100 रुपये प्रति लीटर दूध के रेट पर किसान नेता व किसानों में मतभेद

100 रुपये प्रति लीटर दूध के रेट पर किसान नेता व किसानों में मतभेद

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों व उनके नेताओं के बीच मतभेद दूध को लेकर हो गए है। कई गांवों में तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने निर्णय लिया है कि वे 1 मार्च से 5 मार्च तक डेयरियों में दूध नहीं देंगे। जो उनसे दूध 100 रुपये लीटर खरीदेगा।

JagranMon, 01 Mar 2021 07:07 AM (IST)

संवाद सूत्र, भट्टूकलां :

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों व उनके नेताओं के बीच मतभेद दूध को लेकर हो गए है। कई गांवों में तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने निर्णय लिया है कि वे 1 मार्च से 5 मार्च तक डेयरियों में दूध नहीं देंगे। जो उनसे दूध 100 रुपये लीटर खरीदेगा। उसे ही दिया जाएगा। वहीं किसान सभा जिला सह सचिव कामरेड विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि किसान संगठनों द्वारा ऐसा निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि वे संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय से अलग अपने स्तर पर किसी भी प्रकार का कोई निर्णय न ले। इससे आंदोलन प्रभावित होता है। आंदोलन की तरफ से किसानों का ध्यान भटके यही तो सरकार चाहती है।

वहीं, गांव ढिगसरा के किसानों ने मुख्य चौक पर एक बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता पाला राम ने की। किसान मोर्चा कमेटी सदस्य जितेंद्र डूडी, हनुमान गोदारा ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया है कि किसान अपने घरों से अब 1 से 5 मार्च तक डेयरियों में दूध नहीं देगा। अगर कोई दूध लेता भी है तो रेट 100 रुपये प्रति लीटर होगा। उकिसान के उपयोग होने वाली पेट्रोल, डीजल, खाद, बीज, पशु चारे से लेकर पशु के दाने तक का रेट सरकार ने मनमर्जी से बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में सरकार के इस निर्णय के खिलाफ अब किसान दूध 1 से 5 मार्च तक किसी भी डेयरी में नहीं देगा। इस अवसर पर मलकीत, राजेश, किशन, राकेश, मनोहर, हनुमान गोदारा, शीशपाल, प्रताप, लीलू राम, संदीप, जितेंद्र डूडी, पालाराम, रोहतास, बसंत, अमन, छोटू राम, जोगिदर, महेंद्र, राजेंद्र, जगदीश सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे

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आंदोलन प्रभावित करने की कोशिश कर रहे कुछ लोग : किसान नेता

किसान नेता कल्याण सिंह भादू, चांदीराम व मनदीप नथवान का कहना है कि तीन कृषि बिल जमाखोरी, महंगाई व भूखमरी को बढ़ाने वाला है। इसका सभी किसान संगठन के पदाधिकारी विरोध कर रहे है। अब कुछ लोग 100 रुपये दूध के नाम पर आंदोलन को खराब करना चाहते है। अब आमजन को भी भय है कि इन तीनों कानून से उनको भी नुकसान होगा। उनकी भी हमदर्दी किसानों के प्रति है। वहीं 100 रुपये किलोग्राम दूध का अभियान से आमजन भी किसानों से नाराज हो जाएगा। किसान आंदोलन आमजन के लिए है। ऐसे में दूध के नाम पर भ्रामक प्रचार करके आंदोलन को प्रभावित किया जा रहा है।

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