धान खरीदने से पहले राइस मिलर्स की हड़ताल, ट्रांसपोर्ट व रजिस्ट्रेशन को लेकर सरकार से तनी

धान खरीदने से पहले राइस मिलर्स की हड़ताल, ट्रांसपोर्ट व रजिस्ट्रेशन को लेकर सरकार से तनी
Publish Date:Tue, 29 Sep 2020 07:02 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

आगामी 1 अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होगी। खरीद से पहले राइस मिलर्स ने हड़ताल कर दी है। ऐसे में खरीद शुरू होने से पहले ही परेशनी आनी शुरू हो गई। बेशक परमल धान की सरकारी खरीद होती हो। लेकिन खरीदा गया धान का स्टॉक राइस मिलों में होता था। ऐसे में मिलर्स की हड़ताल की वजह से सरकारी खरीद प्रभावित होगी। फिलहाल आढ़ती हड़ताल से अलग है। लेकिन मिलर्स हड़ताल पर रहेंगे तो आढ़ती भी परमल धान की खरीद से एक बार किनारा कर लेंगे। इसकी वजह है कि परमल धान का स्टॉक सरकार के पास न करके सीधा राइस मिल में होता है। इसके बाद राइस मिल संचालक ही सरकार को धान से चावल निकालकर देते है। लेकिन अब राइस मिलर्स अपनी कई मांगों को लेकर हड़ताल पर है। ऐसे में न तो अपना रजिस्ट्रेशन करवा रहे। नहीं ही एक 1 अक्टूबर को अनाज मंडी में धान खरीदने के लिए आएंगे।

दरअसल, जिले में गत वर्ष 80 लाख क्विंटल धान की सरकारी खरीद हुई थी। इतने धान का स्टॉक जिले की 173 राइस मिलों में किया गया। इस बार भी इससे अधिक धान की खरीद की उम्मीद है। परमल धान का किसान स्टॉक नहीं करते। निकालने के बाद तुरंत मार्केट में बेचने के लिए ले आते है। ऐसे में शुरूआती सप्ताह भी हड़ताल चल गई तो मंडियों में हालत बेकाबू हो जाएंगे। इधर जिन किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पर रजिस्ट्रेशन करवाया था। उन किसानों को सरकार की तरफ से मैसेज भेजा जा रहा है कि अमूक दिन अनाज मंडी में धान लेकर आना है। ऐसे में कोरोना काल में धान की खरीद में अव्यवस्था फैलेगी। जिसका सीधा नुकसान किसान को हैं।

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इसलिए शुरू हुआ विरोध, ऑनलाइन पंजीकरण के नाम पर कई दस्तावेज मांगे :

प्रत्येक वर्ष परमल धान की खरीद से पहले सरकार राइस मिलों का रजिस्ट्रेशन करती है। इस बार यह रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन न होकर ऑनलाइन है। इसमें सरकार ने मिल की क्षमता, गोदाम की क्षमता, प्रदूषण बोर्ड से एनओसी, पिछले पांच साल का रिकार्ड। जिसमें कितना धान खरीदा व कितना चावल वापस किया गया सहित कई जानकारी मांगी गई है। मिलर्स इतनी जानकारी देने के लिए तैयार नहीं है।

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उठान के ठेके का भी आढ़ती व मिलर्स दोनों कर रहे विरोध :

पहले परमल धान की सरकारी बोली होने के बाद मंडी से धान उठान की जिम्मेदारी मिल मालिक की होती थी। इसके बदले में मिल मालिक को रुपये मिलते थे। लेकिन अब सरकार उठान का ठेका देने की तैयारी में है। इसका मिल मालिक व आढ़ती दोनों विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार के पास इतने साधन नहीं होते कि वे नियमित रूप से उठान करें। अब उठान की जिम्मेदारी मिल मालिक की है। ऐसे में वे खरीद गए धान को एक-दो दिन में उठान कर लेते है। लेकिन ट्रांसपोर्ट का ठेका देने के बाद ऐसा नहीं होगा। गेहूं की तरह ही 15 से 20 दिन उठान में लग जाएंगे। इतने में 17 फीसद नमी वाला धान खराब हो जाएगा। जिसका सीधा नुकसान आढ़ती को है। आढ़ती की ही जिम्मेदारी मिल तक पहुंचाने की रहेगी।

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मिलर्स हड़ताल पर न जाए, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी किए नोटिस : मिलर्स

राइस मिलर्स जो परमल धान की पिराई करते हैं। उनको पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी। ऐसे में अधिकांश के पास एनओसी नहीं है। परमल धान का छिलका उतारते समय प्रदूषण भी नहीं होता। अब मिल संचालकों का कहना है कि उनको हड़ताल पर जाने से रोकने लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से नोटिस जारी होने लगे है। जिले की करीब 130 मिल संचालकों को नोटिस जारी किया गया हैं। जिसमें उन्हें प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेने के लिए कहा गया है। जबकि राइस मिलर्स का कहना है कि वे तो कच्चा राइस का काम है। जिसमें प्रदूषण नहीं फैलता।

---------------------- परमल धान से चावल निकालने वाले मिलर्स को प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेने की जरूरत नहीं। लेकिन मिलर्स को नोटिस भेज कर दबाव बनाया जाता है। अब तो ट्रांसपोर्ट भी ठेके पर देने के लिए प्रयास किए जा रहे है। जो गलत है। इतना ही नहीं रजिस्ट्रेशन के नाम पर कई तरह की बंदिशे लगा दी। ऐसे में मिलर्स न तो अपना रजिस्ट्रेशन करवाएंगे और न ही धान खरीद के लिए 1 अक्टूबर को मंडी में जाएगा। हम हमारी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहेंगे।

- मोंटू अरोड़ा, उप-प्रधान, हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन

------------------------------ पहले धान की सरकारी खरीद होने के बाद उठान की जिम्मेदारी राइस मिलर्स की थी। परंतु अब ट्रांसपोर्ट को ठेके पर देने का सरकार प्रयास कर रही है। जो गलत है। इससे आढ़ती व किसान को परेशानी आएगी। गेहूं का उठान 15 दिनों तक नहीं होता हैं। अब ऐसा ही होगा, मंडी में बोरियों से अट जाएगी। जबकि परमल धान की आवक गेहूं जितनी ही होती है। सरकार से आग्रह है कि ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी मिलर्स के पास ही रहने दे।

- अजय गोयल, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता, व्यापार मंडल हरियाणा।

-------------------------------------- जो नोटिस भेजे गए है वे नियमानुसार है। अब नई पॉलिसी के अनुसार सभी प्रकार के राइस मिलर्स को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेनी है। इससे ज्यादा कहूं नहीं कहूंगा। फिलहाल मैं छुट्टी पर हूं।

- राजेंद्र कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा।

------------------------- सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होगी। मिलर्स की मांग उच्चाधिकारियों स्तर की है। उच्चाधिकारी उनके बाद कर रहे है। हमने सभी मंडियों में धान की खरीद के लिए उचित व्यवस्था बना दी है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने देंगे।

- साहब राम, डिस्ट्रिक मार्केटिग इन्फोर्समेंट ऑफिसर फतेहाबाद।

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