प्राध्यापकों की लड़ाई में विद्यार्थियों का प्रयोग करने की सीबीआई ने दी रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, सिरसा : चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के झगड़े की सीबीआइ जांच को लेकर हाई कोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के अलग अलग गुट बने हुए थे। जिसमें से एक गुट ने अपने हितों को साधने के लिये विद्यार्थियों का भी इस्तेमाल किया। जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट में दिसंबर 2015 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसे हाईकोर्ट ने अप्रैल 2019 को सार्वजनिक किया है। यह रिपोर्ट अब पक्षकारों को भी मिल गयी है।

कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों का प्रयोग किया व उनके साथ धरने पर बैठे। रिपोर्ट में कई छात्रों का नाम सहित उल्लेख किया गया है जिसमें वे प्राध्यापकों के एक ग्रुप के कहने पर विरोधी ग्रुप के प्रोफेसरों के खिलाफ धरना देते, विरोध प्रदर्शन करते व शिकायतें कर चुके है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन को प्राध्यापकों की पदोन्नति प्रक्रिया 20 फरवरी 2015 में करनी थी। इस पदोन्नति प्रक्रिया का विद्यार्थियों के हितों से कोई लेना देना नहीं था। इस भर्ती प्रक्रिया को रूकवाने के लिए विश्वविद्यालय के कुछ लोगों ने सुनियोजित साजिश के तहत विद्यार्थियों को धरने पर बैठाया। रिपोर्ट में बताया गया है कि धरने में विश्वविद्यालय के कानून व लोकप्रशासन, एनर्जी एंड साइंस विभाग, फिजिकल एजुकेशन, इकोनोमिक्स आदि विभागों के करीब 12 प्राध्यापक भी शामिल हुए। हड़ताल के दौरान दो प्राध्यापकों ने भड़काऊ भाषण भी दिया। यह सारे तथ्य एजेंसी को जांच के दौरान संज्ञान में आए।

जांच रिपोर्ट में वर्ष 2013 में विश्वविद्यालय के तीन कर्मचारियों पर दर्ज हुई एफआइआर का भी उल्लेख किया गया है। जिसमें छात्राओं द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत झूठी पाई गई थी। उक्त धरने के पीछे इन कर्मचारियों के भविष्य को खराब करने का उद्देश्य था। जांच एजेंसी ने इस प्रकरण में सीसी फुटेज भी जुटाएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी मामलों में विश्वविद्यालय शिक्षण स्टॉफ व अधिकारी नहीं चाहते थे कि इन मामलों की जांच सीबीआइ करे।

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