, उप निदेशक, राज्य पुरातत्व विभाग।

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वर्जन:::

अभी काम कैये शुरू होगा। एस्टीमेट को एप्रूवल मिलेगी तब तो शुरू होगा न काम। अभी फौरी लागत का संशोधित मूल्यांकन प्रदेश सरकार के विभागीय मुख्यालय भेजा गया है। जहां तक डिजाइनिग आदि की बात है तो ये सारी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं।

- कृष्ण गोयत, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, फतेहाबाद।

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