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कोरोना काल में हकों के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं आशा वर्कर्स : सुरेखा

कोरोना काल में हकों के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं आशा वर्कर्स : सुरेखा
Publish Date:Thu, 13 Aug 2020 12:04 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

अपनी मांगों व समस्याओं को आशा वर्करों की हड़ताल आज तीसरे दिन भी जारी रहा। सिविल सर्जन कार्यालय पर जिलेभर से आशा वर्करों ने भाग लिया और नारेबाजी की।

धरने की अध्यक्षता प्रधान शीला शक्करपुरा ने की व संचालन सुनीता भोजराज, उषा अहरवां व वीना सहनाल द्वारा किया। धरने में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंची आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य महासचिव सुरेखा ने कहा कि इस महामारी के दौरान सब जहां अपने घरों में है वहीं हम यहां अपने हकों के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आशा वर्करों पर इतने काम थोप दिए है लेकिन उन्हें जो राशियां मिलती थी, उनमें कटौती कर दी है। कोरोना काल में आशा वर्कर्स एक योद्धा के रूप में काम कर रहा है। कोरोना मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री जानना, बुखार की जांच, कोरोना को लेकर सर्व, सेंटर में ड्यूटी, पुलिस के साथ वर्कर्स की ड्यूटी, राशन कार्ड सर्वे सहित अनेक काम आशा वर्करों पर थोंप दिए गए हैं। इसके बावजूद सरकार आशा वर्करों की मांगों व समस्याओं का समाधान करने को लेकर गंभीर नहीं है। अनेक मानी गई मांगों को अब तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की कि आशा वर्कर्स को जब तक पक्का नहीं किया जाता, तब तक उन्हें न्यूनतम वेतन दिया जाए। आशा वर्कर्स को महंगाई भत्ता मिले, उनके आयुष्मान कार्ड बनाकर दिए जाएं। उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता की बजाय स्वास्थ्य कार्यकर्ता का दर्जा दिया जाए। आशा वर्करों पर अनाप-शनाप काम न थोपे जाएं।

इस अवसर पर सुनीता भोजराज, राजबाला दहमन, सरीना पीलीमंदौरी, सविता भूना, उषा जांडवाला, सुलोचना अकांवाली आदि ने भी संबोधित किया।

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