जीवन में मौत का आगमन निश्चित है : जैन संत

जीवन में मौत का आगमन निश्चित है : जैन संत

रतिया इस संसार में सब कुछ बातें निश्चित हैं जैसे शीतकाल की विदाई अमावस्या के बाद पूर्णमासी और दिन के बाद रात का क्रम निश्चित है ठीक वैसे ही जीवन में मौत का आगमन भी निश्चित है।

JagranSun, 18 Apr 2021 07:35 AM (IST)

संवाद सूत्र, रतिया : इस संसार में सब कुछ बातें निश्चित हैं, जैसे शीतकाल की विदाई, अमावस्या के बाद पूर्णमासी और दिन के बाद रात का क्रम निश्चित है, ठीक वैसे ही जीवन में मौत का आगमन भी निश्चित है। यह प्रवचन जैन संत सुमति मुनि जी महाराज, सत्य प्रकाश जी महाराज व समर्थ मुनि जी महाराज ने जैन स्थानक में उपस्थित श्रद्धालुओं को कहे। उन्होंने कहा कि मौत के आगमन का कोई भरोसा नहीं है, वह घड़ी कभी भी आ सकती है इसलिए चलने की पूरी तैयारी रखें। जैन संतों ने कहा कि जिस प्रकार दिया सिलाई में कई तीलियां होती हैं। लेकिन कोई भी यह नहीं बता सकता कि इस तीली का नंबर किस तीली के बाद लगेगा। उन्होंने कहा कि यह जिदगानी पत्थर पर खींची लकीर के समान है। इसलिए हजार काम छोड़कर धर्माचरण कर लेना, उस प्रभु की शरण में जाकर भक्ति कर लेना, यही लोक व परलोक में काम आएगी। संतों ने कहा कि बीमारी की खिड़की हो या बुढ़ापे का दरवाजा, प्रिय की मौत का रोशनदान हो अथवा दुर्घटना का गुप्त द्वार, मृत्यु हर स्थान से झांकती है। उन्होंने कहा कि हम सबको याद रखना चाहिए कि सबकी मौत एक सप्ताह के अंदर ही होगी क्योंकि सप्ताह के सात दिन ही होते हैं, आठवां दिन नहीं आता। उन्होंने कहा कि धर्म तो पारस पत्थर है जो लोहे को सोना बनाता है तथा धर्म ही पत्थर को मूर्ति बना सकता है।

डीएवी स्कूल में श्रद्धाभाव से मनाई महात्मा हंसराज जी की जयंती

संवाद सहयोगी, टोहाना: डीएवी पब्लिक स्कूल में महात्मा हंसराज की जयंती हर्षोल्लास एवं श्रद्धाभाव से मनाई गई। इस अवसर पर प्रिसिपल डा. माला उपाध्याय सहित समस्त स्टाफ सदस्यों ने हवन यज्ञ में भाग लेकर आहुतियां प्रदान की।

इस अवसर पर आशी, जयश्री, केशव और दिव्यम ने भजनों व भाषण के माध्यम से महात्मा हंसराज जी का गुणगान किया और उनके द्वारा किये गये शिक्षा के क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला। स्कूल की प्राचार्य डा. माला उपाध्याय ने संदेश में महात्मा हंसराज जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महात्मा हंसराज जैसे महान तपस्वी आदर्श शिक्षक और तपोनिष्ठा के तप का फल है कि देश और विदेश में डीएवी विद्यालय और महाविद्यालय गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान कर रहें हैं।

उन्होंने बताया कि शिक्षा को गति प्रदान करने के लिए महात्मा हंसराज जी का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने डीएवी शिक्षण संस्थानों के अवैतनिक प्राचार्य पद पर कार्य करते हुए अपना जीवन समाज हित के लिए समर्पित कर दिया।

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