नगर परिषद के अधिकारियों की मनमानी, नहीं दे रहे लोक निर्माण विभाग को जांच के लिए दस्तावेज

सरकार बेशक पारदर्शिता के दावे करती है लेकिन विभागों अधिकारी उपायुक्त के आदेशों को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आ रहे। राजनीतिक शह मिली होने के अधिकारी खुद को कमिश्नर से कम नहीं समझ रहे। तभी तो ये अधिकारी उपायुक्त के आदेश के बाद गठित जांच कमेटी को दस्तावेज तक नहीं दे रहे हैं।

JagranMon, 02 Aug 2021 07:00 AM (IST)
नगर परिषद के अधिकारियों की मनमानी, नहीं दे रहे लोक निर्माण विभाग को जांच के लिए दस्तावेज

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

सरकार बेशक पारदर्शिता के दावे करती है लेकिन विभागों अधिकारी उपायुक्त के आदेशों को ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आ रहे। राजनीतिक शह मिली होने के अधिकारी खुद को कमिश्नर से कम नहीं समझ रहे। तभी तो ये अधिकारी उपायुक्त के आदेश के बाद गठित जांच कमेटी को दस्तावेज तक नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कमेटी के अधिकारी जांच एक महीने से शुरू तक नहीं की। नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता, एमई व ईओ धर्मशाला रोड निर्माण संबंधित दस्तावेज जांच के लिए लोक निर्माण विभाग को नहीं दे रहे। जबकि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी प्राक्कलन की प्रति, टेंडर सहित सभी प्रकार की प्रशासनिक स्वीकृति संबंधित दस्तावेज मांग के लिए पिछले डेढ़ महीने में चार बार पत्र भेज चुके हैं।

दरअसल, करीब 90 लाख रुपये के टेंडर से नवनिर्मित धर्मशाला रोड की गड़बड़ियों की कई शिकायतें उपायुक्त महावीर कौशिक को गली के बाशिदों ने की। अधिक शिकायत आने पर उपायुक्त ने भी रोड निर्माण की वास्तविकता जानने के लिए लोक निर्माण विभाग को 15 जून को जांच करने के आदेश दिए। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता कृष्ण गोयत ने दो एसडीओ आरके मेहता, गजेंद्र कुमार तथा जेई विजय पाल पूनिया व चंद्रमोहन की चार सदस्य कमेटी का गठन किया। इसके बाद कमेटी पिछले डेढ़ महीने में दस्तावेज लेने के लिए चार बार नगर परिषद को दस्तावेज देने के लिए पत्र भेज चुकी है, वहीं दो बार कमेटी में शामिल अधिकारी खुद विजिट कर चुके है, लेकिन दस्तावेज नहीं दिए जा रहे है।

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बिना दस्तावेज के नहीं मिल रही गड़बड़ी, कमेटी ने नहीं करवाए सैंपल :

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेज अभी नहीं मिले है। दस्तावेज मिलने पर जांच करवाई जाएगी। लेकिन कमेटी में शामिल अधिकारियों दस्तावेज न मिलने के चलते जांच कार्य शुरू न करने की बात कह रहे है। वहीं उपायुक्त के आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि निर्माण कार्य के सैंपल लिए जाए। लेकिन लोक निर्माण विभाग ने सैंपल नहीं लिए।

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जन स्वास्थ्य विभाग भी गड़बड़ी में शामिल :

करीब तीन साल पहले धर्मशाला रोड को जन स्वास्थ्य विभाग ने बारिश का पानी निकासी की पाइपलाइन बिछाने के लिए उखाड़ दिया था। पाइपलाइन पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में इतने अधिक रुपये खर्च करने के पानी निकासी की समस्या अब भी बरकरार है। एक राजनीतिक पार्टी के नेता द्वारा दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि जन स्वास्थ्य विभाग की पाइपलाइन का लेवल सही नहीं है। पानी निकासी सही नहीं होती। नगर परिषद अधिकारियों ने भी जन स्वास्थ्य विभाग के कार्य की जांच करवाने की बजाए धर्मशाला रोड का निर्माण करते हुए बिछाई गई पाइपलाइन का भ्रष्टाचार दबा दिया। पाइपलाइन के दौरान नीचे बैड नहीं बनाए थे।

----------------------------------- नगर परिषद के अधिकारी धर्मशाला रोड निर्माण संबंधित दस्तावेज नहीं दे रहे है। ऐसे में जांच शुरू नहीं हुई। दस्तावेज के लिए उपायुक्त को पत्र लिखकर दस्तावेज दिलवाने की मांग की जाएगी। उपायुक्त के आदेश पर जांच शुरू हुई थी। ऐसे में दस्तावेज कमेटी को न देना। ये नियमानुसार सही नहीं है।

- आरके मेहता, एसडीओ, लोकनिर्माण विभाग।

------------------------------------ निर्माण कार्य पर करीब 40 लाख रुपये का खर्च हुआ। सैंपलिग भी थर्ड पार्टी से करवाते हुए पैमेंट जारी की है। इतना ही नहीं मेरे हिसाब से जेई ने लोक निर्माण विभाग को सभी दस्तावेज उपलब्ध करवा दिए गए है।

- सुमित चौपड़ा, एमई, नगर परिषद।

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