जिले में परमल धान का रकबा 20 हजार हेक्टेयर, खरीद हुई 81 लाख क्विंटल

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

परमल धान की खरीद के बोगस जे फार्म काटकर आढ़ती, राइस मिलर्स व अधिकारी गड़बड़ी कर रहे हैं। इससे सरकार को प्रति क्विंटल 200 से लेकर 500 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उक्त तिकड़ी मिलकर खुलेआम ये गड़बड़ी कर रही है। इसका खुलासा विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद हुआ है। अब इसकी जांच की आंच खरीद करने वाले अधिकारियों व मिलर्स पर आएगी। फतेहाबाद में भी इसकी जांच शुरू हो गई।

परमल खरीद के बोगस बिल की बानगी तो देखिए, जिले में इस बार धान का क्षेत्र 1 लाख 17 हजार हेक्टेयर हैं। इसमें से मात्र 20 हजार हेक्टेयर में ही परमल धान की खेती की गई थी। बाकि 97 हजार हेक्टेयर में बासमती धान की खेती। अब मंडी में खरीद शुरू हुई तो सिर्फ परमल धान की आवक अधिक दिखाई जाती है। सोमवार तक जिले की छह अनाज मंडियों में 92 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई। जिसमें से 81 लाख क्विंटल अकेले परमल धान की खरीद शामिल है। बासमती की किस्म का धान 1509, 1121 व मुच्छल की खरीद मात्र 11 लाख क्विंटल दिखाई गई है। जबकि इन किस्मों के धान की अधिक परमल के मुकाबले पांच गुणा अधिक थी।

----------------------------

ऐसे करते है गड़बड़ी :

परमल ए ग्रेड का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1835 रुपये प्रति क्विंटल हैं। इस रेट पर सरकारी एजेंसी खरीदती है। ये रुपये सीधे किसान को देने की बजाए सरकारी खरीद एजेंसी आढ़तियों को देती है। जबकि वास्तव में परमल धान की खरीद 1600 से 1700 रुपये तक ही होती है। जबकि जे फार्म में समर्थन मूल्य से अधिक दिखाकर आढ़ती खरीद एजेंसी से रुपये ले लेता है। इतना ही नहीं वास्तव में खरीद गए 100 क्विंटल परमल धान कागजों में 500 से 700 क्विंटल तक दिखाया जाता है। बकायदा इसकी मार्केट फीस भी दी जाती है। आढ़ती से धान खरीद कर खरीद एजेंसी उसका चावल बनाने के लिए उसे राइस मिलर्स को भेज देते है। मिलर्स संचालक को 1 क्विंटल धान के बदले 67 किलोग्राम चावल खरीद एजेंसी को वापस देने होते है। चावल निकाले पर मिलर्स संचालक को 2 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से अतिरिक्त रुपये भी मिलते है। मिलर्स संचालक जो बोगस धान खरीदता है उस रुपये से वे यूपी व बिहार से सीधे सस्ते चावल मंगा लेते है। ऐसा करते हुए मोटी गड़बड़ी कर रहे है।

---------------------

परमल धान की बोगस खरीद की देते है फीस, बासमती की करते है चोरी :

अब तक 92 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई है। इस अनुसार प्रति एकड़ धान की उपज प्रति क्विंटल 31 क्विंटल 45 किलोग्राम हुई है। जबकि इतना उत्पादन प्रति एकड़ होना असंभव हैं। ऐसा इसलिए है कि परमल धान की मार्केट फीस तो बोगस बिल की भर देते है, जबकि बासमती किस्म के धान की मार्केट फीस चोरी होती है। अभी तो बहुत से किसानों ने धान का स्टॉक किया हुआ है। ऐसे में यह प्रति एकड़ उत्पादन 40 क्विंटल तक पहुंच जाएगा।

----------------------

अधिकांश राइस मिलर्स आढ़तियों की :

जिले में करीब 70 राइस मिलर्स हैं। ये अधिकांश आढ़तियों की ही हैं। ऐसे में उन्हे बोगस खरीद दिखाते हुए गड़बड़ी करने में आसानी होती है। खरीद एजेंसी हैफेड, डीएफएससी व हरियाणा वेयर हाउस के अलावा सभी के बड़े स्तर के अधिकारी भी इसमें शामिल होते है।

-------------------------

किसान के रुपयों का होता है दुरुप्रयोग :

किसान एकता मंच के संयोजक धर्मवीर काजला का कहना है कि इस बार जिले में धान के कुल रकबे में से 10 फीसद ही परमल धान नहीं है। फिर भी 81 लाख क्विंटल परमल धान की खरीद अब तक दिखा दी गई है। ये हजारों करोड़ की गड़बड़ी है। जब तक किसान के नाम पर गड़बड़ी करने वालों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक किसानों का भला नहीं होने वाला। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।

---------------------------

हमने परमल धान मार्केट कमेटी के अधिकारियों की देखरेख में खरीदा है। ऐसे में हमें नहीं पता की धान कहां से आया है। जो मार्केट कमेटी के खरीद अधिकारियों ने बताया है उसे धान को ही खरीद एजेंसी के इंस्पेक्टर ने की है। इसमें हमारे विभाग का किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई।

- प्रमोद शर्मा, डीएफएससी।

------------------------------

परमल धान की खरीद हुई है। इसकी जांच चल रही है। जिसने गलत किया है, सरकार उसे सजा देगी। कमेटी के सचिवों की भी जांच होगी। ये खरीद सरकारी एजेंसियों के मार्फत हुई है। वैसे मार्केट कमेटी को इसकी फीस मिल गई है।

- ओपी राणा, डीएमईओ, कृषि विपणन बोर्ड

1952 से 2019 तक इन राज्यों के विधानसभा चुनाव की हर जानकारी के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.