12 लाख रुपये की सब्सिडी लेकर बेच रहे कृषि यंत्र, कैसे होगा पराली प्रबंधन

जागरण संवाददाता फतेहाबाद किसान फसलों के अवशेष न जलाए। इसके लिए सरकार अकेले फतेह

JagranSat, 16 Oct 2021 07:53 PM (IST)
12 लाख रुपये की सब्सिडी लेकर बेच रहे कृषि यंत्र, कैसे होगा पराली प्रबंधन

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

किसान फसलों के अवशेष न जलाए। इसके लिए सरकार अकेले फतेहाबाद जिले के किसानों को गत तीन वर्ष में 60 करोड़ रुपये का अनुदान कृषि यंत्रों को खरीदने के लिए दिया। ताकि किसान फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए महंगे यंत्र खरीद सके। फिर भी चंद किसान इसका गलत फायदा उठा गए। परेशानी यह है कि इससे अवशेष जलाने की समस्या लगातार बनी हुई है। इसके लिए जरूरी है कि सरकार प्रति वर्ष जिन किसानों को अनुदान दे रही है। उनके द्वारा खरीदे गए यंत्रों की सालाना जांच हो। जिन किसानों ने अनुदान लेकर कृरूा ियंत्र बेच दिए। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में दूसरे किसान ऐसी गड़बड़ी न कर सके।

कृषि विभाग इस वर्ष 21 करोड़ रुपये का अनुदान किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए यंत्र खरीदने के दिया। जो किसान व्यक्तिगत आवेदन करता है उसे 10 लाख रुपये सब्सिडी दी जाती है, वहीं 8 किसान मिलकर सोसायटी बनाकर आवेदन करते है उन्हें 12 लाख रुपये तक सब्सिडी पर यंत्र दिया जाता है। इस बार तो जिन किसानों आवेदन किया उन सभी को अनुदान देने की मंजूरी सरकार ने दे दी। इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिला। अब ये किसान फसल प्रबंधन में भी सही से भूमिका निभाए। इसके लिए जरूरी है कि गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

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कागजों में 225 स्ट्रा बेलर, यानी धान उत्पादक गांव में औसत दो :

कागजों में जिले में 225 स्ट्रा बेलर हैं। इसी यंत्र से धान के अवशेष की गांठें बनाई जाती है। अकेले इस बार 32 स्ट्रा बेलर किसानों को दी गई। एक मशीन करीब 16 से 20 लाख रुपये में आती हैं। सरकार इन पर 12 लाख रुपये अनुदान देती हैं। वैसे इतनी स्ट्रा बेलर कागजों में चल रही है। हकीकत में आधी ही नहीं है। जिले में 129 गांव पूरी तरह धान उत्पादक है। यदि स्ट्रा बेलर जिले में मौजूद हो तो किसानों को फसलों के अवशेष की गांठें बनाने में किसी प्रकार की परेशानी न आए।

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गत सात सालों में सरकार ने दिया 10 हजार से अधिक किसानों अनुदान :

जिले के 4500 किसानों को सरकार ने अब तक व्यक्तिगत तौर पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए अनुदान दिया हैं। वहीं जिले में 637 कस्टमर हायरिग सेंटर यानी सीएचसी। यह सेंटर तभी बनता है जब कम से कम आठ किसान मिलकर एस सोसायटी गठित करते है। ऐसे में इन सोसायटी में पांच हजार 200 से अधिक किसान जुड़े हुए है। उसके बाद भी पराली प्रबंधन का सही से कार्य नहीं हो रहा। कई तो ऐसे किसान भी है जो अनुदान पर यंत्र लेते है, लेकिन अवशेष जलाते है।

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इस तरह होती है गड़बड़ी :

सरकार कृषि अभियांत्रिक विभाग के मार्फत जिन किसानों से आवेदन लेकर अनुदान देती है। उनके खरीदे गए यंत्रों का एक बार यंत्र सत्यापन होता है। इसके बाद अनुदान जारी कर दिया जाता है। कई किसान तो यंत्र को एक बार डीलर से ले जाकर सत्यापन करवाते है। उसे वापस डीलर को ही दे जाते है। जो अनुदान मिलता है। उसका कुछ हिस्सा पक्का बिल लेने के नाम पर लगी जीएसटी व डीलर के कमिशन में चला जाता है 70 फीसद सब्सिडी किसान खपा जाता है। वहीं कई किसान अनुदान पर मिले यंत्र को आगे बेचकर गड़बड़ी कर रहे है।

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सरकार करोड़ों का अनुदान देकर भी गुप्त रख रही किसानों का नाम :

बेशक सरकार हर बार किसानों को कृषि यंत्र खरीदने के लिए करोड़ों रुपये का अनुदान दे रही है। लेकिन जिन किसानों को अनुदान दिया जाता है। उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता है। अब जिले में 225 स्ट्रा बेलर हैं। ये किसे पास है। इसकी जानकारी अधिकारी अपने पोर्टल पर सार्वजनिक नहीं कर रहे। ऐसे में अनुदान लेकर किसान आसानी से गड़बड़ी कर जाते है।

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इसलिए जरूरी है लाभार्थी किसानों को नाम सार्वजनिक करना :

जिन किसानों को सरकार सोसायटी यानी कस्टमर हायरिग सेंटर के लिए कृषि यंत्र खरीदने के लिए अनुदान देती हैं। वे किसान बकायदा शपथ पत्र देते हैं कि अपने यंत्र आगे भी किसानों को किराए पर देंगे, ताकि समग्र किसान को इसका लाभ मिल सके। किसान सीएचसी बनाने के लिए अनुदान तो सरकार से ले लेते है, लेकिन बाद में अपने यंत्र बेच देते है। ऐसे में लाभार्थी किसानों के नाम सार्वजनिक होने से गड़बड़ी रूकेगी। ऐसे में सरकार से आग्रह है कि प्रत्येक जिले की एनआईसी द्वारा बनाई गई साइड पर इनकी जानकारी अपलोड करे।

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अनुदान लेने वाले किसानों की संख्या : 10 हजार के करीब

जिले में कस्टमर हायरिग सेंटर : 637

जिले में स्ट्रा बेलर : 225

जिले में सुपर सीडर : 792

हैप्पी सीडर : 460

रूटावेटर : 640

अन्य यंत्र : 2700

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अनुदान पर लेकर किसान नहीं बेच सकता यंत्र : भाम्भू

जो किसान किसी भी प्रकार के यंत्र पर अनुदान पर लेता है। इसके लिए बकायदा शपथ पत्र देता है कि पांच साल तक उस यंत्र को नहीं बेचेगा। ऐसे में कोई भी किसान नियम तोड़ता है तो उससे अनुदान की राशि रिकवर करने के अलावा मामला दर्ज करवाने का प्रावधान है। यदि किसी किसान ने यंत्र बेच दिए तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं जिन किसानों कस्टमर हायरिग सेंटर बनाने पर अनुदान लिया। वे आगे किसानों को अपने यंत्र किराए पर देंगे। ऐसा न करने पर कार्रवाई होगी।

- सुभाष भाम्भू, सहायक अभियंता, कृषि अभियांत्रिकी, फतेहाबाद।

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