फरवरी जाते-जाते दे गई राहत , चार डिग्री घटा न्यूनतम तापमान

फरवरी जाते-जाते दे गई राहत , चार डिग्री घटा न्यूनतम तापमान

फरवरी में तापमान रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के बाद महीना जाते-जाते गुजरने के साथ ही राहत भी देकर गया है। यह कमी पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदली हवाओं के कारण आई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक सुबह व शाम ठंडक फिर से बढ़ सकती है। रविवार को न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस गिरावट के साथ नौ डिग्री तक पहुंच गया। शनिवार को न्यूनतम तापमान 13 डिग्री रहा था।

JagranMon, 01 Mar 2021 07:06 AM (IST)

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

फरवरी में तापमान रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के बाद महीना जाते-जाते गुजरने के साथ ही राहत भी देकर गया है। यह कमी पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदली हवाओं के कारण आई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक सुबह व शाम ठंडक फिर से बढ़ सकती है। रविवार को न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस गिरावट के साथ नौ डिग्री तक पहुंच गया। शनिवार को न्यूनतम तापमान 13 डिग्री रहा था। रविवार को अधिकतम तापमान भी 27 डिग्री रहा।

विदित रहे कि वीरवार व शुक्रवार को फरवरी महीने में तापमान 32 डिग्री तक पहुंच गया। जो अपने आम में रिकार्ड स्तर पर था। इसके बाद पश्चिमी विक्षोभ के चलते आए मौसम में बदलाव से तापमान में कमी आई है। मौसम में आए परिवर्तन के चलते कई जगहों पर रात को तापमान कम हुआ है। सुबह व शाम को ठंड का अहसास होने लगा है। रविवार को न्यूनतम तापमान में गिरावट आने से सुबह के समय ठंड का अहसास हुआ। यह सब पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में आए बदलाव के चलते हुआ है। इससे हवाओं का रूख बदला है। अब स्थितियां बदल रही है पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पार कर पूर्वी दिशा में चला गया है। पहाड़ों पर मौसमी हलचल लगभग बंद हो गई है। मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि अब ठंडी हवाएं पहाड़ी क्षेत्र से मैदानी इलाकों की तरफ चलेंगी। जिसके प्रभाव से दिन व रात के तापमान में भी कमी देखने को मिल सकती है।

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रविवार को यह रहा दिनभर मौसम का हाल

रविवार को अधिकतम तापमान गिरावट के साथ 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं न्यूनतम तापमान भी गिरावट के साथ 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय नमी की मात्रा 51 फीसद दर्ज की गई जो शाम को घटकर 31 फीसदी रह गई। हवा का दबाव सुबह 11.2 फीसदी दर्ज किया गया जो शाम तक बढ़कर 17.1 फीसद हो गया। हवा 2.1 किलोमीटर प्रतिघंटा की औसत रफ्तार से चली।

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चेपा बीमारी से फसल का बचाव जरूरी :

बदलते मौसम में चेपा बीमारी का प्रकोप अधिक आता है। अब बदल रहे मौसम में इस बीमारी ने गेहूं, सरसों व अन्य फसलों पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बीमारी बड़ी संख्या फसल को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन इसके लिए महंगी व खतरनाक स्प्रे करने की जरूरत नहीं है। चेपा का प्रकोप है तो किसान अपने निकटवर्ती कृषि अधिकारी व कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करते हुए दवा का छिड़काव करें।

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लगातार मौसम बदल रहा है। किसान बदलते मौसम में लगातार फसलों का ध्यान रखे। यदि किसी फसल में चेपा बीमारी का प्रकोप आ गया है तो अपने गांव के एडीओ से संपर्क करते हुए दवा का छिड़काव करें। मौसम विभाग के अनुसार 1 मार्च तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। 2 मार्च के बाद किसान गेहूं की सिंचाई कर सकते हैं।

- डा. भीम सिंह कुलड़िया, एसडीओ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।

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